राजधानी दिल्ली की कई सीमाओ समेत हरियाणा से लगी सीमा पर किसानों का आंदोलन लगातार जारी है केंद्र सरकार के साथ किसान संगठनों की बैठक आज सातवीं बार बेनतीजा खत्म हो गई| किसान संगठन लगातार सरकार से तीनों कृषि कानून को वापस लेने कि मांग करते हुए अपने रुख पर अडे रहे|अब अगले दौर की बातचीत 8 जनवरी दोपहर 2 बजे होगी।

दिल्ली से सटी सीमाओं पर लाखों किसान लगातार विपरीत परिस्थितियों में भी डटे हुए हैं इस बीच शीत लहर का प्रकोप जारी है दूसरी तरफ वर्षा में भीगने के बावजूद किसानों के इरादे टस से मस नहीं हुए हैं लगातार देश भर से मिल रहे जनसमर्थन से किसान संगठनों के हौसले बुलंद हैं दूसरी तरफ बीजेपी शासित हरियाणा सरकार द्वारा कई जगह पर आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज के साथ आंसू गैस के गोले छोड़ कर चित्रर बितर करने की कोशिश की गयी हैं| सरकार की बेरुखी के साथ मौसम के प्रचंड प्रहार की वजह से अब तक 52 से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है इनमें उन किसानों की भी मौतें शामिल है जिन्होंने कृषि बिल का विरोध करते हुए आत्महत्या कर ली है लगातार प्रशासन के अड़ियल रुख अपनाने की वजह से इन मौतों का आखिर कौन जिम्मेदार है ?

लगातार आंदोलन किसान सरकार की तीनों कृषि कानूनों का विरोध करते हुए इसे किसान विरोधी बता रहे हैं दूसरी तरफ प्रशासन इन्हें किसान के लिए हितकारी बताकर किसानों पर इसे जबरन थोपने की कोशिश कर रही है इसी वजह से अब तक 7 वार्ताएं असफल हो चुकी है| प्रधानमंत्री साफ कर चुके हैं कि उनकी नियति गंगा की तरह साफ है लेकिन उन्होंने भी किसानों की मांगों पर भी ध्यान नहीं दिया है|किसान लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं कि मार्केट में कोई भी खरीददारी एमएसपी से नीचे ना हो, अगर की जाए तो उसे कानूनी अपराध घोषित किया जाए ताकि बड़ी-बड़ी कंपनियां किसानों के सामान को औने पौने दामों पर बेचने को मजबूर कर ना खरीद सके/किसान लगातार ठेके की खेती यानी कि कांट्रैक्ट फार्मिंग पर अपने कटु अनुभव को बयान कर इसमें अपने साथ छल कपट धोखा होने ठेके की खेती यानी कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पर अपने कटु आनुभाव बयान कर इसमें अपने साथ छल कपट धोखा होने की बात कर रहे हैं देश के कई हिस्सों में कई फार्मो द्वारा किसान संगठन से कांटेक्ट करने के बाद उन्हें छला गया यानी कि उनके फसलो के पैसे को लेकर वह फार्म भाग गई !

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बैठक के बाद बताया की “भारत सरकार के 2 नए कानूनों व एक संशोधन पर चर्चा हुई। हम क्लॉज के अनुसार चर्चा चाहते थे, इसपर बातचीत चलती रही। थोड़ी बहुत एमएसपी पर भी बात हुई। आज किसी भी निर्णय पर हम नहीं पहुंच सके हैं। इसलिए 8 जनवरी को फिर से बातचीत होगी|किसान आंदोलन को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी जारी है|

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