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हमारी जीवनशैली और खानपान की आदतों में लंबे समय तक परिवर्तन यानी अनियमितता गड़बड़ी होने के चलते हमारे शरीर की आंतरिक प्रणाली का (हारमोंस) सिस्टम गड़बड़ा जाता है इस बीच हमारे शरीर में पैंक्रियाज यानी अग्नशय इंसुलिन हारमोंस का उत्पादन करना धीरे-धीरे बंद कर देता है इंसुलिन के उत्पादन बंद होने से ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने लगती है इसी बढ़ी हुई मात्रा को जब शरीर ज्यादा समय तक कंट्रोल नहीं कर पाता है तो हमारा शरीर यानी हम शुगर के मरीज बन जाते हैं।

दुनिया भर के लगभग 42 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित है इनमें से अधिकतर पीड़ित लोगों को समय से इस बीमारी से ग्रस्त होने की जानकारी तक नहीं हो पाती। सही समय पर जानकारी ना होने से लोग इसे मैनेज नहीं कर पाते। उनके ब्लड में शुगर लेवल बढ़ते ही हमारा शरीर बुरी तरह प्रभावित होने लगता हैं डायबिटीज से प्रभावित शरीर कुछ प्रथमिक संकेत देना शुरू करता है। (जिसकी बात नीचे विधिवत की जाएगी) सामान्यता शुगर की बीमारी 2 तरीके की होती है पहले टाइप को टाइप -1 और दूसरे टाइप को डायबिटीज टाइप-2 कहा जाता है। शरीर में अधिक शुगर लेवल बढ़ने से शरीर खोखला होकर दूसरी बीमारियों का घर बन जाता है यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। समय पर परहेज और इसके इलाज से मरीज सामान्य जिंदगी जी सकता है।

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नीचे- शुगर संबंधी इलाज बचाओ लक्षण प्रकार दवाओं समेत संपूर्ण जानकारी आपके द्वारा पूछे जाने वाले संभावित प्रश्नों के उत्तर दिए जाने की कोशिश की जा रही है।

क्या होती है डायबिटीज यानी शुगर की बीमारी ?

डायबिटीज मेलेटस यानी जिसे हम सामान्यता मधुमेह कहते हैं। यहां पचय संबंधी बीमारियों का एक समूह है बिगड़े खानपान के माहौल के चलते हमारे खून में लंबे समय तक शुगर यानी शक्कर की मात्रा बढ़ जाती है। जिसके चलते हमारा शरीर इस बीमारी की चपेट में आ जाता है जिसके फलस्वरूप हमारे शरीर को बार-बार प्यास लगने की समस्या, अचानक असमय हमारे शरीर के वजन का घटना बढ़ना, बार-बार पेशाब आना, थकावट के साथ शरीर में कमजोरी महसूस होने लगती है।

शुगर के प्रकार | मधुमेह के प्रकार

मधुमेह के मुख्यता चार प्रकार होते हैं। लेकिन इनमें से दो प्रमुख है। टाइप-1 टाइप-2

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ज्यादातर लोगों हाई ब्लड शुगर से तो कुछ लोग लो’ ब्लड शुगर से भी ग्रसित होते हैं इस बीमारी के परमानेंट इलाज के लिए कोई दवा नहीं है। जो भी दवा दी जाती है वह इंसुलिन को नियंत्रित करने के लिए दी जाती है। एक आंकड़े के मुताबिक भारत के लगभग 70 फ़ीसदी लोग डायबिटीज की बीमारी से ग्रसित है।

टाइप-1 या मधुमेह शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन के उत्पादन करने के लिए अग्नाशय के फेल होने के परिणाम स्वरूप उत्पन्न होता है इसे इंसुलिन आश्रित मधुमेह (IDDM) यानी किशोर मधुमेह के नाम से भी जाना जाता है। यह जन्मजात रूप से अज्ञात कारणों से हो सकता है।

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टाइप-2 यह प्रकार इंसुलिन के प्रतिरोध से शुरू होकर धीरे-धीरे कोशिका को इंसुलिन के प्रभाव को ठीक से जवाब देने में विफल करते जाता है जैसे-जैसे रोग की स्थिति गंभीरता की ओर बढ़ती जाती है। हाई फैट, हाई ब्लड प्रेशर, सुबह देर तक सोना अत्यधिक नशे से भी शरीर में इंसुलिन की कमी विकसित हो जाती है।

मेलेतुस- (NlDDM) इसे मधुमेह की शुरुआत के रूप में जाना जाता है इसका आम कारण शरीर का अत्याधिक वजन पढ़ने यानी समय से पर्याप्त मात्रा में व्यायाम ना करने की वजह से होता है।

गर्भावधि मधुमेह यह मुख्य प्रकार से तब होता है जब पिछले समय में बिना गर्भवती महिलाओं में शुगर लेवल ज्यादा हो जाता है इस प्रकार की डायबिटीज इलाज करने के बाद सामान्यता ठीक हो सकती है।

शुगर की पहचान क्या है ?

