देश में कोविड-19 का लगातार कहर जारी है रविवार को पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के मामलों ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए अब तक के सभी रिकॉर्डो को ध्वस्त कर दिया है। वही विगत 24 घंटे में 1,52,879 में कोविड-19 संक्रमित मरीज पाए गए हैं जबकि 839 नए मरीजों की कोविड-19 संक्रमण की वजह से मौत हो गई है, इसी के साथ कुल संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर एक करोड़ 33 लाख 58 हजार 805 पहुंच गई, जबकि कुल मौतों की संख्या 1,69,275 को पार कर गई है।

अब तक कोविड-19 से संक्रमित एक करोड़ 20 लाख 81 हजार 443 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे यानी डिस्चार्ज किया जा चुका है।

वर्तमान समय में देश के अंदर कुल मिलाकर 11 लाख 8087 सक्रिय मामले है जिनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जबकि कोविड-19 से बचाव के लिए देश में 10 करोड़ 15 लाख 95 हजार 147 व्यक्तियों को कोविड वैक्सीन यानी एंटी डोज लगाया जा चुका है। युद्ध स्तर पर वैक्सीन लगाने के साथ प्रधानमंत्री ने टीका महोत्सव मनाने का ऐलान कर दिया है

लेकिन इसी बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में जगह-जगह पर वैक्सीन की कमी की खबरें आ रही है,

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कई जगह पर टीकाकरण अभियान को रोका गया है। फिर भी घरेलू स्तर पर वैक्सीन की भारी कमी के बावजूद भारत द्वारा विदेशों को भारी मात्रा में वैक्सिंन निर्यात की जा रही है हालांकि इस मामले में सरकार ने बयान जारी करते हुए बताया कि भारत में वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। सबको वैक्सीन दी जाएगी, सरकार के यह वादे जमीनी स्तर पर वाकई में खोखले ही साबित होते नजर आ रहे हैं। दूसरी तरफ सोशल डिटेंशन मास्को के साथ कोविड-19 प्रोटोकॉल को लागू कराने में बड़ी तेजी से आदेश जारी किए जा रहे हैं। लेकिन हमारे राजनेता ही इन आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। आप नजर दौड़ा कर देखेंगे आसाम बंगाल समेत सभी चुनाव में प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री व सभी पार्टियों के बड़े से बड़े जिम्मेदार नेता भारी-भरकम भीड़ के साथ कोविड-19 प्रोटोकॉल की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। यह कहने में कोई हरज नहीं किए चुनाव प्रचार के साथ खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा कर यह कोविड-19 के प्रसार में योगदान दे रहे हैं।

लखनऊ में कोविड-19 का क्या कहर है, आप डीएम की जुबानी खुद सुनिएगा, डीएम कह रहे हैं कि लोग अब रोड ऊपर मर रहे हैं………

खैर भारत की राजनीतिक व्यवस्था ही इस कदर की है कि यहां कानून किताबों में कैद हैं। पहली नजर में यही लगता है कि कानून केवल आम नागरिकों के लिए राजनेताओं के लिए तो कोई अलग वाला संविधान ही लागू होता होगा, कहीं से यह देखने पर पता ही नहीं चलता कि यह भारत के नागरिक है और इन पर भारतीय कानून तनिक भी लागू होता है।

जिनकी जिम्मेदारी है वो लोकतंत्र के चारों स्तंभ लगभग खामोश है चुनाव आयोग ने आदेश जारी कर अपना पल्ला लगभग झाड़ ही लिया है। न्यायालय ने 30 अप्रैल को जवाब दाखिल करने को कहा है जबकि 29 अप्रैल को सभी चुनाव खत्म हो जाएंगे, टाइमिंग भी बड़ी मजेदार है। एक कहावत हमारे देश में बहुत कही सुनी जाती है कि भारत में हर चीज का तोड़ है, खैर टाइमिंग क्या कोई तोड़ ही है ?

देश में भारी मात्रा में वैक्सीन की कमी के बीच, विदेशों को मदद के तौर पर वैक्सीन सप्लाई जारी

घर में कमी की खबरें, फिर भी विदेशों को सप्लाई जारी आखिर क्यों ?

