पश्चिम अफ्रीकी देश माली में फिर सियासी संकट गहरा गया है ताजा घटनाक्रम में देश के अंतरिम राष्ट्रपति बीए नदौ प्रधानमंत्री मोक्टर औआने के साथ रक्षा मंत्री सुलेमान डौकौरे को गिरफ्तार कर माली के सैनिकों ने राजधानी बमाको के बाहरी हिस्से के पास काटी सैन्य शिविर ले गए इस दौरान राष्ट्रपति की सुरक्षा में लगे विशेष बल में से किसी ने कोई विरोध नहीं किया जिसके बाद सेन उन्हें अपने साथ लेकर गई।

पश्चिम अफ्रीकी देश माली में पिछले साल की तरह फिर एक बार सैन्य तख्तापलट हुआ है बता दे 8 माह से चल रही सरकार के सामने कई चुनौती थी बीते साल सेना ने तख्तापलट के बाद बीए नदौ जो कि एक रिटायर्ड मिलिट्री अधिकारी को राष्ट्रपति बनाया गया। यहां पर जल्द चुनाव की मांग बढ़ती जा रही है। इसी बीच माली के सैन्य अधिकारियों ने सोमवार को अंतरिम सरकार के अंतरिम राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को हिरासत में लेकर राजधानी के बाहरी हिस्से में स्थित सैन्य ठिकाने पर बंधक बना लिया इस तरह देश में एक बार फिर से राजनीतिक उथल-पुथल पैदा हो गई है।

जानकारी के मुताबिक इस घटना से करीब 2 घंटे पहले सरकार ने कई पदों में बदलाव किया जिनमें से दो सैन्य अधिकारियों को अपना पद गंवाना पड़ा इसी मुख्य कारण को भी तख्तापलट की वजह माना जा रहा है। यह हो सकता है कि पद गंवाने वाले दोनों अधिकारियों का हाथ इस तख्ता पलट में हो, सन 2012 से जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच काती माली के नेताओं के शासनकाल को खत्म करने के लिए साम-दाम-दंड भेद से प्रसिद्ध है। अगस्त 2020 में सैन्य तख्तापलट के बाद राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता और तत्कालीन प्रधानमंत्री बाउबो सिसे को सेना ने उखाड़ फेंका था। अब करीब 8 महीने बाद पश्चिम अफ्रीकी देश माली में सैन्य तख्तापलट के बाद राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल देखने को मिल रहा है। मौजूदा हालात को देखते हुए अमेरिका रूस फ्रांस समेत कई देश माली के हालात पर नजर रखे हुए हैं माली के एक हिस्से पर अलकायदा आतंकवादी संगठन आईएस का कब्जा है।

देश के बड़े हिस्से पर आतंकवादी संगठन अल-कायदा और आईएस का कब्जा

पश्चिम अफ्रीकी देश माली में 2012 से राजनीतिक उठापटक के साथ अस्थिरता लगातार जारी है देश के बड़े हिस्से पर अल कायदा और आईएस का कब्जा है अभी सैन्य तख्तापलट के बाद इस घटना से देश की माली अव्यवस्था की तेज होने के आसार नजर आ रहे हैं फिर हाल माली के एक बड़े हिस्से पर इस्लामिक स्टेट और अलकायदा जैसे आतंकी संगठन ने कब्जा जमा रखा है इस गरीब की मदद के लिए पश्चिमी देश और पड़ोसी देशों ने कई बार इस गरीब देश की मदद करने की कोशिश की। लेकिन इस मुल्क में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच मदद के प्रयास कठिन होते जा रहे हैं क्षेत्र में असुरक्षा पैदा होने की वजह से मदद की राह में कई बड़े रोड़े है। इससे पहले पिछले साल माली की सेना ने राष्ट्रपति कीटा को काती लेकर आई और उन्हें जबरन इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया इससे कुछ समय पहले वर्ष 2012 में हुए एक विद्रोह के बाद अमादौं तौमानी तोरे की सरकार को यहीं पर गिरा दिया गया था तोरे की सरकार गिरने के बाद देश के उत्तरी दो-तिहाई भाग पर कब्जा करने के लिए एक तुआरेग जाति वर्ग का विद्रोह आरंभ हो गया, इस विद्रोह को आतंकवादी संगठन अलकायदा ने अपने हाथों में लेकर बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया तभी से माली के राजनीतिक उथल-पुथल के हालात अब तक जारी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेना के एक पूर्व अधिकारी ने कहा सैन्य तख्तापलट में शामिल लोगों को हटाना प्रशासन की बहुत बड़ी गलती थी उनका सिर्फ एक ही मकसद हो कि वो अपने पद पर वापसी चाहते हो, अभी तक यह मालूम नहीं हुआ है कि आखिर सेना क्या चाहती है ?

बता दे पिछले वर्ष मई राष्ट्रपति को जनता का विरोध झेलना पड़ रहा है उस समय देश की सर्वोच्च अदालत ने विवादित संसदीय चुनाव के परिणामों को नकार दिया था जिसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को हिरासत में लेकर कई सैन्य अधिकारियों को बंदी बना लिया गया था। जिसके बाद सेना ने सड़कों पर उतर कर कमान संभाल ली थी तभी से माली के राजनीतिक हालात बद से बदतर यानी खराब है बता दें कि यहां की प्रशासनिक सेवा में सेना का दखल जारी है।

दुनिया के कई देशों ने इस तख्तापलट की आलोचना करते हुए तत्काल सभी को रिहा करने की मांग की है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here