भारत और रूस के संयुक्त युद्धाभ्यास के साथ चीन का चौतरफा विरोध शुरू हो गया है कोविड-19 वायरस के चलते पूरी दुनिया भर की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट के बाद चीन की भी परेशानियां बढ़ती जा रही है इस बार चीन की विस्तारवदी चाल को समझते हुए थाईलैंड में लोगों के विरुद्ध को देखते हुए सरकार ने चीन से जून 2015 में तीन पनडुब्बी खरीदने के लिए हुए समझौते की योजना पर रोक लगा दी है। हालांकि थाईलैंड 434 मिलियन डॉलर की एक पनडुब्बी पहले ही खरीद चुका है। थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुथ-चान-ओच ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हमने चीन से बात की है नौसेना को अपने करार के संबंध में बीजिंग से बात करनी है उनके मुताबिक हम भुगतान में 1 साल की देरी कर सकते हैं। सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक नौसेना की पनडुब्बी खरीद प्रक्रिया को 1 साल के लिए निलंबित करने को कहा गया है आर्थिक तंगी दूर होने के बाद डीलर आगे बढ़ाई जाएगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तीन दिवसीय दौरे पर हैं तो दूसरी तरफ पूर्वी लद्दाख में चीन से जारी सैन्य तनाव के बीच शुक्रवार को भारत और रूस की संयुक्त नव सेनाओं ने दो दिवसीय युद्ध अभ्यास शुरू किया है इसके जरिए विभिन्न प्रकार की सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने हुए आपस में कोआर्डिनेशन बढ़ाना है दुश्मन से निपटने के लिए दुश्मन की आत्मा को उकसावे की कार्रवाई को कड़ा जवाब देना है इस एक्सरसाइज में बड़ी संख्या में युद्ध दुख के साथ ₹1 शामिल की गई है जिसमें भारतीय नौसेना के साथ ताकतवर विमान समेत समन्वय को बढ़ाना है बता दे या उधर कोई पहली बार नहीं हो रहा है 2003 से भारत और रूस की सेनाओं के बीच युद्ध अभ्यास होता आ रहा है। वही हाल ही में यानी जुलाई महीने में भारतीय नौसेना वाह अमेरिका नेवी के बीच युद्ध अभ्यास हुआ था जिसके बाद चीन की बेचैनी और बढ़ गई थी क्योंकि उस एक्सरसाइज से मलक्का जलडमरूमध्य समुद्री क्षेत्र मार्ग में चीन की आपूर्ति को युद्ध के हालात में भारतीय फौज द्वारा रोकने में अहम फायदा हो सकता है।

चीन धीरे-धीरे चारों तरफ से गिरने लगा है पहले जापान ने 57 जापानीज कंपनियों को चीन से वापस वापस बुलाकर चीन को आर्थिक झटका दिया अब उसने आसियान भारत व बांग्लादेश में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए आर्थिक छूट सब्सिडी देने की घोषणा की है थाईलैंड म्यामार जैसे छोटे देश भी चीन की नीतियों को भाग का धीरे-धीरे उसके प्रोजेक्ट से अपने आप को निकाल कर उसकी आर्थिक व विस्तार वादी नीतियों को झटका देना शुरू कर दिया है वहीं भारत के कई राज्यों समेत उधर देश में भी चाइनीज कंपनियों को बैन कर चाइनीज कंपनियों के कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर चीन को बड़ा झटका दिया गया है। चीन दुनिया की शांति प्रदेशों के लिए लगातार खतरा बनता जा रहा है चीन एक ऐसा देश है जो पहले व्यापार आर्थिक मदद के नाम पर छोटे-छोटे देशों को आर्थिक रूप से कर्ज के बोझ तले लादने के बाद उनका शोषण करता है या नापाक पड़ोसी किसी भी पड़ोसी देशों की सीमा का कोई सम्मान नहीं करता इस ने अतिक्रमण कर अपने से ढाई सौ गुना छोटे देश ताइवान को लगातार अपने मिलाकर हड़पने की कोशिश कर रहा है।

सीमा विवाद के बीच भारतीय बाजारों से चीन को लगा बड़ा झटका

पूर्वी लद्दाख में भारत चीन के बीच जारी सीमा तनाव के बाद भारतीय बाजार में चीनी सामानों की मांग में बहुत तेजी से गिरावट दर्ज की गई है इसका असर दिखने लगा है जुलाई महीने में चीनी आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई है अगर बात की जाए पिछले 7 महीनों के कुल व्यापार की तो उसमें 18.6% की गिरावट दर्ज की गई है सीमा पर भारी तनाव लगातार बना हुआ है अगस्त माह के आखिरी सप्ताह यानी 2930 31 अगस्त को चीनी नापाक चाल चलते हुए भारतीय क्षेत्र में अवैध कब्जे की कोशिश की जिसे भारती सुर वीरों ने नाकाम करते हुए सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ब्लैक टॉप पहाड़ी पर कब्जा कर लिया है। भारत की इस मार से जंग चाहने वाला चीन लगातार पड़ोसियों को फंसाने की कोशिश में लगा हुआ है जुलाई 2019 के मुकाबले 24% गिरावट दर्ज की गई है।

तीन दिवसीय रूस दौरे पर शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा मंत्री जनरल वेई फेंगही के साथ चीन के रक्षा मंत्री के बार-बार अनुरोध के बाद रूस की राजधानी मास्को में 2 घंटे 20 मिनट चली बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व चीनी रक्षा मंत्री से वार्ता के दौरान भारत ने चीन द्वारा पैंगोंग झील की स्थिति में यथास्थिति बदलने की कोशिश पर कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए बातचीत के माध्यम से विवाद खत्म करने पर जोर दिया।

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