केंद्र सरकार द्वारा आर्युवेद को बढ़ावा देने की ओर एक शक्तिशाली कदम

केंद्र सरकार ने आयुर्वेद के डॉक्टरों को बड़ी सौगात दी है। अब आयुर्वेद के डॉक्टर भी जनरल व ऑर्थोपेडिक सर्जरी के तरह आंख कान व गले की सर्जरी कर सकेंगे। इसके लिए भारत सरकार ने हरी झंडी दे दी है। बता दे कि भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद की ओर से जारी की गई। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि पीजी के विद्यार्थियों को अब सर्जरी के बारे में जानकारी दी जाएगी (यानी कि आयुर्वेद के छात्रों को अब सर्जरी के बारे में भी शिक्षा दी जाएगी) इस बारे में सर्जरी करने को लेकर अधिकार का सरकार द्वारा स्पष्टीकरण नहीं किया गया है फिरहाल सरकार की नोटिफिकेशन के मुताबिक आयुर्वेद के पीजी के छात्र आंख कान नाक व गले की सर्जरी के साथ ही जनरल सर्जरी कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षित किया। प्रशासन द्वारा आयुर्वेद के छात्रों को अल्सर मूत्रनली के रोगों व पेट संबंधित तत्व की निकासी ग्लूकोमा, मोतियाबिंद हटाने समेत कई प्रमुख सर्जरी के प्रशिक्षण देने के बाद विशेष अधिकार दिए जाने की बात की गई है। केंद्र सरकार के आयुर्वेद के सलाहकार व प्रमुख डॉक्टर इसे चिकित्सा क्षेत्र में मील का पत्थर मान रहे हैं। उनके मुताबिक सरकार के इस कदम से देश के अंदर कुल सर्जन की कमी को पूरा किया जा सकेगा। साथ ही देश के ग्रामीण इलाकों के मरीजों को भी उच्च स्तर का इलाज मिलने की संभावना है। वहीं पूरे मामले पर दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ अनिल बंसल इस मामले में अंदेशा जता रहे हैं कि इससे झोलाछाप डॉक्टरों को बढ़ावा मिलेगा। जिसकी वजह से मरीजों के लिए संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। वहीं पूरे मामले पर कुछ प्रमुख डॉक्टरों के मुताबिक अब समय आ गया है कि आयुर्वेद (deshi) को बढ़ावा देने के साथ ही आयुर्वेद के विद्यार्थियों को प्रसव, गर्भपात व गर्भाशय की सर्जरी का भी अधिकार दिये जाने चाहिए।

भारत में आदिकाल से आर्युवेद का वर्चस्व रहा है दुनिया की कठिन से कठिन लाइलाज बीमारियों का भी इलाज आयुर्वेदिक तरीके से जड़ से करने में कामयाबी मिली है। वहीं कुछ डॉक्टरों के मुताबिक आयुर्वेदिक सुरक्षित तरीका है इसमें कम से कम साइड इफेक्ट के साथ बेहतर से बेहतर कम कीमत में इलाज हो सकता है बीमारियों को खत्म करने में थोड़ा ज्यादा वक्त बेशक आयुर्वेद में लगता हो, लेकिन बीमारियां को आयुर्वेद जड़ से खत्म करने में सफल रहा है।

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