लखनऊ- बिना जानकारी के मकान व प्लाट खरीदने पर बहुत बुरी तरीके से फंस सकते हैं आप, राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के बड़े-बड़े जिलों में बड़ी तेजी से प्रॉपर्टी में बड़ा खेल चल रहा है इसमें थोड़ी-सी असावधानी आपको भविष्य के घर के सपने से दूर कर सकती है। लखनऊ में आवास विकास परिषद ने लखनऊ के 33 बिल्डरों को डिफाल्टर घोषित किया है।

आवास विकास के नोटिस के मुताबिक आवास विकास का 360 करोड 55 लाख रुपए इन बिल्डरों के पास फस गया है। आवास विकास में पूर्व में ही सभी 33 बिल्डरों को नोटिस भिजवा चुका है अब इनके खिलाफ आरसी जानी वसूली प्रमाण पत्र आवास विकास जारी करेगा।

आप अगर राजधानी के इन बिल्डरों के क्षेत्र में अपने सपनों का घर या प्लाट खरीद रहे तो अच्छी तरीके से जांच परख कर ही खरीदें, पता कर ले कहीं यह बिल्डर डिफाल्टर तो नहीं है- अन्यथा आप बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं।

बता दे आवास विकास परिषद ने इन 33 डिफाल्टर बिल्डरों को पहले ही नोटिस जारी किया था इनमें से अधिकतर प्रॉपर्टी डीलर व बिल्डरों को परिषद ने वृंदावन योजना के तहत बड़ी संख्या में नीलामी के जरिए प्लॉट बेचे हैं। इस पर मकान बना कर प्रॉपर्टी डीलर व बिल्डर लोगों को मकान बनाकर बेच रहे हैं लेकिन आवास विकास परिषद को उनके प्लाट का पैसा नहीं दे रहे हैं। अब परिषद ने कई नोटिस जारी करने के बाद वसूली का मन बनाते हुए डिफाल्टर बिल्डरों से बकाया रकम के लिए आरसी जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

आवास विकास ने बिल्डरों के बारे में लोगों को आगाह करते हुए कहा है आवास विकास से बिना जानकारी लिए इन बिल्डरों की योजनाओं में संपत्ति ना खरीदें, अगर इनसे संपत्ति आगर ली तो आगे आपको दिक्कत हो सकती है यानी इन में रहने वाले लोगों से भी आवास विकास परिषद भू-राजस्व के बकाए की वसूली कर सकता है।

आवास विकास उपायुक्त की अपील बिना परिषद की जानकारी के ना खरीदें इन योजनाओं में मकान अन्यथा आपसे हो सकती है वसूली

आवास विकास के उप आयुक्त डॉ अनिल कुमार ने कहा कि लोग इन बिल्डरों की योजनाओं में बिना परिषद की जानकारी के अब संपत्ति ना खरीदें क्योंकि इससे उन्हें आगे बड़ी दिक्कतें आ सकती है इन में रहने वाले लोगों से राजस्व की बकाया वसूली की जाएगी। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने अपनी वृंदावन योजना में बड़ी संख्या में इन प्रॉपर्टी डीलरों व बिल्डरों को नीलामी से प्लॉट बेचे हैं। जिनमें से 33 बिल्डर डिफाल्टर हो गए है।

आवास विकास ने नोटिस जारी करते हुए जानकारी दी है इन 33 बिल्डरों व प्रॉपर्टी डीलर को जिनमें ( Amba housing Industries Private Limited अंबा हाउसिंग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, बसेरा सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, deserve Builders and Developers Limited डीजर्व बिल्डर्स एंड डेवलपर्स लिमिटेड, संजर बिल्डर्स एंड कंस्ट्रक्शन, रूद्र रियल एस्टेट लिमिटेड, VN Infratech Private Limited वीएन इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड, Shri Shreya Jain and Shri Hari realtrack Private Limited श्री श्रेया जैन एंड श्री हरि रीयलटेक प्राइवेट लिमिटेड, Radhe Krishna techno build राधे कृष्ण टेक्नोबिल्ड, सूरत इंफ्राटेक शिवांश इंफ्राटेक, डायरेक्टर मंगलम बिल्डर्स एंड प्रमोटर्स, अजेय गईइ प्राइवेट लिमिटेड, शिव शंकर, हरविंदर सिंह नरूला, रूद्र रियल एस्टेट लिमिटेड, डायमंड इंफ्रा प्रमोटर्स, मधु अग्रवाल, विद्यासागर, नीना सिंह, अखिल इंपैक्स लिमिटेड, सत्येंद्र कुमार गौतम, साधना चौधरी, पीएसीएल इंडिया लिमिटेड, पीएसीएल इंडिया लिमिटेड, कैलाश यादव, अंगराज सिविल प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, सुनीता सिंह, अंबा हाउसिंग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, पंकज कुमार अग्रवाल, प्रतिष्ठा इंफ्रावेंचर प्राइवेट लिमिटेड, राधे श्याम, प्रकाश, विकास वर्मा, तथा सरिता शामिल हैं) जिन्हें बकाया रकम न चुकाने की वजह से डिफाल्टर घोषित किया गया है ।

