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बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेण्य ने मंगलवार देर रात स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति यानी कि वीआरएस ले लिया है 1987 बैच के भारतीय पुलिस सेवा यानी कि आईपीएस के अधिकारी थे। उनके बीआरएस को ग्राहक विभाग ने मंजूरी प्रदान कर दी है। उनके बाद अब बिहार राज्य के फायर सर्विस एवं होमगार्ड के डीजी संजीव सिंहल को डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी रहे डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेण्य ने स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति लेकर जेडीयू से चुनाव लड़ने का फैसला लिया है।बता दे ये वही बहुत चर्चित डीजीपी है जिन्होंने कुछ दिन पहले सुशांत सुसाइड केस में रिया चक्रवर्ती को औकात दिखाने वाले शब्दों के जरिए प्रहार कर चर्चा में आए थे गुप्तेश्वर पांडेण्य को 31 जनवरी 2019 को बिहार का डीजीपी बनाया गया था।उनका कार्यकाल 28 फरवरी 2021 था। लेकिन 22 सितंबर को उन्होंने स्वेच्छा से सेवानिवृत्त होने का फैसला लेते हुए पुलिस सेवा के बाद अब राजनीति के अखाड़े में अगली पारी शुरू करने का फैसला लिया है। प्रबल सूत्रों के मुताबिक वह जनता दल यूनाइटेड के प्रत्याशी के रूप में बिहार विधानसभा चुनाव बक्सर से लड़ेंगे। वर्तमान में बिहार के डीजीपी पद का अतिरिक्त कार्यभार संभालने वाले संजीव कुमार बंसल बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा समेत कई जिलों के एसपी व एएसपी के साथ डीआईजी आईजी, एडीजी और डी जी के पद का कार्यभार संभाल चुके हैं सिंघल को बिहार के तेजतर्रार अफसरों में गिना जाता है। चर्चा है कि बिहार सरकार डीजीपी पद पर जल्दी की सिंघल की पूर्णकालिक तैनाती कर देगी।सुशांत सुसाइड केस में मुख्य आरोपिता रिया चक्रवर्ती के लिए औकात शब्द का प्रयोग करने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेण्य को इसके लिए सफाई तक देनी पड़ी थी।पटना की गलियों में चर्चा है कि बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेण्य ना ना करते हुए हॉ कर ही बैठे, 1 माह पहले 23 अगस्त को न्यूज़ पोर्टल ने खोजी पत्रकारिता करते हुए बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे की इस्तीफे की खबर चलाई थी। साहब खबर की वजह से कुछ दिन और रुक कर पोर्टल की खबर को झुठला बैठे, फिरहाल उस दिन की सच्चाई ज्यादा दिन नहीं चली यानी आज 22 सितंबर की आधी रात बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने इस्तीफा दे पोर्टल की खबर पर मोहर लगा सोशल मीडिया पर फजीहत करवानी शुरू कर दी है इस समय वह ट्वीट भी बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। बताने 2009 में चुनाव लड़ने की आस में पांडेण्य साहब ने brs लिया, चुनावी टिकट ना मिलने की वजह से पुन: सर्विस में ढीली नियमों की वजह से सीएम नीतीश कुमार के प्रयास से वापसी की इसके बाद पुलिस महकमे की बॉस बन बैठे अपना टिकट की आस में फिर चर्चा है। बीजेपी जेडीयू की बेहद करीबी रहे डीजीपी साहब को नितीश कुमार की पार्टी से टिकट दिए जाने की पुख्ता खबर है।

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