उत्तर प्रदेश दिन पर दिन गुंडे बदमाशों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं दूसरी तरफ कानून व्यवस्था का दावा करने करने वाली खाकी घटना के 3 घंटे बाद पहुंच लकीर पीटने की कार्रवाई शुरू करती नजर आई,

बता दे सुल्तानपुर के बल्दीराय थाना क्षेत्र के टंडरसा मजरे के ऐंजर गांव में पत्रकार प्रदीप सिंह की 18 वर्ष की लड़की श्रद्धा सिंह अपने दरवाजे पर लगे नल पर पानी भर रही थी इसी दौरान गांव के ही आरोपी सुभाष, महंथ, जयकरन परसौली निवासी पहुंचे और पीड़िता के हाथ पैर बांधकर मुंह में कपड़ा ठूंस केरोसिन का तेल छिड़क किशोरी को आग के हवाले कर बेखौफ दबंग फरार हो गए, आग लगने के बाद तड़पती चीखती चिल्लाती किशोरी मदद की गुहार लगाने लगी पीड़िता के चीखने चिल्लाने पर लोगों ने उसकी मदद कर परिवार वालों की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धनपतगंज लेकर पहुंचे किशोरी 80% से ज्यादा जल चुकी थी।

गंभीर अवस्था में डॉक्टरों ने उसे जिला हॉस्पिटल रेफर किया गया। जहां से उसे लखनऊ ट्रामा सेंटर हस्तांतरण कर दिया गया। दिनदहाड़े किशोरी की हाथ पैर बांधकर जिंदा जला निर्मम हत्या जैसे घिनौने रूंहकपा देने वाले अपराध की घटना के करीब 3 घंटे बाद घटनास्थल पर पुलिस पहुंची।

पुलिस पर भी उठ रहे सवालिया निशान

जानकारी के मुताबिक कहां जाता है कि बल्दीराय थाना अध्यक्ष अखिलेश सिंह की भूमिका शुरुआत से ही संदिग्ध रही है। पीड़ितों के मुताबिक विवाद कुछ वक्त पुराना है।जब बल्दीराय थाना क्षेत्र के टंडरसा मजरे के ऐंजर गांव में पत्रकार प्रदीप सिंह ने खतौनी की जमीन में वृद्ध के शव दफनाने का विरोध करने पर थाना अध्यक्ष बल्दीराय अखिलेश सिंह खुद मैंय फोर्स के साथ पहुंचकर खतौनी की जमीन पर जबरन शव दफनाने का विरोध कर रहे पत्रकार की बातों को दरकिनार कर जबरदस्ती उसी जमीन में शव दफान करवा दिया था।

पूरा विवाद यहीं से शुरू हुआ जिसके बाद दोनों पक्षों में जमकर लाठी-डंडे चले जिसमें कई राजगीर समेत दर्जनों लोग घायल हो गए इस पूरी वारदात के बाद 5 बाइकों को आग के हवाले कर दिया गया था। ग्रामीणों के मुताबिक पत्रकार प्रदीप सिंह का गांव के ही जयकरण से जमीनी विवाद था। विगत लॉकडाउन के दौरान 2 जून को भूमि पर कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई जिसमें कई लोग गंभीर रूप से जख्मी भी हुए थे। उस मारपीट में प्रदीप सिंह के विपक्षी 80 वर्षीय कुंवर सिंह घायल हो गए। उनकी इलाज के दौरान लखनऊ में मौत हो गई। इस पूरे हत्या के मामले में पत्रकार प्रदीप सिंह समेत 13 लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया। जिनमें से 8 लोगों को घायल अवस्था में ही उठाकर जेल में डाल दिया गया। आरोप है कि दूसरे पक्ष के नामजद 12 लोग व एक अज्ञात खुलेआम पुलिस के संरक्षण के चलते बचते रहे। इसी वजह से खुलेआम दबंग बेखौफ हो प्रदीप सिंह की 18 वर्षीय लड़की को दिनदहाड़े हाथ पैर बांधकर घिनौनी वारदात को अंजाम देते हुए जिंदा जलाकर मार डाला है। पीड़ितों के साथ ग्रामीणों के भी पुलिस के रवैए को लेकर आरोप बेहद गंभीर है बेहतर कानून व्यवस्था के लिए पूरे मामले की जांच कराकर मामले में जो भी अधिकारी दोषी हो उन पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत है ताकि कानून व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बना रहे।

पूरे मामले पर पुलिस ने प्रेस रिलीज जारी कर अपना पक्ष रखा उसे भी पढ़कर समझने की कोशिश करिएगा।

ग्रामीणों के मुताबिक समय रहते अगर आरोपियों पर कार्रवाई की गई होती तो इस घटना को रोका जा सकता था। लेकिन आरोपियों पर समुचित कार्रवाई ना होने के चलते अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए कि उन्होंने जेल में बंद घायल पत्रकार की बेटी को दिनदहाड़े जिंदा जला कर मार डाला। नाम बताने वह छापने से ग्रामीणों ने इनकार किया है ग्रामीणों को दबंगों व पुलिस का डर है कि कहीं उन्हें किसी फर्जी मामले में फंसा कर जेल में डाल दिया जाए। उन्होंने ने बताया हम सामने आकर दबंगों से दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहते हैं। कल को वह हमारी बेटी बहू को निशाना बना सकते हैं।

इस हत्या के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है ?

आखिर कब होगी है दरिंदों की गिरफ्तारी ?

कब होगी जिम्मेदार लापरवाह हो पर कार्यवाही ?

पीड़िता के दर्द को महसूस करके देखिएगा अगर इसकी जगह पर आपकी बेटी होती तब ?

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