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कोविड-19 के चलते चालू वित्त वर्ष की पहली अप्रैल-जून की तिमाही में देश की विकास दर यानी ग्रास डोमेस्टिक प्रोडक्ट (सकल घरेलू उत्पाद) की ग्रोथ रेट में 23.9 प्रतिशत की भारी कमी आई है। सकल घरेलू उत्पाद में शामिल कुल 8 सेक्टर में केवल कृषि की ग्रोथ रेट में 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाकी शेष सातों सेक्टरों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कंस्ट्रक्शन के सेक्टर में 50.2 प्रतिशत, मैन्युफैक्चरिंग में 39.3 प्रतिशत, व्यापार, होटल्स, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन सेक्टर में 47 प्रतिशत,खनन क्षेत्र में 23.3 प्रतिशत, गैस, इलेक्ट्रिसिटी व वाटर सप्लाई में 7 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कृषि सेक्टर को छोड़कर शेष सभी सेक्टरों में भारी गिरावट के साथ उसने सकल घरेलू उत्पाद पर बहुत गहरा प्रभाव डाला है। यही कारण है। कि कोविड-19 के प्रकोप के चलते देश में लॉकडाउन की वजह से मार्च के आखिरी सप्ताह से लेकर अप्रैल मई-जून में देश पूरी तरह से बंद था। जिसकी वजह से देश के भीतर उत्पादित सभी सामान व सेवाओं में भारी गिरावट दर्ज की गई। जिसकी वजह से जीडीपी यानी कि (देश के अंदर उत्पादित सभी घरेलू सामान सेवाओं का कुल मूल्य) जिसके जरिए किसी भी देश की (स्थिति) विकास दर को देखा जाता है कि-किस क्षेत्र में किस तरह और किस गति से कार्य हो रहा है। जिस देश की जीडीपी यानी कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) जितनी अधिक होंगी उस देश की स्थिति उतनी अधिक मजबूत होगी।

मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था में 23.9 % की गिरावट की मुख्य वजह कोविड-19 संक्रमण को रोकने के लिए लगाए गए कड़े प्रतिबंध यानी लॉक डाउन था। आने वाली तिमाही में देश में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिलेगा।

क्या है सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), एनएसओ कैसे गणना करता है।

GDP किसी भी देश की रीड की हड्डी होती है यह 1 साल के भीतर उस देश में उत्पादित होने वाले सभी सामान्य व सेवाओं के कुल मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद कहा जाता है जिसे शॉर्टकट में जीडीपी कहते हैं। जीडीपी किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी होती है इससे उस देश के किस क्षेत्र में किस-किस उत्पाद में किस-किस स्तर पर विकास हो रहा है। को दर्शाता है जीडीपी की गणना के लिए केंद्रीय संख्यिकी कार्यालय (NSO) देश के कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, रियल स्टेट, गैस सप्लाई, विद्युत, माइनिंग एवं मत्स्य, ट्रेडिंग, कंस्ट्रक्शन, ट्रेड एंड कम्युनिकेशन, होटल, फाइनेंस एंड इंश्योरेंस, बिजनेस सर्विसेज्य, सामाजिक व सर्वजनिक सेक्टरों समेत आठ प्रमुख क्षेत्रों के आंकड़े प्राप्त कर उस क्षेत्र में चल रही उठापटक यानी कि किस क्षेत्र में कितना उत्पाद बढ़ा या कितना पहले की तुलना में घटा आदि को प्राप्त कर पूरी घटना को साल भर में 4 बार यानी कि हर 3-3 महीने पर आंकड़े जारी करता है। जिसमें उस तीन महीनों में किस क्षेत्र में कितना उत्पादन हुआ या पहले की तुलना में कितना उत्पादन घटा का पूर्ण विवरण होता है। जिसके आधार पर उस तिमाही का उत्पादन देखा जाता है इसी तरह चारों तिमाहियों को जोड़कर एक साल के कुल सकल घरेलू उत्पादन की गणना की जाती है।

जीडीपी में अचानक से गिरवाट की प्रमुख वजहें

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देश में NSO की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 की पहली तिमाही में जीडीपी विकास दर 5.2 प्रतिशत थी धीरे-धीरे गिरावट के आसार थे, लेकिन अचानक से जीडीपी गिरने के पीछे जानकारों के मुताबिक 25 मार्च को कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए देश में मई तक पूर्ण रूप से लॉकडाउन लागू कर दिया गया जिसकी वजह से सभी क्षेत्रों में भारी गिरावट देखने को मिली, वही बड़ी संख्या में कामगार बेरोजगार हुए कंपनियों का उत्पादन लगभग ठप हो गया था। अर्थव्यवस्था को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा 20 अप्रैल के बाद हल्की ढील दी गई, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाया जा रहा है। जिसकी वजह से इस तिमाही में भारी गिरावट देखने को मिली अब अनलॉक लागू कर अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे पटरी पर लौटने की कोशिश में सरकार वित्त से लेकर कई प्रावधान कर रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर उन प्रावधानों का क्या प्रभाव पड़ेगा यह तो अगली तिमाही की रिपोर्ट बताएगी।

कोविड-19 महामारी की वजह से कृषि छोड़ हर सेक्टर में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, तमाम उपायों के बावजूद कोविड-19 बड़ी तेजी से देश में प्रसारित हो रहा है जिसको देखते हुए अनलॉक लगाकर इसे प्रसारित होने से रोकने की कोशिश के साथ उद्योग धंधों को कुछ शर्तों के साथ छूट दी गई है जिससे कोविड-19 महामारी से निपटने हुए धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था भी पटरी पर आ जाए। इस महामारी से लेकर अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी की मार से लेकर मजदूर से लेकर छोटे उद्यमी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

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