देश के नक्सल प्रभावित प्रदेश छत्तीसगढ़ के बीजापुर-सुकमा जिले के बीच बस्तर डिवीजन में एक ऑपरेशन के दौरान आधुनिक हथियारों से लैस 400 से अधिक नक्सलियों ने घात लगाकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ पर सर्च अभियान के दौरान अचानक नक्सलियों के गुटों ने हमला बोल दिया, अचानक घात लगाकर चौतरफा हुए हमले से सुरक्षाबलों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।

जानकारी के मुताबिक IG लेबल के दो अधिकारी इस ऑपरेशन को लीड कर रहे थे। इसमें कोबरा कमांडो यूनिट के साथ बस्तर के जवानों की स्पेशल सेल के साथ छत्तीसगढ़ पुलिस और आईजी रैंक के दो अधिकारी की निगरानी में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था। इसी बीच नक्सलियों ने योजना बनाकर घात लगाते हुए हमला करके अपने मृतक साथियों को तीन ट्रैक्टरों में लेकर घने जंगलों में फरार हो गए।

Credit- DD news

एंटी नक्सल ऑपरेशन से जुड़े एक सीनियर पुलिस अधिकारी के मुताबिक इस हमले को नक्सलियों के प्रतिबंधित संगठन पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी यानी PLGA बटालियन नंबर 1 के नेता और उसके सहयोगी सुजाता के द्वारा कराए जाने का पूरा अंदेशा है यह दोनों शातिर दिमाग है।

अधिकारी के मुताबिक नक्सलियों ने जानबूझकर हमले के लिए ऐसे घने जंगलों से घिरे दुर्गम इलाके का चुनाव किया। जहां पर सुरक्षाबलों के कम शिविर है।

यहां पर नक्सली काफी सक्रिय रहते हैं। जानकारी के मुताबिक नक्सलियों ने पहले जवानों को घने जंगलों के बीच आने दिया फिर हल्की मशीन गन के साथ में मोटार्र से हमला बोल तीनों तरफ से सुरक्षाबलों को घेरकर गोलीबारी कर सुरक्षाबलों को भारी क्षति पहुंचाई है। हालांकि कोबरा कमांडो ने बड़ी बहादुरी से मुकाबला करते हुए नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। जिसमें 25 से 30 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना मिल रही है। लेकिन पहले से योजना बनाकर पेड़ों की आड़ लेकर छिपे नक्सलियों ने तब तक गोलीबारी की जब तक सुरक्षाबलों की गोलियां समाप्त नहीं हो गई, जानकारी के मुताबिक शाम 5:00 बजे तक मुठभेड़ में 22 जवान शहीद हुए जिनमें डीआरजी के 14 और 8 कोबरा कमांडो शामिल है ।

सूत्रों से मिले अपडेट के मुताबिक मृतक जवानों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है जबकि 21 जवान अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

सीआरपीएफ के डीजी का दावा 25 से 30 मारे गए नक्सली, तीन ट्रैक्टरों में लेकर गए शव

सुरक्षाबलों ने दावा किया है कि इस ऑपरेशन में 25 से 30 नक्सली भी मारे गए होंगे क्योंकि नक्सली उनके शव को तीन ट्रैक्टरों में भरकर लेकर गए हैं। सीआरपीएफ के डीजी के मुताबिक इलाके में तलाशी अभियान हमले के बाद बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है।

सवाल के जवाब में सीआरपीएफ के डीजी ने बताया कि हमला इंटेलिजेंस फैलियर की वजह से कदापि नहीं हुआ है अगर ऐसा होता तो बड़ी संख्या में नक्सली नहीं मारे जाते।

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