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देश में ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल व डिजिटल कंटेंट के लिए अभी तक कोई कानून नहीं हैं| केंद्र सरकार ने इस बाबत ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल से लेकर ऑनलाइन कंटेंट प्रोवाइडर को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत लाने के लिए बुधवार को अधिसूचना जारी की है| इसके तहत कैबिनेट सचिवालय की तरफ से अधिसूचना में कहा गया है कि ऑनलाइन वेबसाइट पर उपलब्ध करंट अफेयर सामग्री न्यूज़ पोर्टल को सूचना प्रसारण मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में लाने का फैसला लिया गया है| इसका मतलब साफ होता है कि अब ऑनलाइन जानकारी से लेकर वीडियो सामग्री उपलब्ध कराने वाली सभी साइटों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के द्वारा रेगुलेट किए जाने की तैयारी है|जानकारी के मुताबिक बता दे न्यूज़ पोर्टल व मीडिया वेबसाइट को रेगुलेट्स के करने (की योजना बनाकर जानकारी रणनीति) के लिए सरकार द्वारा 10 सदस्य कमेटी बनाई गई थी| इस कमेटी में सूचना प्रसारण मंत्रालय के आधीन सूचना व प्रसारण कानून आईटी मंत्रालय व डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी के सचिवों को शामिल किया गया था| बता दे इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक मामले में कहा था| आनलाईन माध्यमों का रेगुलेशन टीवी से ज्यादा जरूरी है| ऑनलाइन वेबसाइट पर मौजूद न्यूज कंटेंट से लेकर फेक न्यूज़ तक को वेरीफाई कर लोगों को गलत जानकारी से बचाने के लिए यह सूचना प्रसारण मंत्रालय का अहम फैसला माना जा रहा है| जिसके तहत फेक न्यूज़ को काफी हद तक कम किया जा सकता हैं|पिछले साल सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावेडकर ने कहा था कि सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिससे मीडिया की आजादी पर कोई असर पड़ेगा| लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया व फिल्मों में पर जिस तरह का नियमन है| उसी तरह का कुछ नियमन over-the-top यानी कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी होना चाहिए| बता दे पिछले कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने ओटीटी प्लेटफॉर्म की मांग वाली याचिका में केंद्र सरकार से प्रतिक्रिया का जवाब मांगा था| इस संबंध में केंद्र सरकार व सूचना प्रसारण मंत्रालय और मोबाइल एसोसिएशन आफ इंडिया को नोटिस भेजा गया था| जिसमें कहा गया था कि इन प्लेटफार्म के चलते फिल्म बनाने वाले और आर्टिस्ट को सेंसर बोर्ड के डर और सर्टिफिकेशन के बिना अपना बनाया हुआ कंटेंट रिलीज करने का मौका मिल गया है|बता दे देश में इस समय ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल ऑनलाइन कंटेंट को लेकर कोई कानून नहीं है| जबकि टीवी फिल्म, अखबार के लिए कानून है बुधवार को जारी अधिसूचना में केंद्र सरकार ने न्यूज़ पोर्टल ऑनलाइन कंटेंट प्रोवाइडर को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत लाने की अधिसूचना जारी की है| कुछ समय पहले एक मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते हुए टीवी फिल्म की तरह ऑनलाइन न्यूज पोर्टल व कंटेंट को रेगुलेट करने के बारे में कानून संबंधी मांग की थी| उस समय सरकार द्वारा पक्ष रखा गया था कि ऑनलाइन माध्यमों का रेगुलेशन टीवी से ज्यादा जरूरी है| अब बुधवार को सरकार ने इस संबंध में रेगुलेट करने संबंधी अधिसूचना जारी कर, सूचना प्रसारण मंत्रालय के तहत लाने का कदम उठाया है| बता दे न्यूज़ चैनलों के लिए न्यूज़ ब्रॉडकास्ट एसोसिएशन, अखबार के लिए आरएनआई, फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड मौजूद है| लेकिन ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल के लिए कोई सरकारी संस्था या रेगुलेट करने वाली संस्था मौजूद नहीं है|बता दे समय-समय पर डिजिटल मीडिया पर कुछ अराजक तत्वों द्वारा हिंसा भड़काने या किसी को बदनाम करने संबंधी गलत खबरें भी प्रकाशित की जाती रही है| डिजिटल मीडिया के लिए कोई कानून ना होने के चलते उन पर आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अन्य मामलों में कार्रवाई की जाती रही है|

  • अब सरकार ने डिजिटल मीडिया का नियमन करने के लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय के तहत लाने का कदम उठाया है, मंत्रालय ने अदालत को एक केस में बताया था कि डिजिटल मीडिया के नियमन की जरूरत है|
फोटो- i&b
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