उत्तर- एक शोध के मुताबिक शुगर का पहला लक्षण अचानक वजन का घटना बढ़ना होता है इसलिए समय-समय पर अपने शरीर का वजन जागते रहना चाहिए अगर वजन में फर्क दिख रहा है तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है इस गंभीर समस्या को इग्नोर ना करें। यह शुगर यानी डायबिटीज का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है।

शुगर के लक्षण | डायबिटीज के लक्षण

  • चोट का समय पर ठीक ना होना
  • नजर में धुंधलापन
  • नॉर्मल से बहुत ज्यादा भूख लगना
  • बहुत ज्यादा थकान का महसूस होना।
  • वजन का बहुत ज्यादा कम होना
  • वजन का अचानक घटना या बढ़ना
  • नॉर्मल से बहुत ज्यादा प्यास का लगना
  • बहुत ज्यादा गुस्सा लगना ।
  • अचानक से चिड़चिड़ापन का पैदा होना। आदि

Sugar बढ़ने से कौन सी बीमारी हो सकती है | शुगर लेवल बढ़ने से कौन सी बीमारियां होती है ?

शरीर में हाई ब्लड शुगर के बढ़ने से आंखों में धुंधलापन, हृदय रोग, किडनी संबंधी गंभीर बीमारियां हो सकती है क्योंकि यह बीमारी शरीर को दीमक की भांति अंदर से खोखला करने का काम करती है। जिसके फलस्वरूप हमारा शरीर गंभीर बीमारियों का घर बन जाता है।

शुगर को जड़ से कैसे खत्म करें | शुगर को जड़ से खत्म कैसे करें ?

फिलहाल अभी तक पूरी दुनिया में शुगर को जड़ से खत्म करने की कोई दवा नहीं बनाई जा सकी है लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस बीमारी का जड़ से इलाज करने का तरीका जरूर खोज निकाला है। यह महंगा और कठिन इलाज है इसके तहत डॉक्टर मरीज की बोन मैरो से स्टेम सेल निकाल कर उसे पैंक्रियाज में प्रत्यारोपित कर देते हैं जिसके बाद पैंक्रियाज को पुनः इंसुलिन बनाने की शक्ति मिल जाने से इस बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

डायबिटीज कितनी उम्र में होता है | शुगर कितनी उम्र में होता है ?

देश के विख्यात डॉक्टरों ने अपने रिसर्च के जरिए बताया है कि हमारे देश के पुरुषों की औसत 65 वा महिलाओं में 70 वर्ष की उम्र में डायबिटीज यानी शुगर होने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि बदले खान-पान अनियमितता के माहौल के चलते अधेड़ युवाओं में भी शुगर लेबल बढ़ने घटने की समस्याएं देखी गई है।

शुगर में क्या समस्या होती है |शुगर में क्या परेशानी होती है ?

ब्लड में शुगर की मात्रा बढ़ने पर भोजन के पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है अगर आपके खून में लंबे समय तक शुगर की मात्रा बढ़ी रहती है तो आपकी आंतों में भोजन पहुंचाने में मदद करने वाली वेगस तंत्रिका को हाई ब्लड शुगर भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसके नुकसान पहुंचाते ही आपके शरीर का वजन तेजी से कम होने लगता है इसी के साथ एसिड रिफ्लक्स, ऐठन उल्टी और शरीर में गंभीर कब्ज की समस्या का जन्म हो सकता है।

शुगर कब होता है | शुगर की बीमारी क्यों होती है ?

मधुमेह चयापचय रोगों का समूह है। जब हमारे शरीर में पैंक्रियाज यानी अग्नाशय इंसुलिन का उत्पादन करना बंद या फिर कम कर देता है तब हमारी ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने लगती है अगर खून में बढ़ते ग्लूकोस क्या स्तर को कंट्रोल ना किया जाए तो शरीर शुगर रोग से ग्रसित हो जाता है। दूसरी स्थिति में शरीर की कोशिकाएं ठीक से इंसुलिन का उत्पादन या फिर इंसुलिन के उत्पादन के प्रति प्रतिक्रिया नहीं कर पाती हैं। जिसके चलते शरीरिक तंत्र का संतुलन बिगड़ जाता है। इस स्थिति में भी शरीर के इस गंभीर बीमारी के चपेट में आने से अन्य घातक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

शुगर का हाई लेवल कितना होता है | कब कितना शुगर लेवल होना चाहिए ?

