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चीन और लोकतांत्रिक ताइवान के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव अक्टूबर 2021 की शुरुआत से गहराता ही जा रहा है। ताइवान की चेतावनी के बावजूद कई दिनों से लगातार बीजिंग के युद्धक विमानों की घुसपैठ स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश ताइवान पर लगातार बढ़ती जा रही है चीन की जमीन वाली भूख से हर कोई वाकिफ है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन नेवी बड़ा ऐलान करते हुए साफ कर दिया है कि अगर चीन ताइवान पर हमला करेगा तो चीन के खिलाफ अमेरिका ताइवान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है यानी ताइवान पर चीनी हमले की सूरत में अमेरिका उसकी रक्षा के लिए युद्ध में कूद पड़ेगा। अभी तक अमेरिका द्वारा ताइवान की रक्षा की बात की जाती थी लेकिन पहली बार राजनीतिक अस्पष्टता को खत्म करते हुए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने स्पष्ट शब्दों में ताइवान की रक्षा की प्रतिबद्धता को दोहराया है। अभी तक अमेरिका ताइवान सुरक्षा ढांचा मजबूत करने में लगा हुआ था इस दीप की रक्षा की बात अमेरिका द्वारा कभी भी नहीं की गई थी। दबे शब्दों में यह कहा जाता था कि अमेरिका ताइवान की रक्षा कर सकता था इस पर अमेरिकी नीति भी अस्पष्ट थी कभी भी खुले शब्दों में नहीं कहा जा सकता था ताइवान को प्रमुख सैन्य सहायता के अतिरिक्त अगर चीनी हमला ताइवान पर होता है तो इस दौरान अमेरिका उसको सुरक्षा की गारंटी देगा लेकिन सामरिक राजनीतिक रणनीतिक दृष्टि से पहली बार वाइट हाउस ने स्पष्ट कर दिया है कि ताइवान को लेकर अमेरिकी नीति में कोई बदलाव यानी परिवर्तन नहीं हुआ है अब तो खुले और स्पष्ट शब्दों में अमेरिका ने साफ कर दिया है कि ताइवान पर हमला होने पर अमेरिका उसकी चीनी हमले से रक्षा करेगा। बता दे हाल के दिनों में डेढ़ सौ चीनी लड़ाकू विमान ताइवान के हवाई क्षेत्रों का उल्लंघन करते हुए ताइवान दीप पर उड़ान भरी जिसके बाद लगातार ताइवान के हवाई क्षेत्रों का चीनी लड़ाकू विमान उल्लंघन करते रहे हैं।

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ताइवान की राष्ट्रपति चीन को चेतावनी दी कि अगर चीन कई दिनों तक बीजिंग के युद्धक विमानों की घुसपैठ के बाद ताइवान पर कब्जा कर लेता है तो इसके क्षेत्रीय शांति के लिए विध्वंसकारी नतीजे होंगे। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि ताइवान अपने बचाव के लिए जो भी करना पड़ेगा उसे करने से नहीं चुकेगा। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट सरकार 2016 में स्वतंत्र ताइवान के जनादेश पर चुनकर आई त्साई इंग वेन कि सरकार पर लगातार दबाव डालकर कंट्रोल में करने की कोशिश में लगा हुआ है ताइवान अपने आप को स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश मानता है जबकि चीन उसे अपना पुराना हिस्सा मानता है इसी को लेकर विवाद है 1979 के बाद अमेरिका ने चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए उसी समय से ताइवान दीप पर अमेरिकी सैनिकों का दखल भी नहीं रहा है। वैसे चीन दुनिया के भू माफिया के तौर पर जाना जाता है चीन से जिस देश की भी सीमा लगती है वह उस देश पर अवैध अतिक्रमण करके उसके हिस्से को अपना बताने की सदियों से कोशिश करता रहा है कई देशों पर इसको लेकर वह हमला कर साम दाम दंड भेद की नीति से कब्जा करता रहा 1962 में भारत पर चीन ने हमला करते हुए पंचशील के समझौते को तोड़कर हिंदी चीनी भाई-भाई के नारे के बीच भाई के सीने पर खंजर से प्रहार कर अपनी दोगली नीति का उदाहरण पेश किया था वैसे भी चीन की करनी और कथनी में जमीन आसमान का फर्क है चीन कहीं भी नजर डालता है तो उसके पीछे उसकी दूरगामी योजना होती है किसी को कर्ज के जाल में तो किसी को सैनिक दबाव अब तक अवैध रूप से शोषण करता रहा है चीन की दशकों को पुरानी नीति है|

“मैं चीन के साथ शीत युद्ध नहीं चाहता। मैं बस इतना चाहता हूं कि चीन यह समझे कि हम पीछे हटने वाले नहीं हैं, हम अपने किसी भी विचार को नहीं बदलने जा रहे हैं” अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन

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