राजधानी- लगातार दिल्ली की सीमाओं पर शीत लहर के बीच लगातार 25 दिनों से आंदोलनकारी किसान सिंधु बॉर्डर समेत राजधानी के अधिकतर बॉर्डर पर कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं अभी तक सरकार व किसानों के संगठनों के बीच सभी बातचीत बेनतीजा रही है इस बीच आंदोलन में शहीद हुए किसानों को आज किसान संगठनों द्वारा पंजाब व दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई, सरकार व किसानों के बीच सभी प्रकार की बातचीत बेनतीजा होने के बाद लगातार आंदोलनकारियों का आंदोलन जारी है किसानों का कहना है बिना कृषि कानून वापस कराए वह जाने वाले नहीं है सरकार उनके सब्र का इम्तिहान ना ले जल्द से जल्द कानूनों को वापस कराएं।

दूसरी तरफ राजधानी दिल्ली के रकाबगंज स्थित गुरुद्वारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिना किसी वीआईपी बंदोबस्त के सिखों के 9वें गुरु तेज बहादुर सिंह के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने गुरुद्वारा रकाबगंज पहुंचे। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहुंचने के किसी को कानों कान खबर तक नहीं लगी।

”Punjabi Translation”

“बेशक तुम कहते हो तुम सेवा करते हो, संगत करते हो लेकिन अगर तुम्हारी सोच में तब्दीली नहीं आई, और भले ही तुमने कितने भी धर्म ग्रंथ पढ़ लिए, लेकिन धर्म ग्रंथ के उपदेश को अगर तुमने नहीं समझा, और मानवता की भलाई नहीं की, तो जब धर्मराज आएंगे तो बता तू कहां भागेगा?”

बिना बीआईपी बंदोबस्त प्रधानमंत्री पहुंचे, गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब सिखों के नौवें गुरु गुरु तेज बहादुर सिंह के सर्वोच्च बलिदान पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रकाबगंज गुरुद्वारा अचानक पहुंचकर सबको चौंकाया, इस बीच किसी भी प्रकार की वीवीआईपी बंदोबस्त देखने को नहीं मिले, वह आम लोगों की तरह गुरुद्वारा दर्शन करने के लिए गए। पुलिस व्यवस्था व ट्रैफिक बैरिकेड तक नहीं लगाए गए थे, अधिकतर लोग अनजान थे, क्योंकि किसी भी प्रकार की यातायात मैनेज करने की व्यवस्था नहीं की गई थी, आम व्यक्ति की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरु तेज बहादुर सिंह के सर्वोच्च बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके तीर्थ स्थल को माथा टेक सत्यवाणी भी सुनी, बता दे गुरुद्वारा रकाब गंज में सिखों के 9वें गुरु तेज बहादुर सिंह के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया था। इसलिए इसे सिखों के अहम तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है इस बीच जब केंद्र सरकार और पंजाब समेत देश के किसानों के बीच सीधे आंदोलन का टकराव बढ़ी हुई है। इसी बीच सिखों के पवित्र स्थल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माथा टेकने के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।

एक तरफ हरियाणा पंजाब के किसान आंदोलन की बागडोर हाथ में लिए चारों तरफ से दिल्ली को घेर कर आंदोलन कर रहे हैं उनके आंदोलन का आज 25 वां दिन है इसी मौके पर उन्होंने अब तक आंदोलन में शहीद करीब २९ किसानों को पंजाब व दिल्ली के कई स्थानों पर श्रद्धांजलि सभा अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित कर अपने आंदोलन को और तेज करने की बात कही है। किसानों ने एक-सुर में कहा है कि जब तक नए कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया जाता। वो पीछे हटेंगे नहीं, केंद्र सरकार व किसानों के बीच कि सभी बातचीत बेनतीजा रही है अनुमान लगाया जा रहा है कि 2020 में ही किसानों व सरकार के बीच बातचीत सफल हो पूरे मामले का शांतिपूर्ण हल निकले?

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