उत्तर प्रदेश- विगत चंद दिनों पहले गाजियाबाद के साहिबाबाद में सूटकेस में मिली महिला किसकी थी।यह रहस्य सुलझने का नाम नहीं ले रहा है। दूसरी तरफ जिस महिला की पहचान मां और भाई ने अपनी पुत्री के रूप में की वह भी जिंदा सही सलामत अलीगढ़ से वापस आ गई है,

जिस रहस्य को यूपी पुलिस सुलझा मान रही थी वह अब और उलझ चुका है। जिस महिला कि दहेज हत्या के मामले में केस दर्ज कर उसके साथ ससुर पति को जेल भेज दिया गया वह जिंदा आने के बाद उसका इस समय न्यायालय में बयान दर्ज किया जा रहा है।

दूसरी तरफ सूटकेस वाली लाश की गुत्थी 15 घंटे में सुलझाने का दावा करने वाली गाजियाबाद पुलिस की चारों तरफ सही विवेचना न करने के चलते फजीहत हो रही है। एक तरफ सोशल मीडिया से लेकर चारों तरफ लोग आलोचना करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं ।

तो दूसरी तरफ पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप शाही व अमिताभ ठाकुर जैसे लोग पुलिस केस कार्यप्रणाली की निंदा करते हुए जांच कर कार्यवाही करने की मांग कर रहे हैं।

‌ पूरे मामले में बुलंदशहर पुलिस ने बताया कि गलत शिनाख्त करने वाले भाई ल मां के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। सवाल यह उठता जल्दबाजी में विवेचना कर जिंदा को मृत करार दे निर्दोष सास ससुर पति को दहेज हत्या के मामले में जेल भेजने वाली पुलिस दोषी है ? या फिर ‌ गलत शिनाख्त करने वाले युवती के परिजन ?

या फिर दोनों कितने कितने दोषी है?

चलिए इस सवाल को आपके लिए छोड़ते हैं अब सबसे बड़ा सवाल यह है जिस युवती की लाश सूट केस में गाजियाबाद के साहिबाबाद से बरामद हुई जिसका पोस्टमार्टम होने के बाद अंतिम संस्कार भी हो गया, वह कौन थी, उसकी हत्या किसने और क्यों की ?

‌ क्या है पूरा मामला

अब आराम से समझिए कि मामला आखिर है क्या ? कुछ दिन पहले यानी कि 27 जुलाई को गाजियाबाद के साहिबाबाद में एक मृतक महिला का शव सूटकेस में बरामद होता है उसके दिल्ली में रहने वाले परिजन व भाईं उस लड़की की शिनाख्त अपनी बेटी, बहन के तौर पर करते हैं इस मामले में परिजनों की तहरीर पर पुलिस परिजनों की बात को सच मानते हुए जिंदा महिला के झूठे दहेज हत्या के मामले में युवती के निर्दोष सास ससुर पति को आरोपी बना मुकदमा दर्ज कर जेल भेज देती है और पूरा मामला सुलझाने का दावा किया जाता है । जिस लड़की को मृत्यु साबित कर उसके पति सास ससुर को दहेज हत्या के झूठे मामले में फसाकर जेल भेज दिया जाता है। वह युवती जब अलीगढ़ से जिंदा बरामद होती है इस बात की जानकारी बुलंदशहर पुलिस को होती है वह तत्काल गाजियाबाद पुलिस को जानकारी देती है।

बुलंदशहर की सीओ गाजियाबाद पुलिस को एक लेटर लिखती है कहती है जांच में सामने आया है कि जिस युवती को मृत माना जा रहा था, वह जिंदा है उसे अलीगढ़ से बुलंदशहर में लाया गया है वर्षा के परिजन व उसके भाई ने गलत पहचान की थी। यह मामला यहीं खत्म नहीं हो जाता, अब असली बात आती है गाजियाबाद में जिस महिला की लाश मिली वह किसकी थी ?
परिजनों ने गलत दूसरी लाश की पहचान अपनी बेटी के रूप में क्यों की ?

क्लिक कर विस्तार से पढ़े पूरा मामला -जिंदा महिला की दहेज हत्या के मामले में, पति सास ससुर भेजे गए जेल, खुलासे के बाद हड़कंप, सूटकेस वाली लाश ‌का कातिल कौन?

पूरे मामले में बुलंदशहर पुलिस बताती है वारिस को उसके पति व ससुराल वाले मारने पीटने के साथ प्रताड़ित करते थे। जिसकी वजह से वह बिना किसी को बताए प्लानिंग कर अपने दोस्त के साथ में पहले नोएडा भाग कर गई फिर वहां से अपने दोस्त के साथ अलीगंज चली गई। अब वारिशा के बरामद हो जाने के बाद ससुराल वालों के ऊपर आईपीसी की धारा 304 बी (२)धारा दहेज हत्या के तहत जो केस दर्ज किया गया था उसे अब हटाकर 498a घरेलू हिंसा का केस कर दिया गया है।

बता दे गाजियाबाद के साहिबाबाद क्षेत्र में जो लाश मिली थी उसके बारे में पुलिस ने मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक जानकारी दी जिसके बाद दिल्ली के परिवार ने लाश को पहचान कर अपनी पुत्री बताया गाजियाबाद पुलिस ने उनकी बात को मानते हुए बुलंदशहर में दर्ज f.i.r. का क्रास चेक किया तब पुलिस को लगा तब पुलिस को लगा कि शव की गलत पहचान की गई दूसरी तरफ वारिश के जिन्दा मिल जाने के बाद अब गाजियाबाद पुलिस के लिए यह सरदर्द बना हुआ है कि सूटकेस वाली लाश किसकी थी?

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