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मध्य प्रदेश कई दिनों से जारी भारी बारिश के चलते रीवा जिले के थाना गढ़ क्षेत्र के घुचियारी गांव में एक कच्चा मकान बारिश की वजह से ढह गया। जिसके मलबे में एक ही परिवार के आधा दर्जन लोग दब गए स्थानीय लोगों की मदद से इन्हें कुदाल-फावड़े के सहारे मलबे से निकाला गया। मलबे में दबे 35 वर्षीय मनोज पांडेण्य, 60 वर्षीय की उनकी मां कमेली पांडे, दो छोटी बेटी जिनमें 8 वर्षीय काजल व 7 वर्षीया आंचल की दर्दनाक मौत हो गई।

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किसी तरह मलबे में दबी मनोज की पत्नी और बेटी को बचाते हुए गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल ले जाते समय भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा क्योंकि गांव को जोड़ने वाले रास्ते में कीचड़ होने की वजह से यातायात के साधन नहीं पहुंच पाए। फिरहाल दोनों गंभीर स्थिति में अस्पताल में जिंदगी बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं

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सबसे बड़ी बात गांव को जोड़ने वाली सड़क ना होने की वजह से रात बचाव कार्य की टीम मौके पर समय से नहीं पहुंच पाई। इस वजह से गांव वालों ने फावड़े कुदाल के सहारे मलबा हटाकर शव को बाहर निकाला राहत बचाव कार्य समय से ना हो पाने की वजह कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा इस हादसे से चार लोगों की मौत की पुष्टि कलेक्टर इलैया राजा टी ने की है।

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इस दर्दनाक हादसे की जानकारी के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल छा गया लोगों ने प्रशासन को जानकारी देते हुए गुस्सा भी जाहिर किया स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रधान व सेक्रेटरी द्वारा अगर इन्हें प्रधानमंत्री आवास का लाभ दे दिया गया होता तो आज इस हादसे की नौबत ना आती ना चार लोग अपनी जान गवाते। फिलहाल हादसे की जानकारी के बाद खाना पूरी करते हुए स्थानीय प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर उपस्थित होकर फौरी राहत बचाव कार्य के साथ मदद की बात कर रहे हैं। बता दी इनमें से घायल बच्ची को गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है जहां उसकी हालत स्थिर बताई गई है।

हादसे के बाद मकान का सर्वे कर आर्थिक सहायता की घोषणा’

सुबह भरभरा कर गिरा कच्चा मकान, गांव में पहुंच मार्ग के अभाव में हुई असुविधा

गांव वालों ने पूरे मामले में जानकारी देते हुए बताया कि आज यानी रविवार की सुबह सुबह पांडे जी का मकान बारिश के बीच भरभरा कर तेज आवाज करते हुए गिरा जिसके बाद आसपास के लोगों ने देखा की पांडे जी का मकान पूरी तरीके से जमींदोज हो चुका था।

गांव के लोगों ने हड़कंप के साथ फावड़े कुदार से राहत कार्य शुरू कर प्रशासन को जानकारी दी गांव में इतने बड़े हादसे होने की जानकारी के बाद बरसात के बीच गांव में पहुंच मार्ग का अभाव होने के चलते 3 किलोमीटर पैदल चलकर अधिकारियों को पहुंचना पड़ा इतने में राहत बचाव कार्य मैं बड़ी असुविधा हुई अगर समय से राहत बचाव का हो जाता तो शायद कई अन्य लोगों की जान बचाई जा सकती थी लेकिन हमारे देश की इस विकास वाली दशा ने महाविनाश की दशा अख्तियार कर गली कूचे मोहल्ले यह गांव का इस कदर विकास किया है कि यहां पहुंच मार्ग तो छोड़िए जरूरी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं है जमीनी स्तर पर योजनाएं बेशक बनी हो। लेकिन जमीनी स्तर पर लागू कितनी होती है यह सबसे बड़ा सवाल है ?

बता दिया गरीब परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल जाता तो आज तक के मकान में दबने की वजह से दो चार लोगों की मौत हुई तो इस हादसे में मौत की संख्या को घटाया या मौत को टाला जा सकता था। आज भी राजनीति जातिगत समीकरणों से अलग देश के कितने परिवार ऐसी ही मकानों में रहकर अपनी जिंदगी कुछ जोखिम में डाल रहे हैं खैर उनके पास इसके अलावा और कोई चारा भी नहीं है प्रशासन को इस हादसे से सबक लेते हुए ऐसे जोखिम पूर्ण माहौल में रह रहे लोगों का सर्वे कराकर इन्हें तत्काल लाभ देते हुए उनके लिए कुछ करने का समय है।

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