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(हरियाणा पंजाब उत्तर प्रदेश देश के कई हिस्सों के कई संगठनों ने तीनों कृषि कानून के विरोध में प्रधानमंत्री का पुतला दहन करते हुए अजय मिश्र उर्फ टेनी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की है)

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लखनऊ तीनों काले कृषि कानून को वापस न लेने के विरोध व लखीमपुर खीरी में बेदर्दी से किसानों को बीजेपी के केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे द्वारा थार गाड़ी से कुचलने की घटना के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले रावण के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया गया। भारतीय किसान यूनियन द्वारा पहले दशहरे के दिन यानी 15 अक्टूबर को रावण के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले का दहन प्रोग्राम रखा गया था। लेकिन किसान यूनियन के मुख्य मंच के पास पंजाब के तरनतारन के रहने वाले लखविंदर की निहंगो ने निर्मम हत्या कर शव को लटका दिया था।

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जिसके बाद किसान संयुक्त मोर्चा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतला दहन प्रोग्राम को 15 अक्टूबर के बजाय 16 अक्टूबर को स्थगित किया था।

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जिसके बाद राजधानी लखनऊ समेत हरियाणा पंजाब उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में रावण के बजाय किसान यूनियन के नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीनों कृषि कानूनी व लखीमपुर घटना कांड के बावजूद केंद्रीय मंत्री को बर्खास्त न करते के चलते विलन मानते हुए रावण के बजाय उनका पुतला दहन किया गया है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है यहां शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले व्यक्ति यानी हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने की लोकतांत्रिक आजादी है प्रधानमंत्री हो या मुख्यमंत्री हर राजनेता केवल 5 सालों के लिए कुर्सी का किराएदार है हर नौकरशाह जब तक संविधान व कानूनों का पालन करता है तभी तक वह अपने पद पर संवैधानिक तरीके से बना रह सकता है। भारतीय संविधान व कानूनों का उल्लंघन करने पर वह भी अपराधी की श्रेणी में आता है। नैतिकता के नाते उसे तत्काल अपने पद को तब तक के लिए त्याग देना चाहिए जब तक वह बरी नहीं हो जाता हैं। रही बात लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने की तो किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाना लोकतंत्र पर सीधा हमला है।

लखनऊ के गोसाईगंज में भारतीय किसान यूनियन ने तीनों कृषि कानूनों के विरोध में किया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन

भारतीय किसान यूनियन के बैनर के तले राजधानी लखनऊ के गोसाईगंज में भारतीय किसान यूनियन के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने लगभग डेढ़ सौ कि शांतिपूर्ण भीड़ के साथ तीनों कृषि कानूनों को वापस न लेने आंदोलनकारी किसानों पर लखीमपुर खीरी में थार गाड़ी चलाकर उनकी निर्मम हत्या के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन करते हुए विरोध तीनों कृषि कानूनों का विरोध कर रोष प्रकट किया। (पूरे कार्यक्रम के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति बरकरार रही किसी भी प्रकार की हिंसा व शांति भंग होने की कोई जानकारी नहीं है)

किसानों ने बातचीत में कहा 9 महीने से हमारे साथी लोकतांत्रिक तरीके से धरने पर बैठे हुए हैं। उद्योग पतियों को फायदा पहुंचाने वाले तीनों काले कृषि कानूनों को सरकार वापस लेने के बजाय किसानों को दबाने की कोशिश कर रही है किसानों ने बातचीत में बताया कि हाल ही में लखीमपुर खीरी में अजय मिश्रा उर्फ टेनी के प्रोग्राम का विरोध कर रहे किसानों को उनके बेटे द्वारा थार गाड़ी से कुचल दिया गया। मामले में अजय मिश्रा टेनी के बेटे समेत कई पर 302 हत्या कि संगीन धाराएं लगने के बावजूद उनके पिता नरेंद्र मोदी सरकार की केंद्रीय मंत्रिमंडल में गृह राज्य मंत्री के पद पर मौजूद है।

ऐसे में निष्पक्ष तरीके से कोई भी जांच नहीं हो सकती किसानों के अधिकारों का हनन करने के चलते उन लोगों ने विरोध के अधिकार के तहत लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर रोष प्रकट करते हुए अजय मिश्रा उर्फ टेनी को केंद्रीय मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने के साथ सरकार से तीनों कृषि के काले कानूनों को वापस करने की मांग की है।

तीनों काले कृषि कानूनों व लखीमपुर खीरी हत्याकांड के विरोध में प्रधानमंत्री का पुतल दहन, 9 किसान यूनियन के कार्यकर्ता गिरफ्तार

गोसाईगंज भारतीय किसान यूनियन के डेढ़ सौ से अधिक कार्यकर्ताओं ने दशहरा के दूसरे दिन यानी 16 अक्टूबर की सुबह शांतिपूर्ण तरीके से तीनों कृषि कानूनों के साथ लखीमपुर खीरी में किसानों की निर्मम हत्या का विरोध करते हुए रोष प्रकट कर बीजेपी के गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर किसान यूनियन का झंडा फहराया। जिसके बाद गोसाईगंज पुलिस ने शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे किसान यूनियन के 9 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर 151 में चालान कर जेल भेजने की कार्रवाई की है। लखनऊ पुलिस से जब हमने इस बारे में ट्वीट कर जवाब मांगा तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है लेकिन किसान यूनियन के नेताओं ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि पुलिस ने उनके लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाते हुए किसान यूनियन के कार्यकर्ता मनीष पटेल उर्फ काका, किशोरी लाल पटेल समेत 9 को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहे है।

शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों की गिरफ्तारी से किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश, कार्यकर्ताओं ने कहा सरकार ने जल्द नेताओं को रिहा नहीं किया तो किसान यूनियन के कार्यकर्ता रात में ही विरोध स्वरूप गांधी प्रतिमा का घेराव करेंगे।

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लोकतांत्रिक देश में हर किसी को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का अधिकार

भारत एक संविधान से चलने वाला लोकतांत्रिक गणराज्य है अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद 26 जनवरी 1950 को लागू किए गए हमारे संविधान में हर व्यक्ति को वाक् अभिव्यक्ति, लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने का अधिकार, संगठन बनाकर हर गलत कार्य का विरोध करने का अधिकार के साथ हर नागरिक को लोकतांत्रिक अधिकार दिया है जिसके तहत हर व्यक्ति देश के किसी भी शासक सत्ताधारी नौकरशाह या प्रशासन द्वारा किए जा रहे अनैतिक किया जो देश के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले हैं उनका विरोध करने का अधिकार भारत के आम नागरिक को भारतीय संविधान प्राप्त करता है। लेकिन समय-समय पर भारत की सरकारों द्वारा नागरिक के स्वतंत्र अधिकारों पर कुठाराघात किया जाता रहा है। इमरजेंसी सबसे बड़ा उदाहरण है। भारतीय संविधान द्वारा प्राप्त अधिकारों के तहत किसानों ने भारत सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानूनों को किसानों के हितों पर कुठाराघात इनके के लिए नुकसानदायक मानते हुए 9 माह से अधिक समय से आंदोलनरत है। साम दाम दंड भेद तमाम तरीके से किसानों के आंदोलनों को बदनाम करने दबाने की कोशिश की जाती रही है। लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से हो रहे आंदोलनों को कुचल कर सरकार व प्रशासन क्या साबित करना चाहती है ?

विशाल गुप्ता की रिपोर्ट….

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