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देश के सबसे बड़े अखबार समूह में से एक दैनिक भास्कर के अलग-अलग ठिकानों पर आज सुबह से केंद्रीय एजेंसी के साथ इनकम टैक्स विभाग की छापेमारी चल रही है वहीं लखनऊ में भारत समाचार पर भी केंद्रीय एजेंसी यानी इनकम टैक्स विभाग (आईटी) की छापेमारी जारी है जानकारी के मुताबिक-दैनिक भास्कर समूह पर अखबार से होने वाली आय को कम दिखाकर टैक्स चोरी करने संबंधित बात की जांच के लिए विभिन्न ठिकानों पर इनकम टैक्स की टीम जांच करते हुए छापेमारी कर रहा है

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यही हाल उत्तर प्रदेश के एकमात्र मुखर चैनल भारत समाचार के संपादक स्टेट हेड के साथ अन्य प्रमोटरों के यहां इनकम टेक्स विभाग की छापेमारी जारी है भारत समाचार की संपादक ने मुखर आवाज में कहा कि उनके चैनल द्वारा लगातार सच दिखाया जाता रहेगा उन्हें सच दिखाने के चलते उत्पीड़ित किया जा रहा है। बता दें भारतीय इतिहास में यह पहली बार नहीं है केंद्रीय एजेंसियों पर सरकार की सारी पर काम करने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सरकार की हाथ की कठपुतली यानी तोता भी बताया था।

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उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले इनकम टैक्स विभाग की छापेमारी को मुखर आवाज होने के चलते दोनों समूहों पर निशाना बनाने की बात बड़ी तेजी से सामने आ रही है उत्तर प्रदेश एकमात्र भारत समाचार लगातार सरकार के हर दावे की जांच करते हुए आईना दिखाने का काम कर रहा था

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वहीं दूसरी तरफ इंग्लिश अखबार टेलीग्राफ के नक्शे कदम पर चलता हुआ दैनिक भास्कर अखबार लगातार हिंदी पट्टी में बेबाक रूख के लिए जाना जा रहा था यह सरकार के हर दावे की पड़ताल करते हुए खोजी पत्रकारिता की राह पर चलता हुआ पत्रकारिता कर रहा था सीनियर पत्रकारों के मुताबिक केंद्र सरकार राज्य सरकार और के खिलाफ मुखर आवाज की वजह से उन पर छापेमारी बदले की भावना के चलते की गई है।

खैर अगर किसी विभाग या संगठन द्वारा कोई भी अनैतिक कार्य टैक्स चोरी जैसी चीजें की जाती है तो उन पर कार्रवाई की जरूरत है लेकिन केवल उन्हें अखबारों पर यह संगठनों पर कार्यवाही जो सरकार की आलोचना कर रहे हैं सरकार को सवालों के घेरे में खड़ी करती है। क्या वाकई में यह बदले की भावना से किया गया है।

मुखर पत्रकारों की सोशल मीडिया पोस्ट क्रेडिट टि्वटर अकाउंट

बता दे देश के नामी बड़े मीडिया समूह दैनिक भास्कर ग्रुप के दफ्तरों पर इनकम टैक्स विभाग की छापेमारी जारी है इनकम टैक्स विभाग की टीमों ने दैनिक भास्कर के संस्करणों में छापेमारी के जरिए (टैक्स चोरी के आरोप लगाकर मामले की) जांच कर रही है यह छापेमारी दिल्ली गुजरात मध्य प्रदेश महाराष्ट्र राजस्थान में स्थित समूह के ठिकानों पर फिलहाल छापेमारी क्यों की जा रही है इसकी इनकम टैक्स विभाग द्वारा अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है किस मामले को लेकर छापेमारी की जा रही है दूसरी तरफ लखनऊ से संचालित होने वाले भारत समाचार के संपादक बृजेश मिश्रा स्टेट हेड के साथ अन्य प्रमोटरों के यहां इनकम टैक्स विभाग की छापेमारी जारी है। बता दे दैनिक भास्कर ग्रुप देश में कुल 5 अखबारों का प्रकाशन करता है इनमें हिंदी मराठी गुजराती भाषा में उसके 65 संस्करण देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रकाशित होते हैं