हमारे खून में 90MG/DL शुगर का स्तर सामान्य माना जाता है जबकि 120-160 MG/DL को सामान्य से ऊपर का शुगर स्तर माना जाता है यह शुरुआती शुगर का संकेत भी हो सकता है।

लेकिन 160-240MG/DL ब्लड शुगर स्तर बेहद ही खतरनाक का संकेत है इस पर तत्काल डॉक्टरों से मिलकर परहेज के साथ इलाज की जरूरत है ।

एक स्वस्थ आदमी का कितना शुगर होना चाहिए ?

आमतौर पर ब्लड में नार्मल शुगर स्तर की बात करें तो भूखे रहने पर एक व्यक्ति में 70 से 110 MG/DL के बीच शुगर स्तर तक होना ही चाहिए। खाना खाने के आधे घंटे बाद या मात्रा 110 से लेकर 140MG/DL तक हो सकती है इसे नॉर्मल अवस्था ही माना जाता है।

खाने के 2 घंटे बाद शुगर कितनी होनी चाहिए | फास्टिंग में शुगर कितनी होनी चाहिए ?

अगर आप व्रत यानी फास्टिंग में है तब आप के ब्लड में 130 MG/DL शुगर लेबल होना चाहिए इससे अधिक शुगर लेवल का मतलब कि आपके अंदर डायबिटीज के शुरुआती संकेत मिल रहे हैं।

वहीं अगर आप खाना खाने के 2 घंटे बाद ब्लड शुगर लेवल चेक करे तो आपका ब्लड शुगर लेवल 130 से 140 MG/DL के बीच होना चाहिए।

डायबिटीज मरीज को क्या खाना चाहिए | शुगर के मरीज को क्या खाना चाहिए ?

शुगर की पहचान क्या है ?

उत्तर- एक शोध के मुताबिक शुगर का पहला लक्षण अचानक वजन का घटना बढ़ना होता है इसलिए समय-समय पर अपने शरीर का वजन जागते रहना चाहिए अगर वजन में फर्क दिख रहा है तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है इस गंभीर समस्या को इग्नोर ना करें। यह शुगर यानी डायबिटीज का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है।

Sugar बढ़ने से कौन सी बीमारी हो सकती है | शुगर लेवल बढ़ने से कौन सी बीमारियां होती है ?

शरीर में हाई ब्लड शुगर के बढ़ने से आंखों में धुंधलापन, हृदय रोग, किडनी संबंधी गंभीर बीमारियां हो सकती है क्योंकि यह बीमारी शरीर को दीमक की भांति अंदर से खोखला करने का काम करती है। जिसके फलस्वरूप हमारा शरीर गंभीर बीमारियों का घर बन जाता है।

शुगर को जड़ से कैसे खत्म करें | शुगर को जड़ से खत्म कैसे करें ?

फिलहाल अभी तक पूरी दुनिया में शुगर को जड़ से खत्म करने की कोई दवा नहीं बनाई जा सकी है लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस बीमारी का जड़ से इलाज करने का तरीका जरूर खोज निकाला है। यह महंगा और कठिन इलाज है इसके तहत डॉक्टर मरीज की बोन मैरो से स्टेम सेल निकाल कर उसे पैंक्रियाज में प्रत्यारोपित कर देते हैं जिसके बाद पैंक्रियाज को पुनः इंसुलिन बनाने की शक्ति मिल जाने से इस बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

डायबिटीज कितनी उम्र में होता है | शुगर कितनी उम्र में होता है ?

देश के विख्यात डॉक्टरों ने अपने रिसर्च के जरिए बताया है कि हमारे देश के पुरुषों की औसत 65 वा महिलाओं में 70 वर्ष की उम्र में डायबिटीज यानी शुगर होने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि बदले खान-पान अनियमितता के माहौल के चलते अधेड़ युवाओं में भी शुगर लेबल बढ़ने घटने की समस्याएं देखी गई है।

शुगर में क्या समस्या होती है |शुगर में क्या परेशानी होती है ?

