कोरोना वायरस को लेकर चारों तरफ अंधविश्वास फैल चुका है लोग इससे बचाव के लिए दवाई यानी वैक्सीन और जांच के बजाय कोविड-19 वायरस को कोरोना माता का तमगा दे भीषण अंधविश्वास की चपेट में आने की वजह से तरह-तरह की पूजा अर्चना कर विधिवत मनाने की कोशिश कर रहे हैं।

किसी ने सही कहा है- एक पीढ़ी का पाखंड दूसरी पीढ़ी की परंपरा बन जाती हैं।-क्रेडिट सोशल मीडिया

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के जूही शुकुलपुर गांव में कोविड-19 को लेकर इस कदर लोग अंधविश्वास में आए कि उन्होंने यहां पर सामूहिक रूप से चंदा इकट्ठा कर कोरोना माता के नाम का एक मंदिर बनाकर पूजा अर्चना शुरू कर दी बता दे यहां रोज ग्रामीण इकट्ठे होकर पूरी विधि विधान से कोरोना माता की पूजा अर्चना करते हैं। चीन के वुहान शहर के सीफूड मार्केट से निकले इस अदृश्य खूनी वायरस ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा कर लाखों लोगों की जिंदगी छीन ली करोड़ों लोग इसकी चपेट में आकर इस के खौफ से 2-4 हो चुके हैं भारत के अलग-अलग शहरों में अलग-अलग तरह के अंधविश्वास फैल चुके हैं जिन पर विश्वास कर लोग पूजा अर्चना के जरिए इसके काबू में आने की अंधविश्वास भरी बातें कर रहे हैं मध्यप्रदेश में परी के हाथ का पानी पीने को लेकर अंधविश्वास फैला जबकि वह दोनों माताएं थी उन्होंने झूठ बोल कर खुद को परी बताया था इसी तरह का दूसरा मामला जो कि दुनिया के एकमात्र मामला है यह लोगों ने को कोरोना को माता मानकर पूजा अर्चना शुरू कर दी है आप इस वीडियो को देखकर पूरा मामला समझ सकते हैं।

कोरोना (वायरस) माता की पूजा अर्चना करते लोग, आस्था या अंधविश्वास- क्रेडिट सोशल मीडिया

क्या है कोरोनावायरस

नवंबर 2019 में चीन के बुहान शहर की सी फ्रूट मार्केट से निकले इस चीनी वायरस को अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों ने लैब में बने होने की कई रिपोर्टों में बात की है फिलहाल इसकी जांच अभी जारी है इसलिए इस मुद्दे पर कुछ ज्यादा कहने की जरूरत नहीं। लेकिन एक बात साफ है यह अदृश्य खूनी वायरस चीन के वुहान शहर में सर्वप्रथम पाया गया वहां से यह दुनिया के अन्य शहरों में फैला इस वायरस ने समय-समय पर अपना रूप बदल कर वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया। फिरहाल अलग-अलग देशों के वैज्ञानिकों ने अलग-अलग वैक्सीन की खोज कर इस वायरस को एक सीमा तक काबू में कर लिया है ।

पूजा-पाठ आस्था का विषय हो सकता है, लेकिन इससे कोरोना नहीं आएगा यह अंधविश्वास है

पूजा पाठ आस्था का विषय हो सकता है लेकिन यह कोविड-19 का वायरस कोई देवी देवता नहीं है यह एकमात्र अंधविश्वास है दुनिया में लाशों के ढेर लगाने वाले इस वायरस से बचाव का एकमात्र तरीका कोविड-19 प्रोटोकॉल मास्क सैनिटाइजर और वैक्सीन है ना कि इस वायरस को अंधविश्वास के चक्कर में देवी मान कर पूजा करने से कोई कल्याण होने वाला है। हर आस्तिक व्यक्ति जिस देवी-देवता में आस्था रखता है उसके अपने हिसाब से जब चाहे तब पूजा कर सकता है। लेकिन इस वायरस को देवी देवता मानकर पूजा करना एक मात्रा अंधविश्वास है इससे बढ़कर कुछ और नहीं है कोई परी के हाथ का पानी कोई मंदिरों में जाकर एक साथ समूह में दुरदुरिया चबाना जिससे कोरोना माता खुश हो जाएंगी और वह कोविड-19 से संक्रमित नहीं होंगे, यह एकमात्र अंधविश्वास से बढ़कर और कुछ नहीं है सरकार को भी इस विषय में लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाने की जरूरत है ताकि लोग जागरूक होकर वैक्सीन जांच और दवाई के साथ कोविड-19 के नियमों का कड़ाई से पालन कर इस वायरस से बच सकें।

हर क्षेत्र में फैले हैं अंधविश्वास

इस अदृश्य खूनी वायरस यानी कोविड-19 को लेकर समाज में तरह-तरह के अंधविश्वासों ने डेरा जमा लिया है भारत के अलग-अलग शहरों में कहीं परी के हाथ का पानी तो कहीं मंदिरों में दुरदुरिया चबाने से कोरोना माता खुश हो जाएंगी और कोरोना का प्रकोप नहीं होगा जैसी अनेक अंधविश्वसों के साथ अफवाहें अपने चरम पर है। अब कोविड-19 से बचाव के लिए गांव की महिलाएं आसपास के मंदिर में पहुंचकर दुरदुरिया इसलिए चला रही हैं कि करो ना मैं तो खुश हो जाएंगे और उनका परिवार बच जाएगा इस बीच भीड़ में कोविड-19 के सभी प्रोटोकोल धरे रह जा रहे हैं जिसकी वजह से कोविड-19 का खतरा और भीषण हो सकता है अभी पहली लहर के बाद दूसरी लहर में थोड़ा खतरा बढ़ा लेकिन तीसरे लहर में अगर यही आलम रहा स्थिति बद से बदतर हो सकती है।

1 महीने से अधिक समय तक (ऑक्सीजन लेवल60) भीषण कोविड-19 की चपेट में रहे, विशाल गुप्ता की रिपोर्ट

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