हमारे देश यानी भारत ने सबसे पहले अपने पड़ोसी देशों को वैक्सीन देने के साथ ही पड़ोसी का धर्म निभाते हुए वैक्सीन मित्रता की पहल शुरू की अब तक भारत ने जिम्मेदारी निभाते हुए 72 देशों को भारत में बनी स्वदेशी वैक्सीन की सप्लाई की है। कोविड-19 महामारी के वैश्विक दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैक्सीन मित्रता की सभी देशों ने प्रशंसा करते हुए सराहना भी की, इससे भारत का कद वैश्विक स्तर पर ऊंचा हुआ है। आज 11 अप्रैल को खबर लिखने तक भारत में वैक्सीन की अलग-अलग राज्यों से लेकर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों से वैक्सिंग की शॉर्टेज यानी भारी मात्रा में कमी की खबरें आई है। कई सेंटरों पर वैक्सीन की कमी के चलते वैक्सीन प्रोग्राम को रोक दिया गया है।

भारत में भारी मात्रा में वैक्सीन की कमी के बावजूद विदेशों को भेजे जाने वाली वैक्सीन की सप्लाई लगातार जारी है। लगातार देश के अंदर वैक्सीन की कमी की वजह से हमारे नागरिकों पर कोविड-19 का खतरा बढ़ता जा रहा है फिर भी विदेशों को भारी-भरकम डोज सप्लाई की जा रही है आखिर क्यों ?

17 मार्च 2021 अपने अभिभाषण में विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने राज्यसभा के पटल पर वैक्सीन मैत्री शुरू करने के पीछे की सोच को बताया था। इस वैक्सीन पहल के बाद भारत ने अब तक मदद के तौर पर 45 देशों को एक करोड़ से ज्यादा डोज मुहैया करा चुका है। भारत की मदद को लेकर डब्ल्यूएचओ के चीफ से लेकर कई देशों के प्रधानमंत्रियों ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ भी की है।

भारत में केवल 5 दिनों का वैक्सीन स्टॉक, नागरिकों के सामने खड़ी हो सकती हैं बड़ी समस्याएं

भारतीय जबसे वैक्सीन बनाने में सफलता हासिल की तब से सब ठीक चल रहा था भारत अपनी जरूरत से कई गुना अधिक व्यक्तियों का निर्माण कर मदद के तौर पर या वैक्सीन मैत्री के तौर पर देशों को बड़ी मात्रा में भारत मैं निर्मित स्वदेशी वैक्सीन देखकर वैश्विक मंच पर कूटनीतिक सफलता हासिल कर भारत को बढ़ाया। लेकिन वर्तमान हालात में भारत में केवल वैक्सीन का 5 दिन का स्टॉक शेष बचा है कई राज्यों में अचानक वैक्सीन की खबरों के बीच वैक्सीन प्रोग्राम को भी रोकना पड़ा है केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक कई राज्यों में साढे 5 दिन का स्टॉक बचा हुआ है।

बात करें आंध्र प्रदेश की तो वहां पर महज 1.2 दिन जबकि बिहार में 1 दशमलव 6 दिन का हिसाब से से ऐसे में विदेशों को जारी वैक्सीन की भारी मात्रा में सप्लाई की वजह से भारतीय नागरिकों को वैक्सीन नहीं मिल पा रही है, विपक्षी नेताओं से लेकर नागरिक लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं कि पहले घरेलू आवश्यकता ओं को पूरी कर विदेशों को से इस वैक्सीन सप्लाई की जाए लेकिन हमारी सरकार वैक्सीन को लेकर विदेश नीति के चक्कर में अपने नागरिकों को ही खतरे में डालने पर तुली हुई नजर आ रही है।

भारत में अब तक डेढ़ सौ देशों को जरूरी दवाओं की सप्लाई की है।

कोविड-19 के बीच लगातार आंकड़े दिन पर दिन रिकॉर्ड तोड़ते जा रहे हैं लेकिन भारत में चुनाव प्रचार थमने का नाम नहीं ले रहा राजनेता हजारों या फिर कहीं लाखों की भीड़ के बीच संबोधन कर चुनाव जीतने में व्यस्त हैं बेशक वह चुनाव जीत जाए लेकिन मानवता को भी करके बीच हारती हुई नजर आ रही है किसी के चेहरे पर कोई मास्क नहीं है किसी को कोई मलाल भी नहीं है।

एक नजर पश्चिम बंगाल की कृष्णा नगर चुनाव रैली की आप खुद ब खुद देख कर स्थिति समझ सकते हैं यह प्रधानमंत्री की रैली है, इनके कांधे पर लोगों को सचेत कर बचाने की जिम्मेदारी है, चुनाव के आगे कहां गई जिम्मेदारी ?

मास्क कहां ?

सोशल डिस्टेंसिंग कहां?

कानून कहां ?

न्यायालय कहां?

चुनाव आयोग के सख्त निर्देश कहां ?

खर सत्ता विपक्ष सब का यही हाल है।

लखनऊ के डीएम महोदय डॉक्टरों को समझाते हुए-

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