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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह राज्य नालंदा के मानकपुर थाना क्षेत्र के धमकी गांव के रहने वाले नीतीश कुमार नामक युवक 11 नवंबर को अपनी बहन के घर सरबहदी मैं छठ पूजन का प्रसाद देने गए थे इसी दौरान वह वापस अपने घर लौट रहे थे तभी हथियारों से लैस परोहा गांव के हथियारों से लैस कुछ लोगों ने उन्हें बंधक बनाकर रातभर बंधक बनाने के साथ मारपीट करते हुए सुबह उनकी गांव की लड़की के साथ जबरन पकड़वा विवाह करवा दिया अब इस जबरन शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

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दूल्हे ने थाने में तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई

घटना से आहत नालंदा जिले के मानकपुर थाना क्षेत्र के धनुकी गांव के रहने वाले नीतीश कुमार ने पूरे मामले की मानकपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है इस पर थाना अध्यक्ष जितेंद्र कुमार के मुताबिक परोह गांव निवासी संजय यादव और गन्नू यादव सहित तीन अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कर ली गई है। जांच चल रही है पीड़ित युवक खुद को नाबालिग बता रहा है जांच के बाद आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

क्या है पकड़वा विवाह | पकडौ़आ विवाह ?

पकड़वा विवाह या जिसे पकड़ौआ विवाह कहते हैं इसका बिहार में 100 साल से पुराना इतिहास है 80 के दशक में उत्तर बिहार में खासतौर पर बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, मोकामा, जहानाबाद व गया क्षेत्र में ऐसे विवाह बड़ी मात्रा में हुऐ जिसमें शादियों के योग्य लड़की को लड़की वालों द्वारा अपहरण करके जबरदस्ती मारपीट बंधक बनाकर जबरन विवाह करवा देने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही है खास तौर पर संक्षिप्त में लड़की का अपहरण करके जबरन शादी कराने वाले इस विवाह को भी पकड़वा विवाह कहा जाता है अभी हम इसके हाल ही के आंकड़ों पर नजर डालेंगे।

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बता दे पकड़वा विवाह एक ऐसा विवाह है जहां लड़का और लड़की दोनों मानसिक तौर पर शादी के लिए तैयार नहीं होते हैं इस बिहार में एक कहावत के तौर पर कहा जाता है यह शादी का ऐसा लड्डू है जो खाए वह पछताए जो खिलाये वह पछताए। सीधे तौर पर इस विवाह को जबरन गुंडई के दम पर अंजाम दिया जाता है बहुत से मामले में इसका खामियाजा लड़की और लड़कों को भुगतना पड़ता है। यहां तक बहुत से ऐसे मामले सामने आए जहां नाबालिग लड़कों की भी जबरन पकड़वा विवाह करवा दिया जाता है इससे फोर्स मैरिज के नाम से भी जाना जाता है यहां इच्छा के विरुद्ध जबरन मारपीट कर बंधक बनाकर धमकी देते हुए हथियार के बल पर विवाह कराया जाता है।

एक समय में बिहार में इस विवाह को लेकर इतना खौफ था कि नौकरी पेशा अच्छे खानदान के लड़के बाकायदा शादी की उम्र के आसपास छिपाकर या देखरेख में रखे जाते थे कहीं उनको अगवा करके उनका जबरन पकड़वा विवाह ना करा दिया जाए इसके लिए बाकायदा लट्तो के गिरोह चलाए जाते थे जो शादी के सीजन में अच्छे घर के लड़कों को जबरन पकड़कर उनकी शादियों को जबरन करवा कर अच्छी खासी पेसगी पाते थे। यानी सीधे शब्दों में कहा जाए तो यह गिरोह आसपास अच्छी नौकरी और परीक्षाओं में पास होने वाले लड़कों की जानकारी रखकर उनका अपहरण कर पकड़वा विवाह करवा देते थे।

पकड़वा विवाह पूरी तरीके से गुंडई पर आधारित जबरन किया गया विवाह है

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बता दे लड़की वालों को अपनी लड़की के जिस लड़के से शादी करनी होती है उसको जबरन किडनैप करवा कर यानी पकड़वा कर आनन-फानन में शादी का मंडप तैयार किया जाता है और लड़की को दुल्हन की तरह तैयार कर अपहरण कर यानी किडनैप कर लाए गए तुझे से हथियार के बल पर यहां तक मारपीट कर जबरन मांग भरवाए जाती है जिसके बाद कुछ दिन तक बंधक भी रखा जाता है हथियार के बल पर साथ रहेंगे एक दूसरे का साथ निभाने की कसमें खिलाई जाती है यहां कोई मानसिक तौर पर पूरी तरीके से तैयार नहीं होता है कभी-कभी नाबालिगों की भी पकड़ कर जबरन इसी तरह की शादी करवा दी जाती है शादी के बाद दोनों को सात भेजने की रस्में निभाई जाती है कुछ समय बाद लड़की को छोड़ दिया जाता है जिसके बाद लड़का अपने घर पहुंच कर अपने परिजनों को पकड़ा विवाह की जानकारी देता है। अमूमन ऐसे विवाहों में पीड़ित पक्ष द्वारा थाने में अपहरण जबरन विभाग के मामले की तहरीर दी जाती है लेकिन कुछ दिन थाने और तहसील के चक्कर लगाने के बाद समाज के दबाव में दो-तीन वर्षों में वर और वधू पक्ष के बीच फैसले यानी समझौते होकर केस खत्म हो जाते हैं।

पकड़वा विवाह के लिए युवकों के अपहरण के मामले

पकड़वा विवाह जिसे फोस्ड मैरिज या जबरन विवाह में कहते हैं अपहरण इसके बिहार पुलिस में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक 2014 में 2526, 2015 में 3000, 2016 में 3070, 2017 में 3405, व 2018 में 4301 मामले शादी के लिए अपहरण करने के लिए दर्ज हुए थे बता दें ऐसे अधिकतर मामलों की तहरीर भी लोकल थानों पर न दर्ज होने की बहुत शिकायतें मिलती रही है कुछ तो समाज के दबाव में तहरीर नहीं दर्ज कराते हैं हालांकि इन आंकड़ों में प्रेम विवाह यानी प्रेम प्रसंग में घर से भागे प्रेमी युगलों के आंकड़ों को शामिल नहीं किया गया है। बिहार में कुल अपहरण के मामलों में से 70% सिर्फ सादिया प्रेम के लिए होता है अगर हम राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो 2015 की रिपोर्ट पर नजर डालें तो बिहार में 18 से 30 साल की युवकों का सबसे ज्यादा अपहरण हुआ है और इस उम्र के अपहरण के मामले पूरे देश के हिसाब से बिहार में 16% पर जाकर ठहरते हैं।

अपडेट जारी है…… विशाल गुप्ता की रिपोर्ट….

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