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नए कृषि कानूनों का विरोध कर लोकतांत्रिक तरीके से राजधानी दिल्ली को घेरकर विरोध दर्ज करा रहे किसान संगठनों ने सरकार से दो वार्ताएं असफल होने के बाद आज (5 दिसंबर) तीसरी बार दिल्ली के विज्ञान भवन में वार्ता से पहले सरकार से सभी तीनों कृषि कानून को वापस लेने की मांग करते हुए 8 दिसंबर को भारत बंद करने का ऐलान किया है। दूसरी तरफ कुछ मीडिया संगठन किसानों के आंदोलन को खालिस्तानी व देश विरोधी ताकतों का एजेंडा बताकर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, हो सकता उनकी बात में कुछ सच्चाई भी हो, लेकिन बिना पुख्ता सबूतों के किसी भी आंदोलन को केवल सरकार के एजेंडा के तौर पर बदनाम करने की कोशिश (कुछ मीडिया) संगठनों रिपोर्टिंग का संज्ञान लेते हुए पत्रकारों के संगठन एडिटर गिल्ड ऑफ इंडिया ने संज्ञान लेते हुए मीडिया संगठनों को सबूतों के साथ निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने की याद दिलाते हुए लेटर लिखाकर सुझाव दिया है।रिपोर्टिंग को आधार बनाकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा कि राजधानी दिल्ली में किसानों के आंदोलन का कवरेज करते समय बिना किसी सबूतों के कुछ मीडिया संगठनों द्वारा इस आंदोलन को खालिस्तान व देश विरोधी ताकतों से जोड़कर असंवैधानिक आंदोलन करार देने की कोशिश की जा रही है। पत्रकारिता की नैतिकता के विरोध में ऐसी पत्रकारिता को लेकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे पत्रकारिता की साख प्रभावित हो सकती है। वही संगठन ने याद दिलाए कि (media) के सभी माध्यमों को समाचारों का संकलन कर विश्लेषण करने का अधिकार है ऐसा करते समय निष्पक्षता वस्तुनिष्ठता व संतुलन बनाए रखने का ध्यान रहे ताकि प्रतिरोध के संवैधानिक अधिकार का उपयोग करने वाले किसान आंदोलन सहित किसी भी संगठन को पक्षपात की शिकायत करने का मौका ना मिले, वही एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने परामर्श देते हुए कहा कि रिपोर्टिंग के दौरान वेशभूषा जातीयता आदि के आधार पर किसी को नीचा दिखाने वाले कथन से मीडिया को बचना चाहिए।मीडिया के रवैया के चलते कई जगह पर कुछ मीडिया संगठनों को किसानों का विरोध झेलना पड़ा। यहां तक कि किसानों ने इन मीडिया को बाइट देने व उनकी कवरेज का लगातार विरोध भी किया है।https://vshindinews.com/wp-content/uploads/2020/11/twitter_20201129_230923.mp4मीडिया को याद रखना चाहिए कि उनका काम समाज से सूचनाओं का संकलन कर निष्पक्ष तरीके से जनता के मध्य से सूचनाओं को लेकर उच्च अधिकारियों प्रशासन को अवगत कराते हुए फिर जनता को अवगत कराना है जिससे किसानों व नीचे के तबकों के मुद्दों का हल आसानी से निकल सकें। जमीनी स्तर के मुद्दों से सरकार से अवगत करते रहे ताकि उन्हें योजना बनाने विश्लेषण करने अराजक तत्व पर कार्यवाही कर न्याय दिलाने में आसानी रहे, क्योंकि जनता का शासन जनता के द्वारा जनता के लिए होता है। हर प्रशासनिक अधिकारी एक समय के लिए किराएदार है उसका प्रथम कर्तव्य जनता की सेवा करते हुए उसे जो अधिकार मिले हैं उनके तहत उनके मुद्दों का हल निकाल कर उन्हें जल्द से जल्द न्याय दिलाना है। जो प्रशासनिक राजनीतिक या सरकारी कर्मचारी जो पद से गद्दारी करते हुए किसी भी तरीके की सूचना को छुपा कर चलता को शोषण करने की कोशिश कर रहे हो उनके हर छिपे हुए कारनामों को जनता के सामने लकर उजागर करना मीडिया का प्रमुख कर्तव्य है। पत्रकार ने कहा था- “जो सूचना छिपाई जा रही है वहीं खबर है शेष विज्ञापन”

आम आदमी (सरदार) के भेष में किसानों की हो रही जासूसी का पत्रकर श्याम मीरा सिंह ने दावा किया

मीडिया सूचनाओं को बड़े स्तर पर ऊपर से नीचे तक पहुंचाने का माध्यम है”

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