म्यामार यानी बर्मा में चीन के इशारों पर तख्तापलट के बाद जनता का आक्रोश बढ़ता जा रहा है सैन्य तख्तापलट के खिलाफ लोगों ने खुलकर सड़कों पर विद्रोह कर चीन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है यहां चीन द्वारा वित्त पोषित फैक्ट्रियों में आग लगाने से कम से कम 39 लोगों की मौत की खबर है लोगों के बीच चीन को लेकर काफी नाराजगी देखी जा रही है स्थानीय लोग लगातार चीन को इस तख्तापलट के पीछे जिम्मेदार ठहराते हुए नारेबाजी कर रहे हैं।

पत्रकार wai_moe- के ट्विटर से पता चलता है बर्मा के सुरक्षा बलों ने कम से कम 50 लोगों को प्रदर्शन के दौरान मार डाला है। सैन्य तख्तापलट के बाद बर्मा में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं लोग लोकतंत्र वापस लाने के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि सुरक्षा बल प्रदर्शन को दबाने का भरकर प्रयास कर लोकतंत्र का गला घुटने पर आमादा है।

भविष्य को लेकर चिंता ग्रस्त है बर्मा के नागरिक,अपनी ही सेना से छुपकर जंगल में परीक्षा दे रहे बच्चे


Zoya Phan ट्वीट कर लिखा- कोई फर्क नहीं पड़ता कि बर्मी सरकारें हमारे साथ क्या करती हैं, हम हार नहीं मानेंगे। हम अपने अस्तित्व, अपने अधिकारों और अपने भविष्य के लिए संघर्ष करते रहेंगे। करेन राज्य में बर्मी सेना द्वारा हमलों के कारण जंगल में छुपते हुए परीक्षा में बैठे बच्चे।


कम से कम 22 स्कूलों, 108 शिक्षकों और 1,183 छात्रों को हापापुन और नियालुबिन जिलों में बर्मा सेना के हमलों से बचना पड़ा है। इनमें से कई छात्र वन फ़्लोर पर शिफ़्ट क्लासरूम बनाने की अपनी अंतिम परीक्षा पूरी कर रहे हैं।

साभार: करेन टीचर वर्किंग ग्रुप
(Wai_moe के साथ बर्मा के अन्य स्वतंत्र पत्रकारों को क्रेडिट)

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