देश में जारी पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ ही उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ड्यूटी कर रहे अब तक 706 शिक्षकों की कोविड-19 के चपेट में आने की वजह से मौत हो गई है इनमें शिक्षकों के वह परिजन शामिल नहीं है जोकोविक की वजह से शिक्षकों के जरिए संक्रमित होने के बाद इस दुनिया में नहीं रहे, अभी आखरी चरण के चुनाव के बाद आंकड़े आने बाकी है। लगातार शिक्षक बता रहे हैं कि आंकड़ा हजार को पार कर सकता है इस घटना को लेकर पहले शिक्षकों ने चुनाव को टालने की बात कही थी लगातार चौतरफा दबाव बनाया। लेकिन चुनाव आयोग व प्रशासन के कानों पर जूं तक क्यों नहीं रेंगी ?

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ड्यूटी के बाद 706 शिक्षकों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिक्षा संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर दिनेश चंद्र शर्मा ने आंकड़े पेश कर इसे चौंकाने वाला बताते हुए बताया कि उन्होंने सरकार व चुनाव आयोग को पहले ही आगाह कर दिया था लेकिन संवेदनहीनता की वजह से इतने शिक्षक हमारे बीच नहीं रहे।

सरकार चुनाव आयोग के रुख के बाद डरे हुए शिक्षक, लगातार कर रहे जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

केसरी पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगने के बाद कुछ अस्वस्थ शिक्षकों को भी जबरन ड्यूटी में ढकेल दिया गया जिनकी वजह से उनकी जान चली गई जो सोचते उन्हें कोविड-19 निकल लिया लगातार शिक्षक सुविधाओं के अभाव में इंकार कर रहे थे लेकिन चुनाव आयोग प्रशासन के आगे उन्हें अपनी नगरी बचाने की जद्दोजहद में ड्यूटी जबरन करनी पड़ी जिसके बाद नतीजा आपके सामने हैं कई शिक्षकों ने इसे सोची समझी रणनीति जानते बुझते हुए उन्हें खतरे में डालकर इसे नरसंहार किए जाने का नाम दिया है 29 अप्रैल को हुए मतदान के बाद कई शिक्षक अभी संक्रमित है कईयों के परिजन खतरे में आ चुके हैं लेकिन उन्हें समुचित सुविधाओं को छोड़ दीजिए बेसिक स्वास्थ्य सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही है।

जब खतरा बढ़ा फिर भी चुनाव करवा कर मौत के मुंह में आखिर क्यों शिक्षकों को धकेला गया ?

700 से अधिक शिक्षकों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन?

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