केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए तीनों कृषि कानून पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाकर, 4 सदस्यों की कमेटी का गठन किया है जो कि एक न्यायिक प्रक्रिया के रूप में कार्य करते हुए सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी|वहीं किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के किसान कानून पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वह चार सदस्यों की कमेटी नहीं बल्कि पूरे मामले का हल चाहते हैं जब तक कानून वापस नहीं होगे, तब तक घर वापसी नहीं की जाएगे| वहीं अधिकतर किसान संगठनों ने बताया कि एमएसपी से नीचे कोई उपज नहीं बिकेगी, इस पर सरकार कानून बनाए जिसके बाद अन्य मामलों पर बातचीत होगी|

जब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर कानून नहीं बनेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा किसान संगठन

भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने कहा- सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के प्रति जो सकारात्मक रुख दिखाया है। उसके लिये हम आभार व्यक्त करते हैं।
किसानों की मांग कानून को रद्द करने व न्यूनतम समर्थन मूल्य का कानून बनाने की है। जब तक यह मांग पूरी नही होती तब तक आंदोलन जारी रहेगा।”

सरकार ने जबरन किसान आंदोलन को हटाने की कोशिश की तो मारे जा सकते हैं 10000 लोग

वही राकेश टिकैत ने सरकार द्वारा जबरन आंदोलन को हटाने की कोशिश किए जाने की आशंका जताते हुए बताया कि अगर सरकार ने जबरन किसानों को हटाने की कोशिश की तो भारी हिंसा हो सकती है यानी इसमें करीब 10000 लोग मारे जा सकते हैं।

हमने कल ही कहा थाकि हम ऐसी किसी समिति के समक्ष उपस्थित नहीं होंगे। हमारा आंदोलन हमेशा की तरह आगे बढ़ेगा। इस समिति के सभी सदस्य सरकार समर्थक हैं ,और सरकार के कानूनों को सही ठहरा रहे हैं

बलबीर सिंह राजेवाल, भारतीय किसान यूनियन (आर)

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एक तरफ किसान संगठनों को राहत की सांस मिली है तो दूसरी तरफ केंद्र में बैठी मोदी सरकार को झटका लगा है फिलहाल इससे दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत मान कर चल रहे हैं इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी जोर-शोर से जारी है कई किसान संगठन सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी की गई कमेटी के सदस्यों पर सवालिया निशान उठा रहे हैं

उनका कहना है इनमें उन लोगों को शामिल किया गया है जो कि पहले से ही कृषि कानूनों का समर्थन कर रहे थे ऐसे में उनके निष्पक्ष फैसला किए जाने की उम्मीद नहीं है। किसान संगठनों द्वारा लगातार कहां जा रहा है कि कमेटी के सदस्य सरकार के पैरोकार है किसान संगठनों से उनका कोई लेना देना नहीं है सरकार को कमेटी पर पुनर्विचार कर निष्पक्ष व्यक्तियों को शामिल करना चाहिए हालांकि किसान संगठनों के अधिकतर प्रवक्ताओं द्वारा कहा जा रहा है कमेटी कोई जरूरत नहीं है जब तक सरकार पुनः कानून को वापस नहीं ले लेती है सुप्रीम कोर्ट उसे रद्द नहीं कर देता तब तक वह वापस नहीं होंगे वहीं सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले में जल्द से जल्द शांतिपूर्ण हल के लिए प्रयासरत होते हुए न्यायिक प्रक्रिया को देख सभी पक्षों को संतुष्ट कराने की कोशिश कर रहा है।

Vishal Gupta

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