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उत्तर प्रदेश- 25 दिसंबर से ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के साथ प्रधानों के अधिकार छीन जाएंगे उनके बजाए पंचायती राज विभाग द्वारा एडीओ को ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने की प्रक्रिया को शुरू हो चुकी है इसी के मद्देनजर अपने ग्राम सभा में अब तक छुट्टे विकास कार्यों को पास कराकर भुगतान करवाने में ग्राम प्रधान सक्रिय हो चले हैं दूसरी तरफ ग्राम पंचायत चुनाव का बिगुल बजने से पहले सभी दावेदार अपनी दावेदारी ठोकने के लिए जन आधार बटोरने में जुटे हैं, प्रधान, पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी के चुनाव के साथ ही गांवों में प्रधानी के चुनाव की गहमागहमी शुरू हो चुकी है। इसी क्रम में प्रधानों द्वारा मतदाता सूची में नाम जोड़ने काटने की प्रक्रिया जारी है। अधिकतर जगह से सूचना मिल रही है कि मतदाता सूची में दावेदार अपने विरोधियों का मत कटवा कर अपने समर्थकों का मत चढ़ावाने में सक्रिय हैं। सियासत का खेल लगातार जारी है दूसरी तरफ चुनावों की प्रशासनिक तैयारी जोर-शोर से जारी है डीपीआरओ के मुताबिक 25 दिसंबर को ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में प्रधानों के हटने के बाद एडीओ को ग्राम पंचायत का (जब तक प्रधान का चुनाव नहीं हो जाता) प्रशासक बना दिया जाएगा। पंचायती राज विभाग में इसके लिए प्रक्रिया जोर शोर से चल रही है अभी चुनावी तारीख का ऐलान नहीं हुआ है हर जगह पर जोर-शोर से प्रधानी चुनाव की सरगर्मी जारी है।

उम्मीदवारों की है नजर, कौन सी आरक्षित सीट किसके खाते में…

पंचायत चुनाव की सरगर्मी तेज होते हैं संभावित उम्मीदवारों की नजर आरक्षित सीट पर बरकरार है आखिर उनकी सीट किस वर्ग व किस खाते में जा रही है, महिला सीट/पुरुष?

ग्राम पंचायत चुनाव में प्रत्याशी उतारने की तैयारी में राजनीतिक पार्टियां

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इस बार के चुनाव में बीजेपी ने भी मैदान में ताल ठोकने का एलान कर पहले से ग्राम पंचायत चुनाव में उतरने वाली समाजवादी पार्टी के सामने कड़ी चुनौती पेश करने की शुरुआत कर दी है। इस बार के चुनाव को समाजवादी पार्टी पूरे दमखम के साथ लड़ने की तैयारी में है। वही बसपा व कांग्रेस पार्टी मुकाबले को त्रिकोणी बनाने की मुहिम में जुट गई है। पंचायत चुनाव के लिए bjp अपने उम्मीदवारों की स्क्रीन करवा रही है। वही बसपा भी चुनावों में पूरी ताकत झोकने की तैयारी में है दूसरी तरफ पंचायत चुनाव की तारीख अभी तक घोषित नहीं हुई है परिसीमन कर मतदाता सूची का पुनः निरीक्षण चल रहा है पूरा खेल कौनसा गांव किस जाति के लिए आरक्षित होगा पर टिका हुआ है।

25 दिसंबर से ग्राम पंचायत का कार्यकाल खत्म हो जाएगा, इसी के साथ ग्राम प्रधान के संपूर्ण अधिकार अपने आप खत्म हो जाएगा। इसके बाद चुनाव के दौरान गांव के विकास के लिए प्रधानों की जगह पर पंचायती राज विभाग द्वारा चुनाव के दौरान ग्राम पंचायतों के विकास के लिए प्रशासक की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है दूसरी तरफ राजनीतिक हलकों में चुनावी सरगर्मी तेजी से जारी है सभी प्रधान बीडीसी जिला पंचायत सदस्य अपनी अपनी दावेदारी को लेकर जनता के बीच में अपना अपना पक्ष मजबूत कर जीत के लिए अपनी फोटो की रणनीति तैयार कर जन समर्थन का बंदोबस्त कर अपने विरोधियों को चित करने के खेल में जुट गए हैं राजनीतिक लहजे में वोट घटाने बढ़ाने के खेल में दोनों तरफ की दावेदार जुटे हुए हैं कुछ अपने विरोधी का नाम कटवाने की फिराक में है तो कुछ अपने समर्थकों का नाम सूची में जुड़वाने की कोशिश में लगे अपनी जीत की रणनीति तैयार कर रहे हैं।

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