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उत्तर प्रदेश में चंद रोज पहले (27 जुलाई को) गाजियाबाद के साहिबाबाद क्षेत्र में एक सूटकेस में एक महिला की लाश मिलने से हड़कंप मच गया। वारदात के 15 घंटे बाद गाजियाबाद पुलिस ने पूरे मामले को सुलझाने का दावा किया, बताया कि वह लाश 22 जुलाई को गुमसुदा हुई वरीशा की है

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जिसकी उसके परिजनों ने पहचान भी की पूरे मामले की जल्दबाजी में जांच करने के बाद पुलिस ने आनन-फानन में मामला सुलझाने का दावा करते हुए

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वरीशा का भाई लाश की शिनाख्त करने के बाद

बिना सत्यता की तह तक जाएं वरीशा के पति सास-ससुर को दहेज हत्या के झूठे मामले में लपेट कर सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।

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आज जब बुलंदशहर से गायब वरीशा जिंदा अलीगढ़ से सही सलामत बरामद हो गई तब पुलिस की लापरवाही की पोल खुली अब सवाल यह उठता है।

अगर वरीशा जिंदा है तो सूटकेस में जो लाश मिली थी वह किसकी है और उसके कातिल कौन है ?जिस महिला की सूटकेस लाश मिली उसके न्याय का क्या होगा?

बता दें जिस लड़की का सूटकेस में शव मिला था उसे परिजनों ने अपनी बेटी बताते हुए दफन भी कर दिया।पूरे मामले में एक के बाद एक पुलिस की सफाई और पुरानी थ्योरी पर नजर डालते हुए गौर से पूरे मामले को उनके मुख से ही सुने आप बाकायदा सुन सकते हैं

मृतक का भाई कह रहा है कि सूटकेस में जो लाश मिली वह मेरी बहन की परिजनों ने भी शिनाख्त की सवाल तो यह उठता है क्या अपनी बेटी की पहचान में परिजनों से चूक हो सकती है या फिर जानबूझकर परिजनों ने अपनी बेटी के ना मिलने पर लावारिस सूटकेस में मिली लाश को अपनी बेटी मानकर दाह संस्कार कर दिया।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है अगर बरिस्ता जिंदा है तो सूटकेस में जिस महिला की लाश मिली है वह कौन है कहां की है उसकी हत्या क्यों की गई और किसने की पुलिस के लिए चुनौती है कि जल्द से जल्द इस मामले में तेजी लाकर पूरे मामले की गहराई से छानबीन कर खुलासा करने की जरूरत है बहरहाल तेज तर्रार पुलिस पूरे मामले में खुलासा भी कर रही होगी अब आप पूरी बात व पूरा मामला समझने के लिए बारीक से बारीक नजर डालिए आप खुद समझ जाएंगे पूरे मामले को किस आटे में समेट कर निपटाने की कोशिश की गई थी।

क्या आपने सोचा अगर पीड़िता कुछ दिन और ना मिलती तब निर्दोष पति सास ससुर का क्या होता ?

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