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फ्रांस के नीस आतंकी हमले में बड़ा खुलासा हुआ है। ट्यूनीशिया का 21 वर्षीय हमलावर चाकू व कुरान लेकर नींस की चर्च में घुसा जिसके बाद उसने चाकू से प्रहार करते हुए 3 निर्दोषों की अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते हुए गर्दन पर प्रहार कर निर्मम हत्या कर दी। इससे पहले भी फ्रांस में अध्यापक की गर्दन इनकी मानसिकता के लोगों ने काटकर अमानवीय हरकत की थी जिसके बाद फ्रांस में गुस्से का महौल बना हुआ था। लेकिन सुरक्षा के बावजूद फ्रांस में लगातार दूसरा हमला हुआ। अब इसी बात से अनुमान लगा सकते हैं कि 21 वर्षीय हमलावर जिसके ऊपर अभी तक कोई अपराधिक क्राइम का रिकॉर्ड नहीं मिला है उसने निर्मम तरीके से 3 निर्दोष को केवल दिमागी जिहादी जहर की वजह से मौत के घाट उतार दिया। वह घायल होकर भी अल्लाह हू अकबर के नारे लगाता रहा, फ्रांस से लेकर पूरी दुनिया के शांतिप्रिय लोगों में इस घटना को लेकर आक्रोश है दूसरी तरफ कुछ आतंकवादी मानसिकता के लोग मानवता पर हुए इस हमले के बजाए फ्रांस पर ही हमलावर रुख अपनाए हुए हैं क्योंकि उन्हें अपनी राजनीति करते हुए घिनौनी मानसिकता का परिचय देना है फ्रांस में जो भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है इसकी कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए यह सब धर्म के नाम पर हुआ है “मानवता से बड़ा कोई दूसरा धर्म ही नहीं हो सकता” लेकिन इनकी मानसिकता के जहरीले विषैला नागों का वध कर कौन समझाए ?

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