बाराबंकी- रविवार रात टोटका करने को लेकर दो पक्षों में विवाद के बाद देखते ही देखते मारपीट के बाद माहौल खूनी संघर्ष में बदल गया| इस वारदात में एक 28 वर्षीय घायल शिवराज की सोमवार सुबह मौत हो गयी| जबकि उसकी मां जानकी देवी को घायल अवस्था में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सतरिख में भर्ती कराया गया है| घटना की जानकारी के बाद सतरिख पुलिस ने बरकतही गांव पहुंचकर तनाव को देखते हुए पुलिस की एक टीम तैनात कर मृतक के पिता की तहरीर पर जांच शुरू की है |

क्या है मामला

बता दें बाराबंकी के सतरिख थाना क्षेत्र स्थित बरकातही गांव निवासी जगमोहन के पुत्र शिवराज 32 वर्ष जो कि शराब का आदी है कि कुछ समय से तबीयत खराब चल रही थी| जिसके इलाज के लिए परिजन उसे (इधर से लेकर उधर तक) तमाम डॉक्टरों को दिखाया लेकिन उससे कोई आराम ना मिला| जिसके बाद किसी की सलाह पर उन्होंने एक तांत्रिक को दिखाया| जिसने मृतक की मां जानकी देवी को टोटका करने का सुझाव दिया ताकि उनका बेटा ठीक हो जाए| उसी को लेकर रविवार रात गांव के पडोसी बबलू के घर के बाहर रास्ते पर शिवराज व उनकी मां टोटका कर रहे थे| जिसको देख कर बबलू और महेश ने देखकर टोटके का विरोध किया| जिसके बाद कहासुनी शुरू हो गई| जो देखते ही देखते टोटका करने ना करने को लेकर शिवराज और बबलू के पक्ष के बीच मारपीट शुरू हो गयी| जिसमें शिवराज व मां जानकी देवी घायल हो गई| लेकिन शिवराज की चोट अंदरूनी थी जबकि जानकी की चोट दिख रही थी| जिसको लेकर परिजनों ने शिवराज की मां जानकी देवी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सतरिख ले जाकर भर्ती कराया|

जबकि शिवराज की आंतरिक चोट जो कि जाहिर नहीं हो रही थी की वजह से शिवराज को भर्ती नहीं कराया गया| सोमवार सुबह शिवराज की मौत हो गई| मृतक के पिता ने मारपीट करने वाले बबलू और महेश के खिलाफ थाने में एफ आई आर दर्ज कराई जिसके बाद गांव पहुंची पुलिस ने तनाव को देखते हुए टीम तैनात कर जांच शुरू की| पुलिस के मुताबिक पूरे मामले में शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज कर कार्रवाई की जा रही है| पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पता चलेगा कि शिवराज की मौत की वजह क्या है|

देश पहुंच गया चांद पर, अभी भी लोग टोटके पर करते हैं यकीन

21वीं सदी में बेशक देश चांद पर पहुंच गया हो, लेकिन पढ़ से पढ़े लिखो से लेकर डॉक्टर तक परेशानी में अंधविश्वास ये टोटके के चक्कर में पड़ ही जाते हैं कभी-कभी इन टोटकों के चक्कर में दो पक्षों में विवाद हो मनमुटाव बन कभी मनमुटाव खूनी संघर्ष में बदल जाता है|

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