बलिया में निजी चैनल के पत्रकार रतन सिंह की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। जान बचाने के लिए पत्रकार रतन सिंह प्रधान के घर में घुसे लेकिन बदमाशों ने घर में घुसकर 3 गोली मारकर उनकी हत्या कर दी, इलाके में इस घटना के बाद से हड़कंप मच गया। आला अधिकारीयों से लेकर ग्रामीणों का तांता लग गया। पीड़ित परिवार ने बदमाशों द्वारा हत्या की बात कही। लेकिन पुलिस आपसी विवाद में हत्या की की बात कह रही।

उत्तर प्रदेश बेखौफ अपराधियों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है बेखौफ बदमाशों ने बलिया के फेफाना थाने से चंद कदमों की दूरी पर सहारा न्यूज़ चैनल के पत्रकार रतन सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। सोमवार शाम हुए इस हत्याकांड से इलाके में हड़कंप मच गया घटना की जानकारी मिलते ही घटना के मोबाइलों के लिए आला अधिकारी पहुंचे बलिया के एसपी देवेंद्र नाथ ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए इस घटना के बारे में कहा कि झगड़े के दौरान पाटीदारों ने पत्रकार रतन सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी पुलिस पूरी कार्रवाई में जुटी है पुलिस को आशंका है कि संपत्ति विवाद में घटना को अंजाम दिया गया है। पुलिस से लेकर आला अधिकारी तक इसी बात को दोहराते रहे उधर पीड़ित के पिता ने आपसी झगड़े की बात से साफ इंकार किया है नीचे आप पीडि़त पिता ने पुलिस के इन आरोपों पर क्या कहा आप सुनकर पूरा मामला समझने की कोशिश करिएगा।

पीड़ित के पिता ने स्थानीय थाना अध्यक्ष शशि मौली पर गंभीर आरोप लगाते हुए और अधिकारियों को झूठी रिपोर्ट देकर मामला रफा-दफा करने का आरोप लगाया है पीड़ित के पिता ने बताया कि पत्रकार को धोखे से बुला ले जाकर उसकी निर्मम हत्या की गई घटना पर मौजूद थे या घटना थाने से महज 20 कदम की दूरी यानी कि थाने के सामने घटित हुई है। जब थाने के सामने एक पत्रकार सुरक्षित नहीं ?
थाने से 20 कदम की दूरी पर लगातार बदमाश जो पुलिस की बात कर रही है की लाठी डंडे से पीटने के बाद गोली मारकर पत्रकार की हत्या की गई। वह अपनी जान बचाने के लिए प्रधान के घर में भी गुस्से, क्या इतनी देर में फेफना थाने की पुलिस को मामला पता ही नहीं चला ?

पूरी घटना होने के बाद ही पुलिस क्यों पहुंची, मृतक पत्रकार के पिता के मुताबिक थानाध्यक्ष मौजूद थे ?निजी चैनल के 42 वर्षीय पत्रकार रतन सिंह की सोमवार देर शाम फेफना गांव के प्रधान के घर के पास गोली मारकर हत्या कर देने के मामले में प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया, इस हत्याकांड से उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं आखिर क्यों प्रदेश में बदमाश इतने बेखौफ हो गए हैं ?

पत्रकार की हत्या के बाद जिले में हड़कंप मच गया। इस निर्मम हत्या के बाद ग्रामीणों ने परिजनों के साथ नेशनल हाईवे 31 पर इंसाफ के लिए धरना शुरू कर दिया। पूरे मामले में बलिया के एसपी देवेंद्र नाथ में थाना फेफना के थानाध्यक्ष शशिमौली पांडे को निलंबित कर दिया है।

पूरे घटनाक्रम का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है।पूरे मामले पर एसपी देवेंद्र नाथ ने बताया पाटीदारों से लंबे समय से विवाद चल रहा था थाना फेफना अंतर्गत फेफना गांव में रतन कुमार सिंह की प्रधान के दरवाजे पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। दिसंबर महीने में पुआल रखने को लेकर इनके पाटीदारों के मध्य विवाद हुआ था जिस में झगड़ा हुआ उस समय मामला भी दर्ज हुआ था आज सोमवार एक लड़का रतन सिंह को बुलाकर ग्राम प्रधान के घर के पास ले गया।

वह अरविंद सिंह व दिनेश सिंह के परिजन और सहयोगियों ने पहले डंडे से फिर गोली मारकर हत्या कर दी बता देते स्पीडी जनार्दन और दिनेश सिंह की बात कर रहे हैं वह रतन सिंह के पाटीदार एसपी के मुताबिक इस मामले में 3 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है पूछताछ की जा रही है उनके मुताबिक इस घटना का पत्रकारिता से कोई लेना देना नहीं है यह एक व्यक्तिगत दुश्मनी का मामला है। बता दें कि थाने से 20 कदम की दूरी पर आरोपियों ने घर में घुस के रतन सिंह के सिर में गोली मारी और घटनास्थल से भाग गये। मौके पर ही पत्रकार की मौत हो गई।

इस घटना के बाद पत्रकारों से लेकर राजनीतिक पार्टियों ने पत्रकार की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है। एक के बाद एक पत्रकारों की हत्याओं के बाद उत्तर प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कोई प्रावधान तक नहीं किया गया है दिन-रात कानून व्यवस्था सुधारने के लिए पत्रकार लगे रहते लेकिन अंत में उन्हें मिलता क्या है या तो झूठा केस या फिर बदमाशों की गोलियां उसके बाद भी केस को रफा-दफा करने की उच्च अधिकारियों की कोशिश, खैर इस मामले में क्या अन्य पत्रकारों की तरह न्याय हो पाता है ?

पूरे मामले में पुलिस का एंगल-

इस मामले में राजनीतिक हलकों की प्रतिक्रियाओं पर एक नजर-

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