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नेपाल में संसद भंग होने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट जारी। शराबियों समेत सभी सीमाओं पर कड़ी निगरानी। सभी जिलों में एक साथ प्रदर्शन और झड़प से वहां राजनैतिक अस्थिरता । ओली की पार्टी नेकपा समेत नेपाली कांग्रेस पार्टी, एमाले समेत कई दलों का आंदोलन जारी.

पर्वती देश नेपाल में सियासी उथल-पुथल के बीच (नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड व वर्तमान प्रधानमंत्री ओली द्वारा) एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने के बाद मौजूद ६८ वारसी प्रधान मंत्री के पी शर्मा ओली के अनुशंसा पर नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने रविवार को नेपाली संसद को भंग कर दिया। इसी बीच उन्होंने अगले साल 30 अप्रैल 2021 को पहले चरण का मध्यवर्ती चुनाव व 10 मई को दूसरे चरण के मध्यवर्ती चुनाव का ऐलान कर दिया है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के बीच बिना किसी चर्चा के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली द्वारा उठाए गए इस कदम का उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विपक्षी (नेपाल कांग्रेश के नेता) भी लगातार निंदा कर रहे हैं। उनके पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने आपत्ति जताते हुए इस्तीफा दिया, इनमें ओली सरकार के साथ कैबिनेट मंत्री भी शामिल है। सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के विभिन्न संगठन राजधानी सहित पूरे देश में सड़कों पर उतर आए और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली द्वारा संसद को भंग करने के निर्णय के बाद ओली सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है।

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नेपाल की राष्ट्रपति ने सरकार की सिफारिश पर नेपाली संसद को भंग कर अगले साल 30 अप्रैल और 10 मई को नेपाल में मध्यवर्ती चुनाव कराने की घोषणा की है। राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक राष्ट्रपति ने मंत्रिपरिषद की सिफारिश को अनुच्छेद 70 (1) और 7 के संविधान के 85 के अनुरूप के अनुसार भंग किया है।

आपसी कलह की वजह से कम्युनिस्टों ने खुद कि नेपाली संसद भंग, अपने भी नाराज

नेपाल की सत्ताधारी एनसीपी के दो दलों के बीच आंतरिक कलह निर्वाचित संसद 2017 से जारी थी मौजूदा समय में यह कलह अपने चरम पर पहुंच गई है कई महीनों से नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के दो दलों के बीच टकराव जारी था इस एक धड़े का नेतृत्व 68 वर्ष प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली कर रहे थे जबकि दूसरे धड़े की अगुवाई पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड कर रहे थे मौजूद संसद में सबसे अधिक प्रभाव पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड का ही दिख रहा था विगत 13 नवंबर को यह आंतरिक कला और उस समय बड़ी जब सचिवालय की बैठक में 19 पन्नों के राजनीतिक दस्तावेजों को पेश करते हुए प्रचंड ने होली पर पार्टी बा सरकार को समुचित तरीके से चलाने में विफल रहने के साथ भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए निंदा की थी। प्रचंड के आरोपों के जवाब में प्रधानमंत्री ने ओली ने 38 पन्नों के राजनीतिक दस्तावेज को सौंपकर अपना बचाव किया था तब से लगातार दोनों दलों के बीच तल्ख़ियां देखने को मिली जो धीरे धीरे बढ़ती हुई नेपाल में असमय मध्यवर्ती चुनाव का कारण बनी। चीन के करीबी नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के संसद भंग करने के फैसले के नेपाल के स्थानीय दल कई राजनीतिक कारण भी मान रहे हैं।

वही सत्ताधारी नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के प्रवक्ता नारायण जिस श्रेष्ठ ने होली के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे अलोकतांत्रिक संविधान विरोधी और निरंकुश बताया है उन्होंने कहा है कि सत्ता पक्ष इस मामले पर चर्चा के लिए अपनी स्थानीय समिति की बैठक आयोजित करेगा, सत्ताधारी पार्टी के नेता ओली के फैसले की चर्चा के लिए प्रचंड के निवास पर एकत्रित हुए जिसमें प्रचंड के मीडिया सलाहकार विष्णु सांपकोटा ने कहा कि पार्टी नेताओं ने प्रधानमंत्री ओली के फैसले की वजह से होने वाली समस्या के बारे में आपसी विचार विमर्श किया है। हालांकि इस मामले में ज्यादा कुछ बोलने से बचते हुए नजर आए, समय के साथ नेपाल के दो राजनीतिक दलों के बीच आपसी कलह की पुख्ता वजह भी सामने आएंगी?

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2017 में निर्वाचित प्रतिनिधि सभा नेपाल की संसद के निचले सदन में 275 सदस्य हैं

सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के विभिन्न संगठन राजधानी सहित पूरे देश में सड़कों पर उतर आए और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली द्वारा संसद को भंग करने के निर्णय के बाद सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है।

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