भारत चीन सीमा पर लद्दाख में बिगड़े हालातों के बीच भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की बैठक में बॉर्डर से तनाव खत्म करने के लिए सहमति बनी है भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर चीन के विदेश सचिव एतराज जताते हुए कड़े शब्दों में कहा लद्दाख सीमा की यथास्थिति बदलने की चीन की किसी भी कोशिश तुम्हारा यूं ही देखता नहीं रहेगा बता दे 10 सितंबर को शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन में हिस्सा लेने के लिए भारत के विदेश सचिव व चीन के विदेश सचिव रूस की राजधानी मॉस्को में मिले। सीमा पर शांति बनाने के लिए दोनों पक्षों के बीच पांच बिंदुओं पर सहमति बनी जो कि- नीचे आप बखूबी हिंदी इंग्लिश दोनों भाषाओं में बिना किसी परिवर्तन के पढ़ सकते हैं।

विदेश मंत्री और चीन के विदेश मंत्री (10 सितंबर, 2020) की संयुक्त प्रेस वक्तव्य की बैठक 10 सितंबर, 2020 में एच.ई. भारत के विदेश मंत्री डॉ। एस जयशंकर ने एच.ई. शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक की ओर से मॉस्को में राज्य के पार्षद और चीन के 10 वें विदेश मंत्री, वांग यी। दोनों मंत्रियों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों के साथ-साथ भारत-चीन संबंधों के घटनाक्रमों पर एक स्पष्ट और रचनात्मक चर्चा की और इस प्रकार सहमत हुए: 1. दोनों मंत्रियों ने सहमति व्यक्त की कि दोनों पक्षों को आम सहमति की श्रृंखला से मार्गदर्शन लेना चाहिए भारत-चीन संबंधों को विकसित करने पर नेताओं, जिसमें मतभेदों को विवाद बनने की अनुमति नहीं है। 2. दोनों विदेश मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मौजूदा स्थिति किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। वे इसलिए सहमत हुए कि दोनों पक्षों के सीमा सैनिकों को अपना संवाद जारी रखना चाहिए, जल्दी से विघटन करना चाहिए, उचित दूरी बनाए रखना चाहिए और तनाव कम करना चाहिए। 3. दोनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि दोनों पक्ष चीन-लंडिया सीमा मामलों पर सभी मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन करेंगे, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और शांति बनाए रखेंगे और ऐसे मामलों से बच सकते हैं जो मामलों को आगे बढ़ा सकते हैं। 4. दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधि तंत्र के माध्यम से बातचीत और संचार जारी रखने के लिए भी सहमति व्यक्त की। उन्होंने इस संदर्भ में भी सहमति व्यक्त की कि भारत-चीन सीमा मामलों (WMCC) पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र को भी अपनी बैठकें जारी रखनी चाहिए। 5. मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि जैसे ही स्थिति आसान होती है, दोनों पक्षों को सीमा क्षेत्रों में शांति और शांति बनाए रखने और बढ़ाने के लिए नए कॉन्फिडेंस बिल्डिंग उपायों को समाप्त करने के लिए काम में तेजी लानी चाहिए। मास्को 10 सितंबर, 2020

भारतीय विदेश मंत्री एस। जयशंकर के साथ वांग यी मीट 10 सितंबर को स्थानीय समय में राज्य के पार्षद और विदेश मंत्री वांग यी ने मास्को में एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक के मौके पर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मुलाकात की। वांग ने कहा कि चीन और भारत के बीच दो पड़ोसी प्रमुख देशों के बीच मतभेद होना सामान्य है। द्विपक्षीय अंतर संबंधों को एक उचित संदर्भ में इन अंतरों को रखना महत्वपूर्ण है। इसके लिए महत्वपूर्ण यह है कि चीन और भारतीय नेताओं के बीच रणनीतिक सहमति से मार्गदर्शन लिया जाए कि चीन और भारत प्रतिस्पर्धी प्रतिद्वंद्वी या एक-दूसरे के खतरे नहीं हैं, बल्कि सहयोग साझेदार और एक-दूसरे के विकास के अवसर हैं। वांग ने जोर देकर कहा कि दो बड़े विकासशील देशों के रूप में तेजी से उभर रहे चीन और भारत को अभी जो सहयोग चाहिए, वह टकराव नहीं है; और आपसी विश्वास, नहीं

