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मथुरा। चर्चित अखफोड़वा कांड 2015 की गायब हुई पत्रावली एक आरटीआई के तहत पुन: मिली पत्रावली फाइल फिर से मिल गई है। जिसमें कई लोगों की आँखों की रोशनी स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से चली गई थी आपको बताते चलें कि वर्ष 2014,मे 22 नवम्बर को बांके बिहारी कल्याण करोति संस्थान की ओर से स्वास्थ्य विभाग की अनुमित लेकर शिविर आयोजन किया था जिसमें स्वास्थ्य विभाग के नेत्र परिक्षण अधिकारी पीडी गौतम सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कई लोगों की आंखों का ऑपरेशन किया था लेकिन रोशनी आने के बजाय मरीजों की आँखे खराब हो गई थी जिनकी रोशनी पुनः वापस न आ सकी। इस सम्बंध में मान0 न्यायालय मथुरा में अभियोग पंजीकृत हुआ था जिस पर विवेचना अधिकारी ने साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर अंतिम रिपोर्ट लगाव दिया था जिस पर मान0 न्यायालय ने विवेचक थाना हाइवे जनपद मथुरा को और सम्बंधित डॉक्टरों को तलब कर केस डायरी का अपने स्तर से अध्ययन कर विवेचना अधिकारी थाना हाइवे के विरुद्ध एफआईआर के आदेश मान0 न्यायालय ने पारित कर दिए थे। इस अखफोड़वा कांड पर वर्ष 2019 में हरीश शर्मा नामक व्यक्ति ने सूचना का अधिकार के तहत कुछ बिन्दुओं पर सूचना मांगी तो तत्कालीन मुख्यचिकित्सा अधिकारी डॉ0 शेर सिंह ने सम्बंधित आंख फोड़वा कांड की पत्रावलियां गायब होना बताया था जिसकी खबर अनेक प्रमुख समाचार अखबारों में भी प्रकाशित हुई थी। तथा अगस्त 2020 को सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन के पूर्व जिला अध्यक्ष शिवम शुक्ला निवासी जनपद प्रतापगढ़ ने फिर से अखफोड़वा कांड पर आर0टी0आई लगाई तो अखफोड़वा कांड से सम्बंधित पत्रावलियों को उपलब्ध कराने हेतु जन सूचना अधिकारी कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी जनपद मथुरा ने 378 रुपये की मांग की गई ।अब सवाल यह उठता है कि वर्ष 2019 में आंख फोड़वा कांड की पत्रावली कैसे गायब हो गई थी इस सम्बंध में किस अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही तत्कालीन मुख्यचिकित्सा अधिकारी डॉ0 शेर सिंह ने कराई यदि गायब हो गई तो अखफोड़वा कांड से सम्बंधित पत्रावली कहां से मिल पुन: मिल गई ।क्या यह स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की साजिश है कि अखफोड़वा कांड की पत्रावली का गायब होने और फिर से मिलसके।

आरटीआई कार्यकर्ता शिवम द्वारा आरटीआई लगाने के बाद प्रशासन द्वारा फाइल मिलने का भेजा गया पत्र-

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एक रहस्य बना हुआ है इस सम्बंध आरटीआई कार्यकर्ता शिवम शुक्ला ने बताया कि अखफोड़वा कांड की फाइल को पुनःसक्षम फोरम में दाखिल करूंगा जिससे उन गरीब पीड़ितों को न्याय मिल सके तथा कोर्ट को गुमराह करते हुए फाइनल रिपोर्ट लगाए जाने के संबंध में पुन: विचार हेतु सक्षम फोरम जाकर अब फड़वा कांड की फाइल को दाखिल कर लूंगा। जिससे आंख फोड़वा कांड में स्वस्थ विभाग की लापरवाही की वजह से गरीब पीड़ितों की आंख फोड़ दी गई उन पीड़ितों को न्याय मिल सके व लापरवाही के कारण अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई हो सके।

मथुरा के बहुचर्चित आंख फोड़वा कांड कि गायब पत्रावली मांगने हेतु भेजा गया आरटीआई पत्र नीचे संलग्न है-

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क्या है ऑख फोड़वा कांड

उत्तर प्रदेश के मथुरा बांके बिहारी मानव कल्याण करोति संस्था द्वारा जनवरी 2015 ने चंदपुरी धौलीप्याऊ में कैंप लगाकर आगरा मथुरा व राजस्थान से आए लोगों के नेत्र परीक्षण के बाद डॉक्टरों की टीम द्वारा आंखों के ऑपरेशन किए गए जिनमें से 8 मरीजों की आंखों की रोशनी चली गई अर्थात वह दिव्यांग हो गए विभाग द्वारा जांच के तमाम दावे किए गए कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा लेकिन प्रशासन के सभी दावे खोखले साबित हुए पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटकते रहे अप्रैल में जब एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा इस संबंध में अंधता निवारण विभाग के नोडल अधिकारी डॉ पी के गुप्ता से आरटीआई द्वारा प्रश्न पूछे गए तो उन्होंने पत्रावली के संबंध में कोई संतुष्ट करने वाला जवाब नहीं दिया गया उनकी आरटीआई द्वारा पता चला कि संबंधी रिकॉर्ड गायब गया है। अलग-अलग संगठनों द्वारा द्वारा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कोशिश की जाती रही इस कोशिश में आरटीआई कार्यकर्ता शुवम ने आरटीआई प्रेषित की जिसके जवाब में प्रशासन द्वारा पुष्टि की गई थी पत्रावली मिल गई है।

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आरटीआई कार्यकर्ता शिवम शुक्ला की रिपोर्ट

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