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मृतक किसान की संकेतिक तस्वीर

दिल्ली के सिंधु बॉर्डर पर तीनों कृषि कानूनों को वापस कराने के लिए धरने पर बैठे पंजाब स्थित फतेहगढ़ साहिब जिले के 40 वर्षीय किसान अमरिंदर सिंह ने जहर खाकर जान दी। कृषि बिल का विरोध करते-करते वह देश के लिए शहीद हो गये| तीनों कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठन व सरकार दोनों अपने अड़ियल रुख पर अड़े हुए हैं

कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन लगातार 46वें दिन जारी है इस बीच एक-एक कर ठंड व कुदरत के कहर से किसानों की मौत हो रही है दूसरी तरफ सरकार कि असंवेदनशीलता से परेशान किसानों की आत्महत्या रुकने का नाम नहीं ले रही है| इस बीच सरकार व कृषि संगठनों के बीच 8वीं बार बातचीत बेनतीजा रही| अब अगली बैठक 15 जनवरी को होनी है अब तक सभी 8 बैठकों से कोई हल नहीं निकला है| किसान संगठन सरकार से तीनों के कृषि कानून वापस लेने की मांग पर अड़े है तो दूसरी तरफ सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस न करने की बात को साफ करते हुए उसी बात पर अड़ी हुई है फिर हाल सरकार द्वारा कहा जा रहा है कि जिस किसी कानून में कुछ आपत्ति है तो उसे वह संशोधित करने के लिए तैयार है लेकिन किसानों द्वारा पूरे के पूरे तीनो कानूनों को किसान विरोधी बताकर खारिज करने की मांग लगातार जारी है|

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दिल्ली हरियाणा के सिंधु बॉर्डर पर पंजाब स्थित फतेहगढ़ साहिब जिले के 42 वर्षीय किसान ने सरकार की असंवेदनशीलता से परेशान होकर जहर खा खुदकुशी कर ली| शनिवार की देर शाम अमरिंदर सिंह नाम के किसान के सल्फास खाने की खबर सामने आई जिसके बाद किसानों द्वारा तत्काल उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया| जहां उन्हें बचाया नहीं जा सका| किसान ने देव शाम को सिंधु बॉर्डर के मुख्य स्टेज के पीछे जाकर सल्फास खाया और मौजूदा पंडाल के पास आकर गिर गया मौके पर आए किसानों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका शाम करीब 7:00 बजे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया|

46 दिन से दिल्ली के सिंधु बॉर्डर पर कड़ाके की ठंड के बीच बैठे किसान केंद्र सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की लगातार मांग कर रहे हैं इस बीच ठंड बारिश व कुदरत के कहर से दो-चार होने के बावजूद किसान संगठनों को देशभर से भारी समर्थन मिल रहा है उनके उत्साह में किसी भी प्रकार की कमी होती हुई नहीं दिख रही है| अब तक कुदरत का कहर व सरकार की बेरुखी से 50 से ज्यादा किसान शहीद हो चुके हैं लेकिन इस मामले पर बैठक में तारीखों पर तारीख को छोड़कर सरकार का कोई भी संवेदनशीलता भरा कदम उड़ता हुआ नहीं दिख रहा है क्योंकि सरकार लगातार अड़ियल रुख पर अड़ी हुई है अगर इस समय सरकार कोई संवेदनशीलता भरा कदम उठा ले तो अन्नदाताओं की जान बचाई जा सकती है लेकिन किसान संगठन लगातार सरकार को अडानी अंबानी के हाथों की कठपुतली बन अड़ियल रुख अपनाए होने का आरोप लगा रहे हैं बातचीत में किसान संगठनों ने बताया कि वह अपनी अंतिम सांस तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए सरकार से कृषि कानून को वापस कराने की मांग नहीं छोड़ेंगे और इन काले कानूनों को वापस करा कर ही वापस घर को जाएंगे| आंदोलनकारी किसानों ने बताया कि सड़क पर विपरीत परिस्थितियों के बीच किस प्रकार वो डटे हुए इसका अंदाजा (एहसास) उस सरकार को नहीं हो सकता जिस के अधिकारी व मंत्री तमाम सुख-सुविधाओं के बीच पांच सितारा होटलों के कमरों में बैठक कर बातें बनाते हैं अगर वह इस कड़ाके की ठंड के बीच आए तो उन्हें किसानों की इस दुर्दशा का कुछ अनुमान हो | कुछ म्यूजिक डियर संगठनों द्वारा लगातार उन्हें खालिस्तान का समर्थक बताएं जाने पर उन्होंने मीडिया को भी आड़े हाथों लेते हुए बताया कि कुछ मीडिया संगठन गोदी मीडिया बनकर किसानों की कवरेज को प्रभावित कर उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर किसानों की आवाज दबाने की कोशिश कर रहे हैं| बातचीत में किसानों ने बताया इन विषम परिस्थितियों के बीच खेती-बाड़ी को छोड़कर वह लगातार देश के भविष्य के लिए कानून रद्द कराने के लिए बैठे हैं ताकि देश के किसी भी किसान को कारपोरेट के हाथों का गुलाम न बनने दिया जाए लेकिन सरकार फायदा बता कर जबरन उनके ऊपर जबरन यह कानून थोपने की कोशिश कर रही है जो कि तानाशाही है|

राजस्थान बीजेपी का किसानों पर आपत्तिजनक बयान, किसानों को उग्रवादी बताने के साथ, बर्ड फ्लू फैलाने की साजिश रचने का आरोप लगाया

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इस बीच राजस्थान के बीजेपी विधायक मदन दिलावर ने विवादित बयान देते हुए किसानों पर बर्ड फ्लू फैलाने के साथ उग्रवादी होने के आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को देश की चिंता नहीं है किसान प्रदर्शन स्थल पर मुर्गे-मुर्गियों का मांस और बिरयानी खाकर बर्ड फ्लू फैलाने की साजिश कर रहे हैं|

VK GUPTA VISHAL की रिपोर्ट

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