संदेह। जब भी स्थिति कठिन हो जाती है, समग्र संबंध की स्थिरता सुनिश्चित करने और आपसी विश्वास को बनाए रखने के लिए यह सभी महत्वपूर्ण है। वांग ने कहा कि चीन-भारत संबंध एक बार फिर चौराहे पर आ गए हैं। लेकिन जब तक दोनों पक्ष रिश्ते को सही दिशा में आगे बढ़ाते रहेंगे, कोई कठिनाई या चुनौती नहीं होगी जिसे दूर नहीं किया जा सकता है। वांग ने सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति पर चीन की कड़ी स्थिति को रेखांकित किया, इस बात पर जोर दिया कि अनिवार्यता तुरंत गोलीबारी और अन्य खतरनाक कार्यों जैसे उकसावे को रोकने के लिए है जो दोनों पक्षों द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करती है। उन सभी कर्मियों और उपकरणों को वापस स्थानांतरित करना भी महत्वपूर्ण है जिन्होंने अतिचार किया है। सीमांत सैनिकों को जल्दी से विघटन करना चाहिए ताकि स्थिति डी-एस्केलेट हो सके। चीनी पक्ष विशिष्ट मुद्दों को हल करने के लिए दोनों पक्षों पर सीमांत सैनिकों के बीच बढ़ी बातचीत का समर्थन करने के लिए तैयार है। चीनी पक्ष राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से भारतीय पक्ष के संपर्क में रहेगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और शांति बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध होगा। जयशंकर ने कहा कि भारतीय पक्ष नहीं चाहता है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ने के लिए तनाव। चीन के प्रति भारत की नीति नहीं बदली है। भारतीय पक्ष का मानना है कि भारत के प्रति चीन की नीति भी नहीं बदली है। भारतीय पक्ष भारत-चीन संबंधों के विकास को सीमा प्रश्न के निपटारे पर निर्भर नहीं मानता है और भारत पीछे नहीं हटना चाहता। सच्चाई यह है कि भारत-चीन संबंधों ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार प्रगति की है। चीनी और भारतीय नेताओं ने कई बार मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों के विकास पर महत्वपूर्ण सहमति की एक श्रृंखला तक पहुंचे। भारतीय पक्ष चीन के साथ बातचीत और बातचीत के माध्यम से सीमा पर तनाव कम करने और सीमा क्षेत्रों में शांति और शांति बहाल करने और बनाए रखने के लिए तैयार है। दोनों पक्षों ने पूर्ण स्थिति में गहन चर्चा के बाद वर्तमान स्थिति के बारे में पांच-बिंदु सर्वसम्मति पर पहुंच गए।

[ऊपर दिए दस्तावेजों का हिंदी रूपांतरण]
**************””””””””””””‘***********”

बता दे भारत व चीन की विदेश सचिवों के बीच बातचीत में यह तय हुआ है कि वह 5 बिंदुओं पर गौर कर आपसी तनाव को कम कर बॉर्डर पर शांति बनाए रखने के लिए राजी हुए हैं वही दोनों देशों के सचिव के मुताबिक इसके साथ अन्य मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी जिससे तनाव को कम कर हालात सामान्य होने के साथ दोनों देश एक दूसरे का भरोसा जीतने वाले काम करेंगे जिससे शांति बनी रहे शब्द समझौतों के बीच एस जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री से साफ तौर पर कहा है कि बॉर्डर पहले वाली स्थिति में बदलाव की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा वहीं उन्होंने भारत बॉर्डर पर चीनी सेना की भर्ती तैनाती पर चिंता जताते हुए कहा 1993 1996 के समझौते के खिलाफ जाती है भारत ने कहा कि इतनी तैनाती की गई इसका सीधा जवाब तक नहीं दिया है जयशंकर ने कहा कि भारत अब तक हर समझौते का पालन करता आया है जयशंकर के कड़े रुख के बाद बातचीत के दौरान नरवर में भोले पड़ोसी होने के नाते दोनों देशों के बीच मतभेद होना आम है लेकिन इसमें दीपक्षी रिश्तों पर असर नहीं पड़ना चाहिए चीन के विदेश सचिव ने आगे कहा क्या बातचीत से बॉर्डर मुद्दे को सुलझाने के पक्ष में है।

बातचीत से अलग चीन का रहा है सदैव दोहरा रवैया

दुर्भाग्य से भारत के दो नापाक पड़ोसी चीन व पाकिस्तान दोनों की करनी और कथनी में फर्क रहा है, दोनों बातचीत की आड़ में पीठ में छुरा भोंकने का काम करते आए हैं 1965 में भारत ने बखूबी चीन की चालबाजी हिंदी चीनी भाई भाई का गला घोट पीठ में छुरा भोंकने को देख चुका है इसलिए चीन की चालबाजी कूटनीति को समझते हुए भारत हर स्तर पर कदम उठा चीन की हर चाल को उसी की भाषा में जवाब देने की फिराक में है भारत चाहता है कि शांतिपूर्ण तरीके से हल हो जाए, लेकिन चालबाज चीन बातचीत के आड़ में प्रोपेगेंडा कर सीमा पर लगातार तनाव बढ़ाने की कोशिश में लगा है। भारत और चीन के मध्य बातचीत के जरिए हल होना बहुत अच्छा कदम है। लेकिन कहीं यह चीन की कोई चाल का हिस्सा तो नहीं इसमें भी दो राय नहीं है। सीमा पार चीन पाकिस्तान दोनों को उसी की भाषा में जवाब मिलने की वजह से उनके तेवर ढीले पड़े हुए हैं यही कारण है लगातार चीन बातचीत कर तैयारी करने में जुटा हुआ है। भारत भी चीन की हर चालबाजी को देखते हुए मुस्तैद है चीन का दोहरा रवैया रहा है बातचीत की आड़ में पीठ में छुरा भोंकना, इस बार चीन की नियत कितनी साफ है ? यहा क्या कहना भी अभी जल्दबाजी ही होगा।

रूस भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच रूस की राजधानी मास्को त्रिपक्षी वार्ता शंघाई सहयोग संगठन के दौरान हुई जिसमें 1 घंटा 40 मिनट चली बैठक में दो पक्षों के बीच 5 सूत्री समझौते हुए जिससे कुछ शांति की उम्मीद की जा सकती है जयशंकर के मुताबिक चीन की सेना के आक्रमक रुख की वजह से एलएसी पर दोनों देशों के मध्य समझौतों का उल्लंघन होने के बाद तनाव बढ़ा बता दे मौजूद समय पर वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएचसी पर भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं लगातार चीन की हिमाकत भारतीय क्षेत्रों के क्षेत्र अधिकार को तोड़ते हुए कब्जे करने की है लेकिन भारत के कड़े रुख के बाद चीन बौखलाया हुआ है।

क्रेडिट ट्यूटर इनपुट समेत

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here