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केंद्र सरकार की नीतियों को देखकर ब्रिटिश सरकार की यादें आने लगी हैं। किस तरह से ब्रिटिश सरकार ने भारतीय लोगों पर जुल्म किया है। कैसे ब्रिटिश सरकार ने भारतीय पत्रकारों और समाचार पत्रों को रोकने के लिए तरफ तरफ के हथकंडे अपनाए। काले कानून लाए। रातों रात समाचार पत्रों को जब्त करवाया। उसके संपादकों, मुद्रकों पर मुकदमे दर्ज करवाए। कामवेश आज भी वैसी ही परस्थिति हमारे सामने हैं। कुछ ऐसी घटनाएं हालिया दिनों में हुई हैं जो इशारा उसी तरफ कर रही है।

पेगासस जासूसी मामला इस बारे में द वायर ने रिपोर्ट प्रकाशित की हैं जिसके बाद देश में बबाल मचा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया कि इसके जरिए देश के कई पत्रकारों को, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के ऊपर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला को, चुनाव आयोग को, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनके करीबियों के, प्रशांत किशोर जैसे चुनावी रणनीतिकार के फोन टैपिंग करवाया गया। उनको मैनेज करने की कोशिश की गई। अपने हिसाब से चलाने की कोशिश की गई। ये किसी भी देश और लोकतंत्र के लिए खतरें की निशानी है। निजता पर जोरदार हमला है।स्वतंत्रता पर जोरदार हमला है। आज जागने की जरूरत हैं। आंखें खोलने की जरूरत है।

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श्याम मीरा सिंह मामला बहुत कम लोग इस नाम को जानते होंगे। कुछ जानते भी होंगे। ये युवा पत्रकार हैं। इनकी लेखनी से सरकार डर गई। पहले आजतक में काम करते थे। सोशल मीडिया पर श्याम मीरा सिंह काफी सक्रिय हैं। अच्छे खासे फॉलोअर्स हैं। पत्रकार हैं तो जाहिर सी बात है समाज में हो रहे अच्छे बुरे घटनाओं पर लिखना इनका काम हैं। लेकिन उनको क्या पता जिस कलम से महान क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को देश से भगाया वही कलम आज उनको नौकरी से बाहर करवा देगी। 17 जुलाई 2021 को श्याम मीरा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा “जो कहते हैं कि प्रधानमन्त्री का सम्मान करो, उन्हें सबसे पहले मोदी से कहना चाहिए कि वे प्रधानमंत्री पद का सम्मान करें।
उनका दूसरा ट्वीट था, “Modi Is a Shameless Prime Minister”

फिर क्या था आजतक ने उन्हें नौकरी से बाहर निकाल दिया। ये कोई सामान्य बात नहीं हैं। ये कलम की ताकत है जो ये बहुमत वाली सरकार को “56” इंच सीने वाली सरकार को डरा दी है। ऐसी घटनाएं ब्रिटिश सरकार की याद दिलाती है। हमें वक्त रहते जाग जाना चाहिए। ये कोई पहली घटनाएं नहीं है इससे पहले भी कई पत्रकारों को नौकरी से बाहर होना पड़ा है।

पिछले दिनों दैनिक भास्कर और भारत समाचार पर आयकर विभाग ने छापा मारा, ये कोई सामान्य बात नहीं थी। पिछले कुछ महीनों को देखे तो दैनिक भास्कर और भारत समाचार ने कोरोना काल में केंद्र और राज्य सरकारों की नाकामियों पर जमकर लिखा, बोला लोगों के समस्याओं को जोर शोर से उठाया। सड़ती लाशों की तस्वीरें लोगों के सामने लाया। श्मशान में जलती लाशों की तस्वीरों को सामने लाया जिससे कहीं ना कहीं सरकारें असहज हुई है जिसका परिणाम आयकर विभाग के छापे के रूप में दैनिक भास्कर और भारत समाचार को मिला। ये किसी भी लोकतंत्रिक देश के लिए ठीक नहीं कि पत्रकारों और समाचार पत्रों पर लगाम लगाने की कोशिश की जाए। ऐसी घटनाएं जब जब होगी तो ब्रिटिश सरकार से उसकी तुलना होगी चाहे वो इंदिरा गांधी द्वारा लाए गए इमरजेंसी हो चाहे आज के दौर में समाचार पत्रों और पत्रकारों पर लगाम लगाने की कोशिश हो। सवाल तो उठेंगे जोर शोर से उठेंगे। जवाब तो आपको देना ही होगा।

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1 COMMENT

  1. साँच को आंच नहीं ।दोस्त सत्य को परेशान तो किया जा सकता है परंतु परास्त नहीं।