इस अखबार ने कोविड-19 काल में जवाज़ रिपोर्टिंग करते हुए लोगों का दिल जीत लिया दूसरी तरफ वेबाक खबरों के चलते शासन प्रशासन की डामाडोल स्थिति जनता के सामने आई जिसके चलते उनकी काफी किरकिरी हुई। सरकारी आंकड़ों पर दैनिक भास्कर ग्रुप…. यानी मौतों को लेकर सवाल भी उठाए। फिरहाल देश के बड़े ग्रुप दैनिक भास्कर के ठिकानों पर छापेमारी के साथ उत्तर प्रदेश के रीजनल चैनल भारत समाचार पर छापेमारी को लेकर राजनीति शुरू हो गई है।

इसे राजनेताओं द्वारा भारतीय लोकतंत्र पर प्रहार पत्रकारिता पर हमला प्रशासन की तानाशाही अनेक नामों से बताया जा रहा है। मामले को लेकर राजनेताओं के साथ पत्रकारों की प्रतिक्रियाओं से नीचे अवगत कराया जाएगा। फिर हाल इनकम टैक्स की छापेमारी सवालों के घेरे में है क्योंकि सरकार की नाकामियों को उठाने वाले ग्रुप ऊपर ही टैक्स चोरी के आरोप लगाकर छापेमारी सरकार की गोदी में बैठे कहे जाने वाले चैनल व अखबारों पर सरकार आखिर क्यों मेहरबान है यह भी सवाल लाजिमी है।

अभी देश में तीन बड़े-बड़े मुद्दों से गुजर रहा है किसान आंदोलन अपने चरम पर है आज किसानों का संसद के बाहर आंदोलन दूसरी तरफ संसद में फोन टाइपिंग व पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए जासूसी के बाद इन मुद्दों को उठाते हुए मुखर आवाज करने वाले संगठनों पर छापेमारी ने सरकार के रवैए व नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं कई पत्रकारों ने बताया कि मोदी सरकार की जो कमियां उजागर करेगा बर्बाद कर दिया जाएगा। देश में घोषित आपातकाल भले ही नहीं लगा हो। लेकिन जो हालात हैं वह आपातकाल से भी खतरनाक चल रहे हैं

वहीं राजधानी लखनऊ स्थित बृजेश मिश्रा के गोमती नगर विपुल खंड के आवास पर इनकम टैक्स की कई टीमों की छापेमारी की गई जिसे संपादक बृजेश मिश्रा ने उत्पीड़न करार देते हुए बताया कि उनका इनकम टैक्स का हिसाब सही स्पष्ट है वही पत्रकारों ने बताया यह दो मीडिया हाउस सच दिखाने का काम कर रहे थे इसके वजह से उन्हें बुरी तरीके से कुचलने की कोशिश की जा रही है बता दें इससे पहले एनडीटीवी पर भी सरकारी प्रहार हुआ था यानी जो सच्चे अर्थों में पत्रकारिता करने का काम करता है उस पर दबाव प्रहार जारी रहता है।

खैर संघर्ष और पत्रकारिता की कहानी बड़ी पुरानी है पत्रकारिता ने तो आजादी की लड़ाई को ही मोड़ दिया था यह कठिन दौर भी गुजर जाएगा, इंदिरा गांधी की तानाशाही अघोषित आपातकाल के बाद इस काल को भी जनता और देश देख रहे हैं। सरकार ने किसानों की आय 2022 तक दुगनी करने का वादा किया था अब लग रहा है आय का तो पता नहीं लेकिन खर्च जरूर दुगनी हो रहे हैं…

ट्वीट क्रेडिट-पोस्ट संबंधित टि्वटर अकाउंट यानी जिस पत्रकार बुद्धिजीवी का ट्वीट उस के लिए उसका संपूर्ण क्रेडिट, के साथ विशाल गुप्ता की रिपोर्ट….

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