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भारत में बढ़ती बिजली की मांग पूरी करने में कोयला अथॉरिटी यानी कोल इंडिया थर्मल पावर प्लांट को कोयला उपलब्ध कराने में असमर्थ हो रही हैं पिछले 2 महीने से कई राज्यों में बिजली आपूर्ति करने वाले प्लांट कोयले की भीषण कमी से जूझ रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा कम कोयला भंडार करने वाले थर्मल प्लांट को कोयला पूर्ति करने में प्राथमिकता देने की बात की है। कोयला आपूर्ति समय से ना हो पाने के चलते कई थर्मल पावर प्लांट पूरी तरीके से बंद हो गए हैं। कई पावर प्लांटों के पूरी तरीके से बंद होने की आशंका जताई जा रही है अब केंद्र सरकार की नजर कोयला खनन कंपनी (कोल इंडिया) पर है। वही केंद्र सरकार ने बिजली बनाने वाले संयंत्रों में कोयले की नियमित आपूर्ति न किये जाने पर चिंता जताई है। एजेंसी सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के मुताबिक भारत के बन्द थर्मल पावर प्लांटों की वजह से 8817 मेगावाट बिजली आपूर्ति ठप हो गई है।

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केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने जिन 135 थर्मल पावर प्लांटो को ट्रक किया है उनमें से 26 सितंबर को 103 में 8 दिनों से भी कम का कोयला भंडार बचा था। वही अगस्त महीने में 74 थर्मल प्लांट पर कोयले का संकट मंडरा रहा था। अभी 30 सितंबर को चीन में बिजली कटौती से भारी संकट उत्पन्न हुआ था वही स्थिति भारत में भी बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए सही मात्रा में विद्युत उत्पन्न करने वाले थर्मल पावर प्लांट पर कोयला ना पहुंचने की वजह से पैदा हो रहे हैं। कई राज्यों के प्लांट कोयले की कमी से बुरी तरीके से जूझ रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून के चलते कोयला सप्लाई प्रभावित हुई है लेकिन यह बात अधिकारियों के मुताबिक सही नहीं है। अधिकारियों ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि मानसून से कोयले की आपूर्ति पर कोई बाधा नहीं उत्पन्न हुई है। मौजूद समय में कोल इंडिया को भुगतान न होने की वजह से कोल इंडिया द्वारा कोयला सप्लाई रोक दिया गया है। जिसके चलते अट्ठासी प्लांट पर बुरी तरीके से कोयला संकट उत्पन्न हो गया है इसकी वजह से बिजली का 109 गीगावॉट विद्युत उत्पादन बुरी तरीके से प्रभावित हुआ है।

वहीं केंद्रीय एजेंसी सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स के मुताबिक भारत के 72 थर्मल प्लांट जो कि 8817 मेगावाट बिजली का उत्पादन करते थे कोयला पूर्ति समय से ना होने के चलते थाप हो गए हैं अब लगातार बढ़ती बिजली के चलते पावर एक्सचेंज में 10000 मेगावाट बिजली की खरीद ₹20 प्रति यूनिट चल रही है।

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बुरी तरीके से कोयला पूर्ति बाधित होने के चलते कोयला सचिव अनिल जैन ने कंपनी के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल को 27 सितंबर को एक पत्र लिखा था। जिसमें कहा गया था कि पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक लगातार कम हो रहा है कई बार कहने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है इसी मामले को लेकर मंत्री हाई लेवल बैठक कर पावर प्लांट में कोयले की समस्या दूर करने के लिए सुझाव दिये गया है।

क्यों पैदा हुआ है विद्युत संकट

कोविड-19 की वजह से लगे प्रतिबंधों के चलते विद्युत उत्पादन बुरी तरीके से प्रभावित हुआ है जबकि इसके उलट भारत में बिजली की मांग में तेजी से बढ़ोतरी हुई है जून में जहां बिजली की मांग 200 गीगावॉट के स्तर को पार कर गई थी वही इस समय भी विद्युत आपूर्ति 190 गीगावॉट ऊपर बनी हुई है। एक तरफ कोविड-19 की दूसरी लहर अपने चरम पर थी तो दूसरी तरफ देश में विद्युत की मांग लगातार बढ़ रही थी इसी बीच उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, राजस्थान जैसे चार बड़े राज्यों की सरकारों ने कोल इंडिया को किए जाने वाले भुगतान में चूक कर दी जिसके बाद कोल इंडिया ने इन राज्यों के थर्मल प्लांटों में कोयला आपूर्ति कम कर दी जिसके चलते धीरे-धीरे इन कोयला प्लांटओं का स्ट्रा भंडार घटने लगा और कोल इंडिया से पर्याप्त मात्रा में कोयला न मिलने के चलते यानी प्लांट कोयला अपूर्ति समय से ना हो पाने के चलते थप्प पड़ गए और विद्युत संकट गहराने लगा है।

भारत में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कोयले का भंडार है फिर भी क्यों खड़ा हुआ कोयले का संकट ?

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यह हमारे देश यानी भारत की विडंबना ही है कि भारत दुनिया में कोयले का चौथा सबसे बड़ा भंडार वाला देश है। कोल इंडिया भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में कोयला खनन करने वाली सबसे बड़ी कंपनी है भारत में उत्पादित की जाने वाली बिजली का करीब 70% कोयले से ही उत्पादित की जाती है विद्युत उत्पादन में भारत के कुल कोयले का तीन/ चौथाई कोयला विद्युत उत्पादन में ही खर्च हो जाता है। भारत में इतने अधिक महत्वपूर्ण कोयले के भंडार के बावजूद भारत दुनिया में कोयले का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है।

भारत अभी भी कोयले के बजाय अन्य ऊर्जा के सोत्रों पर काम कर रहा है भविष्य में कोयले के बजाए अन्य सीधे ऊर्जा के स्रोतों पर भारत लगातार काम कर रहा है।

वही कोल इंडिया लिमिटेड कोयले का प्रोडक्शन और डिलीवरी धीरे-धीरे घाट रही है। बिजली बनाने वाली कंपनी हर दिन के कोयला की आपूर्ति पर निर्भर है मौजूदा समय में 6 पावर प्लांट पर 1 दिन के कोयले का स्टॉक है।

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