ब्लड में शुगर की मात्रा बढ़ने पर भोजन के पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है अगर आपके खून में लंबे समय तक शुगर की मात्रा बढ़ी रहती है तो आपकी आंतों में भोजन पहुंचाने में मदद करने वाली वेगस तंत्रिका को हाई ब्लड शुगर भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसके नुकसान पहुंचाते ही आपके शरीर का वजन तेजी से कम होने लगता है इसी के साथ एसिड रिफ्लक्स, ऐठन उल्टी और शरीर में गंभीर कब्ज की समस्या का जन्म हो सकता है।

शुगर कब होता है | शुगर की बीमारी क्यों होती है ?

मधुमेह चयापचय रोगों का समूह है। जब हमारे शरीर में पैंक्रियाज यानी अग्नाशय इंसुलिन का उत्पादन करना बंद या फिर कम कर देता है तब हमारी ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने लगती है अगर खून में बढ़ते ग्लूकोस क्या स्तर को कंट्रोल ना किया जाए तो शरीर शुगर रोग से ग्रसित हो जाता है। दूसरी स्थिति में शरीर की कोशिकाएं ठीक से इंसुलिन का उत्पादन या फिर इंसुलिन के उत्पादन के प्रति प्रतिक्रिया नहीं कर पाती हैं। जिसके चलते शरीरिक तंत्र का संतुलन बिगड़ जाता है। इस स्थिति में भी शरीर के इस गंभीर बीमारी के चपेट में आने से अन्य घातक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

शुगर का हाई लेवल कितना होता है | कब कितना शुगर लेवल होना चाहिए ?

हमारे खून में 90MG/DL शुगर का स्तर सामान्य माना जाता है जबकि 120-160 MG/DL को सामान्य से ऊपर का शुगर स्तर माना जाता है यह शुरुआती शुगर का संकेत भी हो सकता है।

लेकिन 160-240MG/DL ब्लड शुगर स्तर बेहद ही खतरनाक का संकेत है इस पर तत्काल डॉक्टरों से मिलकर परहेज के साथ इलाज की जरूरत है ।

एक स्वस्थ आदमी का कितना शुगर होना चाहिए ?

आमतौर पर ब्लड में नार्मल शुगर स्तर की बात करें तो भूखे रहने पर एक व्यक्ति में 70 से 110 MG/DL के बीच शुगर स्तर तक होना ही चाहिए। खाना खाने के आधे घंटे बाद या मात्रा 110 से लेकर 140MG/DL तक हो सकती है इसे नॉर्मल अवस्था ही माना जाता है।

खाने के 2 घंटे बाद शुगर कितनी होनी चाहिए | फास्टिंग में शुगर कितनी होनी चाहिए ?

अगर आप व्रत यानी फास्टिंग में है तब आप के ब्लड में 130 MG/DL शुगर लेबल होना चाहिए इससे अधिक शुगर लेवल का मतलब कि आपके अंदर डायबिटीज के शुरुआती संकेत मिल रहे हैं।

वहीं अगर आप खाना खाने के 2 घंटे बाद ब्लड शुगर लेवल चेक करे तो आपका ब्लड शुगर लेवल 130 से 140 MG/DL के बीच होना चाहिए।

डायबिटीज मरीज को क्या खाना चाहिए | शुगर के मरीज को क्या खाना चाहिए ?

डायबिटीज के मरीजों के लिए कुछ फल और सब्जियां बेहद ही ज्यादा फायदेमंद होती हैं जो ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने का काम करने के साथ सेहत को भी लाभ पहुंचाती है। खीरा टमाटर आइस बर्ग मूली पपीता नाशपाती तरबूज सेब संतरा मीठा नींबू को नियमित भोजन में शामिल करने से काफी हद तक डायबिटीज को कंट्रोल में किया जा सकता है।

शुगर में कौन सा जूस फायदेमंद है | शुगर में कौन सा जूस पीना चाहिए ?

शुगर के मरीज के लिए करेले का जूस रामबाण औषधि की तरह है इसमें पाए जाने वाले प्रॉपर्टीज डायबिटीज को कंट्रोल करने का काम करते हैं आपको दिन भर में कितनी बार करेले का जूस सेवन करना चाहिए यह आपके ब्लड शुगर लेवल और बॉडी कंडीशन के ऊपर निर्भर करता है इसके अतिरिक्त आप गाजर चुकंदर पालक का जूस भी पी सकते हैं जो डायबिटीज में बेहद ही फायदेमंद है।

शुगर की देसी दवा क्या है ? | शुगर कौन सी जड़ी बूटी से जाती है ?