बड़ी संख्या में चल रहा अधिकारियों की मिलीभगत से कृषि योग्य जमीन को अवैध तरीके से कमर्शियल बना, सरकारी राजस्व को चपत पहुंचाने का काम

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत बड़े शहरों में छोटे-बड़े प्रॉपर्टी डीलर बिल्डर झाड़ियों की तरह उग आए हैं जो कृषि योग्य जमीन को साम दाम दंड भेद से किसानों की मजबूरियों का फायदा उठा (अवने-पवने) यानी कौड़ियों के दाम पर खरीद कर अवैध तरीके से अधिकारियों की मिलीभगत यानी जेम गर्म कर उसे कमर्शियल की तर्ज पर या अवैध तरीके से कमर्शियल करा कर बेचने का काम करते है व कर रहे हैं। कुछ बिल्डर तो सीधे किसान से कमर्शियल जमीन को लेकर बिना कमर्शियल भी बेचने का गोरखधंधा लगातार कर रहे हैं। इनमें ऊपर से नीचे तक अधिकारियों (जिम्मेदारों) की मिलीभगत से सरकार को सैकड़ों करोड़ों का राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है यह खेल स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की व बड़े स्तर पर नेताओं की मिलीभगत से बदस्तूर जारी है इसके राजधानी लखनऊ, नोएडा, वाराणसी, बरेली, बाराबंकी, उन्नाव, कानपुर, गाजियाबाद समेत दर्जनों जिलों में सैकड़ों उदाहरण सामने है।

कृषि योग्य जमीन को अवैध तरीके से कमर्शियल की तर्ज पर बेचकर लगाई जा रही, सरकार को सैकड़ों करोड़ के राजस्व की चपत

राजधानी लखनऊ समेत दर्जनों जिलों में प्रॉपर्टी डीलर व बिल्डरों की मदद से किसानों की कृषि योग्य जमीन को खरीद कर बिना कमर्शियल कराए यानी कि अवैध तरीके से कमर्शियल की तर्ज पर प्लाट काटकर बिक्री का अवैध धंधा लगातार जारी है…… ये अधिकतर जमीन कृषि योग्य है जिसे अवैध तरीके से कमर्शियल की तरह बेचकर सरकार के भारी राजस्व को भारी क्षति पहुंचाने के साथ कृषि योग्य जमीन को भी खत्म कर खाद्यान्न (आनजों) के क्षेत्र में भी क्षति पहुंचाई जा रही है, इन सभी अवैध कामों की जानकारी स्थानीय प्रशासन को यातो नहीं है जिन्हें है भी तो वह इन्हें नजरअंदाज कर अवैध तरीके से साथ दे रहे हैं।

चरम पर है प्रॉपर्टी खरीद फरोख्त में स्टांप चोरी का काम

नोटबंदी से बेशक प्रॉपर्टी डीलिंग के कारोबार में थोड़ी नरमी आई रही हो, लेकिन धीरे-धीरे यह कारोबार बड़ी तेजी से फैलने लगा है, इनमें अधिकतर सर्किल रेट से 2, 4 गुनी कीमत पर जमीनों की जमीनी स्तर पर बिक्री हो रही है। लेकिन अधिकतर की लिखा-पढ़ी यानी खरीद-फरोख्त में लिखी गई (कीमत सर्किल रेट के आसपास बहुत अधिक घटाकर लिखाई जा रही है) जिससे बड़ी संख्या में स्टांप की चोरी होने के साथ ही सरकारी राजस्व को क्षति पहुंच रही है यानी चपत लग रही है।

VS HINDI NEWS टीम के साथ विशाल गुप्ता की रिपोर्ट

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