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बलरामपुर नकाबपोश बदमाशों ने घर में घुसकर पत्रकार व उसके साथी को पीटने के बाद घर में आग लगाकर जिंदा जलाने के उद्देश्य से भाग निकले पूरे मामले में पुलिस ने 3 लोगों ने को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले की कोतवाली देहात के कलवरी गांव में निर्भीक पत्रकार राकेश सिंह के घर रात 11:30 बजे कुछ नकाबपोश बदमाशों ने घुसकर मारपीट के बाद आग लगा दी। आग की सूचना के बाद सूचना पर पहुंची फायर बिग्रेड की टीम ने जब तक आग पर काबू पाया। तब तक मित्र पिन्टु साहू की जलकर मौत हो गई। जबकि निर्भीक पत्रकार राकेश सिंह 90 फ़ीसदी झुलसने के बाद तड़प रहे थे। पुलिस ने उन्हें तत्काल हॉस्पिटल में भर्ती कराया। जहां से बेहतर इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बलराम से ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर किया। जहां पर उन्होंने दम तोड़ दिया। पत्रकार ने अपने दिए बयान में पुलिस को बताया कि नकाबपोश लोग उनके घर में घुसे थे पहले उन्होंने उनके साथ मारपीट की फिर आग लगाकर जिंदा जलाने का प्रयास किया। शुक्रवार देर रात हुई इस घटना में पत्रकार समेत दो लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। घटना के समय पत्रकार की पत्नी अपनी दो बेटियों के साथ मायके गई हुई थी पूरे मामले में पुलिस तहकीकात कर जल्द से जल्द पूरे मामले का अनावरण करने का दावा कर रही है।

घटनास्थल से पुलिस को कुछ संदिग्ध तथ्य मिले

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शुक्रवार की देर रात निर्भीक पत्रकार व उसके एक निर्भीक साथी पिंटू साहू समेत घर में जिंदा जलाकर हत्या के मामले से उत्तर प्रदेश के पत्रकरों में आक्रोश का माहौल है।

इस हादसे के रहस्य से अभी पर्दा उठना बाकी है फिर हाल पूरे मामले में पुलिस खोजबीन करने में जुटी है सीओ सिटी राधा रमण सिंह के मुताबिक पुलिस तथ्यों के आधार पर छानबीन कर रही है पुलिस अधीक्षक देव रंजन वर्मा ने बताया कि घटनास्थल पर कुछ संदिग्ध निशान मिले हैं जिनके आधार पुलिस जांच कर रही है संदेह के आधार पर 3 लोगों को हिरासत में लेकर उनसे भी पूछताछ की जा रही है

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देव रंजन के मुताबिक पुलिस टीम के साथ सर्विलांस की टीम को लगाया गया है जल्दी ही पूरी घटना की तह तक पहुंचकर खुलासा किया जाएगा इस घटना में पत्रकार को पुलिस तत्काल हॉस्पिटल ले गई। जहां से गंभीर स्थिति के चलते शनिवार को मौत हो गई।

निर्भीक पत्रकारिता की वजह से गई जान, पत्नी

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पूरे मामले की जानकारी के बाद राजनीति से लेकर पुलिस महकमे में हलचल मच गई है, तत्काल पीड़ित को आश्वासन देने पहुंचे बीजेपी के विधायक पलटू राम ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा उच्च अधिकारियों से बात करके घटना की जांच कराई जाएगी। दूसरी तरफ पत्रकार की पत्नी विभा सिंह ने बताया कि निष्पक्ष पत्रकारिता के चलते उनके पति राकेश सिंह की हत्या हुई है उनका आरोप है कि पुलिस इस मामले को उजागर नहीं करना चाहती,

नकाबपोश घर में घुसे, मारपीट के बाद लगाई आग- पत्रकार राकेश सिंह के अंतिम बयान

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति ने घटना की निंदा कर अपराधियों पर कठोर कार्यवाही की मांग की

मामले को लेकर उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने बलरामपुर जिले में पत्रकार राकेश की जलाकर हुई जघन्य हत्या के मामले में सरकार से तत्काल दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए दु:आ जाहिर किया है।

पत्रकार ने जताई थी खुद पर हमला होने की आशंका

हमारे बीच नहीं रहे पत्रकार राकेश सिंह ने कई पत्रकारों की मौजूदगी में डीएम से कहा था कि हम पर हमला हो सकता है लेकिन उसको अनदेखा करते हुए DM ने जवाब दिया था कि अरे आप पर कौन हमला करेगा, पत्रकार ने खुद पर हमला होने की आशंका जाहिर की तब डीएम ने पूरे मामले पर लचर रुक, आखिर क्यों अपनाया?

बता दे हेमंत तिवारी के मुताबिक बलरामपुर जिले में तैनात अधिकारियों की नाक के नीचे काफी समय से पत्रकारों का उत्पीड़न कर उन पर हमले होते रहे हैं सरकार ने भी ऐसे हमलों पर कोई एक्शन नहीं लिया ऐसे हमलों पर जिले में लंबे समय से तैनात जिलाधिकारी ने ना केवल पत्रकार सुरक्षा की मांगों की अनदेखी कि बल्कि कई पत्रकारों पर मुकदमे भी दर्ज करवाएं।

कई पत्रकारों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में पत्रकारिता करना काफी कठिन होता जा रहा है लगातार पत्रकारों पर हमले बढ़ते जा रहे हैं कई जगह पर इन हमलों के लिए प्रशासनिक नीतियां भी जिम्मेदार हैं क्योंकि पत्रकारों पर हुए हमले के बाद उचित कार्रवाई तक नहीं हो रही दूसरी तरफ पत्रकारों पर लगातार हम लोग के बाद झूठे केस दर्ज किए जा रहे हैं ताकि वह निर्भीक पत्रकारिता ना कर सके, कई प्रशासनिक भ्रष्ट अधिकारियों से लेकर गुंडे मवाली बदमाश लगातार पत्रकारों की जान के दुश्मन बने हुए हैं क्योंकि उनकी भ्रष्टाचारी व गुंडागर्दी सामने आने से उन्हें खतरा उत्पन्न हो रहा है। इन्हीं कड़ियों में लगातार पत्रकारों पर जान घाती हमले कर उनकी निर्मम हत्या या निर्भीक आवाज बंद की जा रही है पत्रकार सुरक्षा को लेकर सरकार को तत्काल कड़े कदम उठाने की जरूरत है लेकिन इस क्षेत्र में कड़े कदम तो दूर समय पर कार्रवाई तक भी नहीं हो रही है। दूसरी तरफ कुछ गुंडे मवाली पत्रकारिता के वसूलो की हत्या कर इस पेशे का फायदा उठाकर इसे बदनाम कर रहे हैं। क्षेत्र में भी कानून बनाकर वसूली बाज गुंडे मवाली अपराधी तत्व के लोगो की छटनी कर उन पर शिकंजा कस के असली व नकली पत्रकारों की पहचान की जानी आवश्यक है ताकि इसकी आड़ में धंधे वाजी कर बदनाम करने वालों को पहचाना जा सके।

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