उत्तर प्रदेश के बलिया में गुरुवार को सड़क पर उतरे एसडीएम अशोक चौधरी का कहर कारोबारियों से लेकर आम जनता पर टूटा साहब ने मास्क सोशल डिटेक्शन के नाम पर तहसील से लेकर फुटपाथ तक जनता पर जमकर उत्पात मचाते हुए कहर बनकर टूटे,

एक जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा सड़क छाप गुंडे की तरह हरकत देख लोग खौफज्यादा हो इधर से उधर भागने लगे बिल्थरा रोड तहसील के पास एसडीएम साहब ने मास्क न लगाने वालों के खिलाफ अभियान चला रखा था, लेकिन अभियान के नाम पर सरेआम गुंडागर्दी देखने को मिली इसे पद का नशा कहें या फिर गुंडागर्दी जो भी मिला साहब ने बिना पूछे ना चेतावनी दी है उस पर लाठियां भांजनी शुरू कर दी, क्या बुजुर्ग क्या बच्चे हर तरफ लाठियों के प्रहार से लोग सन्न रह गए, आप एक प्रशासनिक जिम्मेदार अधिकारी की वर्दी व पुलिस की वर्दी को हटाकर देखिए आम गुंडों और इन में क्या फर्क नजर आता है ?

बता दे बलिया के बिल्थरा रोड एसडीएम अशोक चौधरी ने अचानक मास्क व सोशल डिटेक्शन का अभियान चलाकर कचहरी से लेकर सड़क बाजारों तक में घुस-घुस कर आंदोलन के चलाते हुए सड़क छाप गुंडे की कार्यशैली में चारों तरफ अपने साथ होमगार्ड जवानों को लेकर इस कदर लाठियों से कहर बरसाया की नगर वासियों से लेकर क्षेत्रवासी खौफज्यादा हो गए, एसडीएम के इस कारनामे के बाद व्यापारियों से लेकर आम जनता में रोष है जब एसडीएम की कारस्तानी ऊपर पहुंची आनन-फानन में सीएम ने तत्काल एसडीएम को पद से निलंबित कर राजस्व विभाग में ट्रांसफर कर दिया|आप एसडीएम साहब कि इस कारस्तानी का वीडियो देखिए अनुमान लगाइए अगर यह कारस्तानी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के बजाय कोई आम व्यक्ति करता तो उसके साथ किन किन धाराओं में क्या कार्यवाही होती ?लेकिन एक संवैधानिक पद पर बैठे हुए जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा बदसलूकी गुंडई करने पर उनके खिलाफ क्यों बिना कार्रवाई के एसडीएम के उठाकर राजस्व विभाग में ट्रांसफर कर दिया ?

क्या एक आम आदमी ऐसी हरकत करता तो उसे काम से छुट्टी देकर माफ कर दिया जाता ? फिर हाल ऊपर बैठे अधिकारियों को जो अच्छा लगा उन्होंने वही किया लेकिन इस बात को लेकर भी जनता में रोष देखने को मिल रहा है ?जनता पूछ रही है अगर इसी तरह हरकत करने वाला अगर एसडीएम या जिम्मेदार अधिकारी ना होते तब उन पर क्या कार्यवाही होती ?सड़क छाप गुंडागर्दी के बाद केवल निलंबन, केस दर्ज कर कार्यवाही क्यों नहीं ?लोकतांत्रिक शासन में नौकरशाहों की गुंडागर्दी पर केस क्यों नहीं दर्ज किया गया ?क्या जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों की गुंडागर्दी कानून से बाहर है ?संविधान एक तो ऐसे लोगों का आम जनता के बीच इतना भेदभाव आखिर क्यों ?

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