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सरकार व किसानों के बीच पांचवें दौर की बातचीत बे-नतीजा खत्म होने के बाद यह बात साफ हो गई है कि किसानों का संघर्ष फिलहाल जारी रहेगा। एक तरफ किसान नेता अपनी मांगों पर अड़े है कि इन नए कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए केंद्र संसद का विशेष सत्र बुलाए, उनका कहना है कि वे नए कानूनों में संशोधन नहीं चाहते बल्कि वे चाहते हैं कि इन सभी कानूनों को निरस्त किया जाए, दूसरी तरफ कृषि कानूनों के विरोध में मोदी सरकार के 6 साल के कार्यकाल में पहली बार 10 दिनों तक अपनी मांगों के लिए किसान राजधानी की सड़कों का घेराव करने पर मजबूर है 5 बार की वार्ताएं असफल होने के बाद भी किसानों को लगातार चारों तरफ से भारी जन समर्थन मिलने की वजह से उनके हौसले बुलंद है, जिसकी वजह से टिकरी बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है सरकार से जारी वार्ता विफल होने के बाद अगली वार्ता 9 दिसंबर को होनी है उससे पहले किसानों ने भारत बंद का ऐलान किया है प्रदर्शनकारियों के मुताबिक सरकार बार-बार तारीख पर तारीख देकर समय को टाल मुद्दे को भटकाना चाहती है सभी संगठनों ने एकमत होकर फैसला किया है कि यह बातचीत आखरी होगी।

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5 दिसंबर को पांचवें दौर की बातचीत के बावजूद नए कृषि कानूनों को लेकर किसान व सरकार के बीच तनतनी बढ़ती जा रही है किसान तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं

जबकी सरकार ने तीनों कानूनों को किसानों के लिए फायदेमंद बताते हुए इसे वापस लेने से इंकार कर दिया है। सरकार के मुताबिक सरकार किसानों से बातचीत के बाद कुछ बिन्दुओं पर संशोधन के लिए तैयार है।

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दूसरी तरफ किसान संगठनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद के साथ आंदोलन को और अधिक कड़े किए जाने के संकेत दिए हैं

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9 दिसंबर को एक बार फिर से छठे दौर की बातचीत के लिए किसान संगठन व सरकार दिल्ली के विज्ञान भवन में फिर आमने-सामने होंगे।

  • हमने पहले भी कहा है कि MSP जारी रहेगी. MSP पर किसी भी प्रकार का खतरा और इस पर शंका करना बेबुनियाद है अगर फिर भी किसी के मन में शंका है तो सरकार उसका समाधान करने के लिए पूरी तरह तैयार है: केंद्रीय कृषि मंत्री
  • पीएम मोदी की सरकार किसानों के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध थी, है और आगे भी रहेगी: केंद्रीय कृषि मंत्री
  • पीएम मोदी की 6 साल की सरकार में कृषि के लिए नई योजनाएं बनी हैं, कृषि बजट, एमएसपी और सरकारी खरीद में वृद्धि हुई है: केंद्रीय कृषि मंत्री
  • मैं किसानों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि मोदी सरकार आपके लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी ऐसा ही रहेगा। पीएम मोदी के नेतृत्व में कई कृषि योजनाओं को लागू किया गया है। बजट और MSP में भी वृद्धि हुई है।

  • APMC राज्य का एक्ट है. राज्य की मंडी को किसी भी तरह से प्रभावित करने का न हमारा इरादा है और न ही कानूनी रूप से वो प्रभावित होती है. इसे और मज़बूत करने के लिए सरकार तैयार है. अगर इस बारे में किसी को कोई गलतफहमी है तो सरकार समाधान के लिए तैयार है केंद्रीय कृषि मंत्री

किसान संगठन व सरकार के बीच पांचवी बैठक में कोई हल नहीं निकला, अगली बैठक 9 दिसंबर बुधवार को निश्चित की गई, उससे पहले किसानों ने मंगलवार को भारत बंद का आवाहन किया है

किसानों के मुताबिक सरकार के रुख से नहीं लगता है कि कोई नतीजा जल्दी निकल पाएगा, किसानों ने सरकार से पुनः अपील की है कि वह नये कृषि संशोधन कानून को तत्काल वापस ले। किसानों के लिए यह काला कानून हैं इससे केवल कारपोरेट हाउसों को फायदा होगा, किसानों ने कहा हम इस कानून को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। हालांकि सरकार संशोधन पर राजी है, लेकिन किसानों ने संशोधन की बातों को ठुकराते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है, देश भर के किसान संगठनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का आवाहन करते हुए किसानों से बड़ी संख्या में जुड़ने के लिए अपील की है जिसका असर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लेकर जमीनी स्तर पर भी दिखने लगा है। किसान संगठनों ने निश्चित कर दिया है कि पिछली दो बेनतीजा बैठकों में कानून वापस लेने वाली उनकी मांग मे वह पुनर्विचार नहीं करेंगे, वह केवल कृषि विरोधी कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए भारत बंद का आवाहन कर रहे हैं, अगर सरकार फिर भी नहीं जागी तो आगे रणनीति के अनुसार कड़े कदम उठाए जाएंगे, किसान संगठनों ने बताया हमारा मकसद देश के आम नागरिकों को परेशान करना कदापि नहीं है लेकिन सरकार द्वारा उनके अधिकारों का हनन कर उन्हें अपनी ही जमीन पर गुलाम बनाने की कोशिश की जा रही है, जिसका विरोध लोकतांत्रिक तरीके से कर वह कानून को रद्द कराने की मांग कर रहे हैं। और जब तक नये कृषि कानून रद्द नहीं होंगे। वह इसी तरह सड़कों पर डटे रहेंगे।

भारतीय किसान यूनियन के नेता हरविंदर सिंह लखोवाल ने कहा हम पूरे देश को भारत बंद के लिए सड़कों पर उतरने के लिए आमंत्रित करते हैं, किसान संगठन मंगलवार यानी कि 8 दिसंबर को राजधानी दिल्ली जाने वाली सभी सड़कों पर धरना प्रदर्शन के साथ टोल प्लाजा पर कब्जा करने की बात कर रहे हैं उनका कहना है वह सभी कानूनों को तत्काल वापस कराना चाहते हैं, क्योंकि इन कानूनों से किसानों का कोई हित नहीं उल्टे उन्हें उनकी जमीन पर गुलाम बनाया जा सकता है

उन्होंने कहा इन काले कानूनों से केवल उद्योगपतियों का फायदा होगा इसलिए किसान हित में वह सरकार से मांग करते हैं कि तत्कालीन काले कानूनों को वापस ले, जब किसानों से पूछा गया कि सरकार कह रही है कि यह कानून किसानों के लिए फायदेमंद है केवल उन्हें भ्रमित किया जा रहा है?जवाब में किसानों ने सरकार से कहा कि हम किसानों को यह कानून नुकसान देह नजर आ रहा है हम सरकार से नहीं चाहते कि वह हमारा फायदा कराने वाले इस कानून को बनाए रखें हम चाहते हैं हमें पहले जैसी व्यवस्था मिले सरकार तत्काल इस कानून को रद्द कर दे।

Video credit- DD NEWS

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