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सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों सांसदों के खिलाफ दर्ज अपराधिक मामलों को लेकर दाखिल एक रिपोर्ट में चौंकाने वाली जानकारी देते हुए बताया कि देश भर की अदालतों में विधायक सांसदों के खिलाफ दर्ज करीब 5000 मामले अभी पेंडिंग है पेंडिंग मामलों की संख्या 2018 के बाद से 17% बढ़ गई है रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2000 अट्ठारह तक सांसद और विधायकों के खिलाफ अदालतों में 4122 मामले यानी पेंडिंग थे जिनकी संख्या लगातार बढ़ रही है इनमें से कई पार्टियों ने अपने अपने विधायकों और सांसदों की कई राज्यों में सरकार बनने के बाद मामले वापस ले लिया बता दें उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐसे ही 76 मामले जो संगीत सोम कपिल देव सुरेश राणा और साध्वी प्राची के नाम नाम दर्ज थी को रद्द करते हुए हटा दिया है इसे राजनीतिक भाषा में कहें तो उनकी केस को वापस ले लिया गया है बता दे देश की तमाम अदालतों में ऐसे विधायक सांसदो के मामले लगातार पेंडिंग बने हुए हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा सांसदों विधायकों के खिलाफ अपराधिक मामले हाईकोर्ट की मंजूरी के बिना वापस नहीं किए जा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना समेत 3 न्यायाधीशों की पीठ ने राज्यो के सत्तारूढ़ दल से संबंधित विधानसभाओं के सदस्यों के खिलाफ प्रस्तावित मामले को वापस लेने के उदाहरणों के बाद निर्देश जारी करते हुए। मंगलवार को आदेश में विधायकों सांसदों के खिलाफ लंबित मामलों को उच्च न्यायालय की अनुमति के बिना किसी सांसद विधायक के खिलाफ कोई मामला वापस नहीं लिया जाएगा। अदालत ने अपने तीन पूर्व आदेशों का पालन करने में केंद्र की असफलता पर नाराजगी जताते हुए कहां मामले को उठाया तो लेकिन सरकार ने हमें प्रतिबद्धता दी कि ऐसे मामलों में तेजी से सुनवाई होगी लेकिन आपने कुछ नहीं किया हर क्यों नहीं कह सकते हैं सीबीआई ने अपनी बात पर जोर देने के लिए पिछले साल सितंबर अक्टूबर और नवंबर में जारी किए आदेश को भी दोहराते हुए अपनी बात पर जोर दे कर कहा। केंद्र की ओर से सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट करते हुए कहा सूची प्रस्तुत करने के लिए सीबीआई की ओर से कोई इच्छा नहीं थी उन्होंने समझाया मैं मानता हूं कि हमारी कमी है लेकिन यह समन्वय की कमी का मामला है और अनिच्छा का नहीं।

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