दालचीनी जामुन करेले का जूस यह इस प्रकार की जड़ी बूटियां है जो मधुमेह नियंत्रण के लिए इस्तेमाल की जाती है दालचीनी अपने आप में ब्लड प्रेशर को कम करने और डायबिटीज से लड़ने में मदद करने के लिए जानी जाती है। जामुन की गुठली जामुन का प्रयोग तीज में काफी फायदेमंद होता है।

जामुन हमारे शरीर में शुगर को कम करने में मदद करता है जामुन के पत्ते बीज और हर चीज को शुगर के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है जामुन के सूखे बीजों को पीसकर पानी के साथ दिन में 2 बार लेने से शुगर कंट्रोल में आता है। इसी तरह आम की पत्ती को पीसकर उपयोग करने से भी शुगर में काफी लाभ प्राप्त होता है।

शुगर में परहेज क्या करना चाहिए | शुगर में क्या क्या परहेज करना चाहिए ?

डायबिटीज यानी शुगर के मरीजों को कुछ फल और सब्जियों को खाने से परहेज करना चाहिए इसमें वह सब्जियां शामिल है जो ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ा देती हैं जमीन के नीचे यानी तना वाली सब्जियां खासतौर पर शुगर स्थल बढ़ाने वाली होती है जैसे आलू शकरकंद उन्हें खाने से परहेज करना चाहिए इसके साथ कटहल आम अंगूर खजूर केला चुकंदर और गाजर जिनका शुगर के मरीज को सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए इनकी अधिक मात्रा शुगर के लेबल को बढ़ाने का काम करती हैं।

शुगर से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है | शुगर शरीर पर क्या-क्या प्रभाव डालता है ?

हमारी शरीर मैं ब्लड शुगर की मात्रा बढ़ने के साथ ही यह दिल दिमाग और लीवर के लिए घातक होता है शुगर का हमारे दिल और दिमाग पर गहरा असर पड़ता है शुगर हमारे नर्वस सिस्टम को डैमेज कर पेरीफेरल न्यूरोपैथी के खतरे को बढ़ाता है जिससे हाथ पैर और उंगलियों में तेज दर्द होने के साथ सुन्नहाट पैदा हो जाती है।

शुगर में कौन सा विटामिन लेना चाहिए | शुगर में कौन कौन सी विटामिन लेनी चाहिए ?

शुगर के रोगियों की इम्युनिटी दूसरों की तुलना में काफी कमजोर हो जाती है ऐसे में शुगर के मरीजों के शरीर में विटामिन सी की कमी पैदा हो जाने से समस्याएं बढ़ सकती हैं। हमारे शरीर में संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त मात्रा में विटामिन शो का होना आवश्यक है शुगर के मरीजों के लिए विटामिन ए विटामिन बी विटामिन सी लेने की जरूरत बढ़ जाती है शुगर चेक करा-कर डॉक्टर की सलाह से इन विटामिन्स का सेवन करके इम्यूनिटी बढ़ाई जा सकती है।

शुगर के मरीज को ताकत के लिए क्या खाना चाहिए ?

शुगर के मरीज को विटामिन ए बी सी के साथ या फिर प्रोटीन से भरपूर दही का सेवन करना चाहिए दही में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है दही खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहता है दही खाते वक्त कोशिश करें कि बिना चीनी वाला ही दही खाएं मिठास के लिए आप इसमें जामुन या अनार भी डाल सकते हैं।

शुगर में गिलोय का उपयोग कैसे करें ?

गिलोय औषधि पौधा है इसके फूल और पत्तों का उपयोग टाइप 2 की डायबिटीज के लिए प्राकृतिक तौर पर किया जाता है इसकी कुछ पत्तियों को चलाया जा सकता है या फिर आप इसकी गुलाबी रंग के फूलों को एक कप पानी में उबालकर छानकर रोज खाली पेट पिएंगे तो शुगर नियंत्रित रहेगा गिलोय प्राकृतिक रूप से शुगर के साथ अन्य बीमारियों में भी बेहद फायदेमंद है इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं है।

शुगर में आलू कैसे खाएं ?

इंसुलिन क्या है | इंसुलिन किस चीज से बनता है ?

