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त्तर प्रदेश- हैरान मत होइएगा ये कारनामा अमरोहा के आदमपुर क्षेत्र कि पुलिस का है जिसको सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे, पुलिस ने इस तरीके से तफ्तीश कर जिंदा बेटी की हत्या के मामले में बाप बेटे व एक रिश्तेदार को जेल भेज दिया। जो बीते 7 माह से पुलिस की लापरवाही की वजह से निर्दोष होने के बावजूद जेल की हवा खा रहे हैं, पुलिस ने मामले की इतनी गहनता से छानबीन की।

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कि उपरोक्त जिंदा लड़की को पुलिस रिकॉर्ड में मृत दिखाकर फर्जी मर्डर के केस में आरोप के मुताबिक आरोपी पक्ष से रिश्वत ले, पीड़ित द्वारा जेम ना गर्म करने की वजह से फर्जी केस में फंसा कर जेल में डाल दिया। अब कुछ समय बाद वह लड़की अपने प्रेमी के साथ दिखने के बाद घरवालों ने पूरे मामले की जानकारी थाने को दी। मीडिया में खबर आने के बाद जिंदा युवती को मृत दिखाने के मामले में आदमपुर एसएचओ अशोक कुमार को निलंबित कर किया गया है।

क्या है पूरा मामला

अमरोहा के आदमपुर क्षेत्र के मलकापुर गांव निवासी सुरेश की नाबालिग बेटी 20 मई 2019 को प्रेम प्रसंग के बाद अपने प्रेमी के साथ दिल्ली चली गई। लड़की के भाई रूप किशोर ने होराम, हरराम, हेमावती, जगपाल और सुरेश के खिलाफ अपहरण हत्या के मामले में केस दर्ज करवाया। जब नाबालिग लड़की का कुछ समय तक सुराग नहीं निकला।

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पुलिस ने नाबालिग को पुलिस रिकॉर्ड में मृत्यु दिखाकर 28 दिसंबर 2019 को पिता सुरेश भाई रूपकिशोर और देवेंद्र निवासी धनौर को नाबालिक की हत्या के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। तभी से तीनों निर्दोष जेल में बंद है। पुलिस ने फर्जी तरीके से केस निपटारा करते हुए दावा किया कि हत्या में प्रयुक्त तमंचा और लड़की के कपड़े बरामद किए गए हैं। जिसके बाद पुलिस रिकॉर्ड में लड़की को मृत दिखा कर पुलिस ने फर्जी केस का निपटारा करते हुए 3 निर्दोषों को जेल भेज देती है तब से 7 माह बीत गए हैं तीनों निर्दोष जेल में है।

कैसे खुला भेद

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दूसरी तरफ लॉकडाउन लगने के बाद दोनों प्रेमी प्रेमिका दिल्ली से वापस अपने (प्रेमी के) गांव पौरारा लौट आए। दूसरे दिन नाबालिक के भाई राहुल जो कि किसी काम से उस गांव में गया हुआ था। उसने नाबालिक बहन को देख लिया जिसके बाद पूरी जानकारी देखते ही देखते परिजनों तक पहुंच गई। प्रकरण का खुलासा होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया एसपी व सीओ धनौरा ने आनन-फानन में नाबालिग किशोरी से पूछताछ की।

ग्रामीणों ने बताया कि पूरे मामले में पीड़ित पिता से लेकर भाइयों तक कि गांव समाज में चारों तरफ निंदा के साथ बदनामी के साथ झूठे मामले में जेल भेज दिया गया। अब जब वह सभी निर्दोष निकले तो दोषियों के खिलाफ निर्दोष को सही तफ्तीश करने के बजाए जेल भेज दिया। इस मामले में गलत रिपोर्ट लगाने वालों पर आखिर क्या कार्यवाही होगी ?

यह कोई पहला मामला नहीं है जब पुलिस की ऐसी भीषण लापरवाही की वजह से निर्दोष जेल गए हैं बहुत से ऐसे निर्दोष होंगे जो पुलिस किसी कार्यशैली का शिकार होकर निर्दोष होने के बावजूद आज जेल काट रहेंगे होंगें, इस मामले में प्रशासन द्वारा दोषियों को बर्खास्त कर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि एक संदेश जाए किसी निर्दोष को फर्जी केस में फंसा कर जेल भेजने वाले इससे सबक लें।

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