उत्तर प्रदेश के बहराइच में उत्तर प्रदेश पुलिस के दरोगा का एक कलंकित करने वाला अजीब कारनामा सामने आया है वीडियो में बखूबी देखकर समझ सकते हैं बता दे वर्दी के नशे में चूर यह बहराइच के रिसिया थाने में तैनात दरोगा है जो वर्दी के नशे में चूर हो अपनी मनमानी करते हुए नजर आ रहे हैं। इनके कारनामे को सुनकर आप बखूबी चौक जाएंगे उससे पहले आपको वीडियो देखना जरूरी है आप वीडियो को देखकर पूरा मामला बखूबी समझ सकते हैं।

बहराइच रिसिया थाने के दरोगा का कारनामा

उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली हमेशा सुर्खियों में रही है कभी अच्छे कामों के लिए तो कभी लाइन से हटकर कारनामों के लिए ऐसा ही। एक कारनामा बहराइच जिले से आया है यहां चालान काटने का अजीब मामला दिखा। चालान संख्या बढ़ाने के लिए उप-निरीक्षक ने बाकायदा बाइक पर हेलमेट लगाकर जा रहे युवक को रोका उसके बाद महामारी के दौर में जब लोग एक-एक रुपए के लिए मोहताज है। उस दौर में कानून को ताक पर रखकर दरोगा ने फर्जी चालान काटने का नया तरीका निकाल लिया वीडियो में देखा जा सकता है कि पहले बाइक पर बाकायदा हेलमेट लगाए शख्स को दरोगा जबरन बाइक से नीचे उतारते हैं उसके बाद उसकी बाइक पर बिना हेलमेट लगाये युवक को बैठा देते हैं उसके बाद शुरू करते हैं फोटो सेशन का कार्यक्रम यानी फर्जी तरीके से युवक की बाइक का ढाई हजार रुपए का चालान काट दिया जाता है, जानकारी मिली है कि ऐसे ही और कई कारनामे हैं जो कैमरे में कैद ना होने की वजह से छिपे हैं।

कैसे खुला मामला

पूरा मामला बहराइच जिले के रिसिया थाना क्षेत्र का है जहां एक बाइक पर हेलमेट लगाकर युवक जा रहा था उसे जबरन दरोगा ने रोककर बाइक से उतारा और बिना हेलमेट वाले शख्स को बैठाकर फोटो खींची जिसके बाद उसका फर्जी चालान किया जिसका वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस का यह कारनामा सामने आया है।

जवाब में बहराइच पुलिस ने बताया कि पूरे मामले में उ0नि0 जितेन्द्र कुमार वर्मा को लाइन हाजिर करते हुए क्षेत्राधिकारी को प्रारंभिक जांच सौंपी गई है।

बता दें ग्रामीण अंचलों में ऐसे तमाम मामले अभी भी छिपे हुए खैर पूरे मामले का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने अपनी साख बचाने के लिए फौरन आरोपी को निलंबित कर दिया है
लेकिन ऐसा हर मामले में नहीं होता। आप सोचिए अगर इस मामले का वीडियो सामने ना आता तो बेचारी जनता पहले की तरह रस्सी का सांप बनाकर इसी तरह नाइंसाफी भोगती रहती। बता दे हर विभाग में टारगेट दिया जाता है लेकिन कानून का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जरूरत है ना कि निर्दोष को दोषी बनाकर निपटाना, मेरे कहने का तात्पर्य यह कदापि नहीं कि हर दोषी निर्दोष होता है या हर पुलिस वाला एक जैसा होता है। लेकिन अधिकतर में, क्या इसी तरह रस्सी का सांप बनाया जाता है ?

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