इंसुलिन एक प्रकार का हार्मोन है। जिसका निर्माण हमारे अग्नाशय में होता है । हमारा अमाशय यानी अग्नाशय कार्बोहाइड्रेट को रक्त शक्कर में बदलने का काम करता है इन के माध्यम से रक्त शक्कर को ऊर्जा में परिवर्तित करता है यदि हमारे पैनक्रियाज मेन्सुलिन बन्ना बंद हो जाए तो ब्लड ग्लूकोस ऊर्जा में परिवर्तित नहीं होगा। फल स्वरुप ब्लड में शुगर लेवल बढ़ जाएगा।

शुगर को जल्दी कंट्रोल कैसे करें ?

शुगर ज्यादा बढ़ता है तो क्या होता है | ज्यादा शुगर होने का लक्षण ?

ब्लड शुगर ज्यादा बढ़ने पर आंखों में कमजोरी होने के साथ आपकी निगाह कमजोर हो जाती है सामने की चीजें धुंधरी नजर आने लगती है या इसलिए होता है क्योंकि ब्लड शुगर बढ़ने पर आपका शरीर आंखों के लेंस शीतल पदार्थ खींचता है जिसकी वजह से ध्यान केंद्रित करने में समस्या पैदा होती है हाई ब्लड शुगर रेटीना की रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकता है जिसकी वजह से आंखों की रोशनी जानने का भी खतरा बढ़ सकता है।

शुगर बढ़ने पर क्या लक्षण होते हैं | ज्यादा शुगर बढ़ने के क्या लक्षण है ?

ब्लड में शुगर लेवल बढ़ने पर शरीर में फोड़े फुंसी की समस्या शुरू हो जाती है दूसरी तरफ अगर आपके शरीर पर चोट या कटे का जख्म हो जाता है तो उसे भरने में देरी होती है अगर शरीर के जख्म भरने में देरी हो रही है तो यह डायबिटीज का लक्षण है। व्यक्ति को शरीर के अंगों हाथों कंधे जोड़ों गर्दन में झुनझुनाहट महसूस होनी शुरू हो जाती है इस वजह से व्यक्ति में कमजोरी आ जाती है यह भी शरीर में डायबिटीज यानी शुगर होने के संकेत है।

डायबिटीज रोग किसकी कमी से होता है | क्यों होता है डायबिटीज ?

हमारे शरीर में इंसुलिन नामक हारमोंस की कमी के कारण शरीर में सबसे ज्यादा ऊर्जा पैदा करने वाले पदार्थ शुगर या स्टार्च को हमारा शरीर ऊर्जा में परिवर्तित नहीं कर पाता है इंसुलिन की कमी से हमारे शरीर में शुगर या स्टार्च की कमी से खून में स्टार्च जमा होने लगता है यह डायबिटीज का खतरनाक कारण बन कर सामने उभरता है।

क्या शुगर जड़ से खत्म हो सकता है | क्या शुगर को जड़ से खत्म किया जा सकता है ?

अभी तक वैज्ञानिक खोजों के बावजूद दवा इंसुलिन के इंजेक्शन से मधुमेह पर सिर्फ कंट्रोल यानी काबू पाया जाता है पूरी तरीके से इस बीमारी को ठीक करने की कोई कारगर विधि या दवा नहीं है। वैज्ञानिकों ने एक विधि जरूर निकाली है जिसके द्वारा मरीज के बोन मैरो से स्टेम सेल को निकालकर उनके अग्नाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है जिससे इंसुलिन बनाना फिर से शुरू हो जाता है।

क्या शुगर में दही खा सकते हैं ?

शुगर के लक्षण | डायबिटीज के लक्षण

  • चोट का समय पर ठीक ना होना
  • नजर में धुंधलापन
  • नॉर्मल से बहुत ज्यादा भूख लगना
  • बहुत ज्यादा थकान का महसूस होना।
  • वजन का बहुत ज्यादा कम होना
  • वजन का अचानक घटना या बढ़ना
  • नॉर्मल से बहुत ज्यादा प्यास का लगना
  • बहुत ज्यादा गुस्सा लगना ।
  • अचानक से चिड़चिड़ापन का पैदा होना। आदि

डायबिटीज यानी में परहेज करके इसे कंट्रोल में कर पूरी तरीके से बचते हुए सामान्य जिंदगी जिई जा जाती है। बस इस गंभीर बीमारी की शुरुआत में ही जानकारी हो जाए अगर उपयुक वैसे आपने कोई भी लक्षण दिखे तो आप तत्काल चार्ज करा कर परहेज करते हुए इस बीमारी को कंट्रोल में कर सकते हैं। परहेज के साथ समय समय पर दवाई लेते हुए इस बीमारी से पूरी तरीके से निपटा जा सकता है।

VS HINDI NEWS टीम की रिपोर्ट

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