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हाथरस डीएम एसपी पर कब होगी कार्यवाही ?

जीते जी हुई दरिंदगी मरने के बाद भी क्रूरता, क्यों शव का विधिपूर्वक नहीं हो सका अंतिम संस्कार ?, क्या यही है हिंदू रीति रिवाज ? उत्तर प्रदेश के हाथरस में हैवानियत भरे कांड के बाद पीड़िता को न्याय दिलाने के नाम पर खाना पूर्ति करते हुए पूरे मामले में पुलिस प्रशासन का रवैया इतना पक्षपातपूर्ण रहा जिसकी कल्पना ही नहीं की जा सकती एक सभ्य समाज में जलील करने वाली वारदात की तरह महसूस हो रहा है जीते जी पीड़िता को इंसाफ नहीं मिल सका, मरने के बाद सही से दह संस्कार भी नहीं किया गया, लोगों में इस घटना के प्रति भारी आक्रोश का माहौल है। सफदरजंग हॉस्पिटल से परिजनों को बिना बताए शवलाकर रात 2:00 बजे उसे पुलिस द्वारा मानव चैन बनाकर बिना परिजनों की अनुमति के जला दियी गया है। यहा मैं संस्कार इसलिए नहीं लिख रहा हूं क्योंकि अंतिम संस्कार में पूरे विधि विधान से परिवार घर वाले व रिश्तेदार शामिल होते हैं यह परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था ना ही हिंदू रीति रिवाज के अनुसार रात में दाह संस्कार करने का कोई प्रावधान है। आखिर क्यों पीड़िता का (दाह संस्कार नहीं) शव को बिना परिजनों की मौजूदगी व बिना अनुमति के जलाने की इतनी जल्दी क्यों थी? बड़े अरमानों से पाल पोस कर बड़ा करने वाले माता-पिता को एक झलक दिखाने की बात करने पर भी पुलिस प्रशासन द्वारा अमानवीय व्यवहार दिखाते हुए झलक दिखाने से इंकार कर दिया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। न ये हिंदू रीति रिवाज का हिस्सा है ना हिंदू रीति रिवाज में कहीं भी शव को रात में दाह संस्कार किया जाता है खैर प्रदेश के मुख्यमंत्री खुद योगी है और उनकी पुलिस के ही यह कारनामे हैं, खैर पुलिस के तर्क पर जाएं तो सारी मान मर्यादा संस्कार हिंदू रीति रिवाज सब ताक पर रख दिया गया। क्योंकि कानून व्यवस्था का डर था? साहब कानून व्यवस्था का डर? क्या परिजनों को चेहरा दिखाने में भी डर था? जो कानून व्यवस्था ही न संभाल सके ऐसी पुलिस की क्या जरूरत?

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पीड़ित परिवार को डर दिखाकर बयान बदलवाने पर तुले जिलाधिकारी

क्या दबदबा जातिवाद का है खैर इसी जाति से प्रदेश के बड़े-बड़े अधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक आते हैं जिस गांव में घटना हुई है वहां पर ठाकुरों के अलावा ब्राह्मणों के घर हैं केवल 4 ही घर दलित के हैं इस घटना के पीछे एक और इतिहास है काफी दिनों पहले पीड़िता के दादा की पिटाई के चलते आरोपी बाप व चाचा 4 माह की जेल की हवा खा चुके थे। जिसके चलते बदले की वजह से इस लड़की को शिकार बनाया गया। खैर यह हैवानियत भरी कोई पहली घटना नहीं है आप रिकॉर्ड खंगाल कर देखिए पता चलेगा कानून व्यवस्था पहलू कुछ सही नजर आता है लेकिन घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रहे आखिर क्यों ?
फिर आखरी वही सवाल सामाजिक मर्यादा हिंदू रीति रिवाज के अंतिम संस्कार माता-पिता को अंतिम दर्शन तक न करने देने वाले प्रशासन से लेकर उस जिम्मेदार पर आखिर कार्यवाही कब होगी ?

साहब इसके बजाय अगर आपकी बेटी होती तब ?

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जिम्मेदार एडीएम का गैर-जिम्मेदाराना रवैया, पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल

नोट- पूरे मामले में वीडियो कानूनी पहलू के चलते शामिल नहीं किया है।

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