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राजधानी लखनऊ में खुलेआम जीरो टॉलरेंस नीतियों की एनबीटी ऑनलाइन की पड़ताल में धज्जियां उड़ गई। पोल खुलने से बौखलाई जिम्मेदार अधिकारी राशन इंस्पेक्टर शशी सिंह ने एनबीटी के होनहार दोनों पत्रकारों पर जन सरोकारी यानी अधिकारियों से सवाल पूछने भ्रष्टाचार उजागर करने के चलते सरकारी काम में बाधा डालने समेत कई फर्जी धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया। दूसरी सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि हमारी पुलिस ने आंखें बंद करके बिना जांच पड़ताल एफ आई आर भी दर्ज कर ली, बेशक आम आदमी के मामलों में तमाम नियम कायदे कानून बीच में आते हैं। खैर आदेश ऊपर से आया होगा। प्रदेश की राजधानी का यह हाल है तो पूरे प्रदेश का ?

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नवभारत टाइम्स यानी एनबीटी ऑनलाइन के दो पत्रकारों ने रविवार 12 सितंबर को तालकटोरा स्थित राजाजीपुरम में असाइनमेंट के चलते राशन गोदाम के रखरखाव व मैनेजमेंट की कवरेज की। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन के वरिष्ठ संवाददाता विश्व गौरव अपने साथी रिपोर्टर आशीष सुमित मिश्रा के साथ पहुंचकर अनियमितताएं और नियमों को ताक पर रखकर चल रहे सिस्टम की पड़ताल करते हुए राशन गोदाम की पड़ताल की तो पता चला गोदाम की इंचार्ज शशि सिंह अन्य अफसरों के साथ मौके से गायब थी और वहां गैर-सरकारी लोग खुद को अफसर बताते हुए तरह-तरह के दावे करने लगे जोकि वीडियो में बखूबी देखा जा सकता है।

गोदाम की पड़ताल करने पर गोदाम में राशन की धांधली सामने आई। जब पत्रकार ने शशि सिंह को गायब देखते हुए फोन पर बात की तो उन्होंने सीधे तौर पर आवेश में आकर बिना किसी जांच पड़ताल एफ आई आर दर्ज कराने की धमकी दे डाली।

लखनऊ पुलिस की लापरवाही, बिना जांच-पड़ताल दर्ज हुई एफ आई आर

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खैर किसी विभाग की गलतियों का पुलिंदा आगर खुलता है तो जाहिर सी बात है उसके लपेटे में विभाग के अन्य अधिकारी भी आ ही जाते हैं अपनी पोल खुलता देख इस्पेक्टर शशि सिंह ने पत्रकारों पर दबाव बनाने के चलते तहरीर देकर फर्जी मामला दर्ज करवा दिया। (जिस समय पत्रकारों द्वारा पड़ताल की जा रही थी उस समय मैडम घर पर आराम फरमा रही थी जिस दूसरे सेंटर की उन्हें जिम्मेदारी दी गई थी वहां पर भी वह नहीं थी)

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लखनऊ पुलिस ने बिना सही गलत की जांच पड़ताल के दोनों पत्रकारों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 186 504 व 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया। इससे तो ऐसा लगता है कि पहले से ही पुलिस तैयार बैठी थी आप आइए और हम मामला दर्ज करके पत्रकारों को मजा चख आते हैं। खैर आम आदमी जब थाने में एफ आई आर दर्ज कराने जाता है उसकी स्थिति किसी से छिपी नहीं है। आरोप लगाने से कोई आरोपी हो सकता है अपराधी नहीं। पुलिस के अधिकतर मामले कोर्ट में तो टीक ही नहीं पाते, यह भी सबसे बड़ा सत्य है। बेशक पुलिस ने बिना जांच-पड़ताल के मामला दर्ज कर लिया है। उसकी विवेचना कोर्ट को करनी है वह फजीहत तय है।

किन-किन पर दर्ज किया गया मुकदमा ?

भारी अनियमितताओं के बीच अपनी गलतियों का पुलिंदा खुलने से बचाने के लिए तीन लोगों पर मामला दर्ज कराया गया, पहला नाम है पत्रकार विश्व गौरव का दूसरा उनके सहयोगी पत्रकार आशीष हैं तीसरा नाम कोटेदार अलका मिश्रा के देवर रजनीश मिश्रा का है।

कांग्रेस समेत पत्रकारों ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हुए, प्रहार पर रोष व्यक्त किया

गरीबों के हक पर अनियमितताओं के सहारे गरीबों के राशन के हक को नुकसान पहुंचाने वाली साजिश का भंडाफोड़ करने वाले पत्रकारों पर मामला दर्ज होने को लेकर पत्रकारों में भारी रोष है इस घटना को लेकर कांग्रेस ने भी कड़े शब्दों में सुबे की योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा है।

क्या जन सरोकारी पत्रकारिता करना अपराध है ?

यहां यह सवाल पूछने के पीछे भी एक कारण है राजधानी लखनऊ हो या उत्तर प्रदेश का कोई जिला अधिकतर देश के हिस्सों में भी जन सरोकारी यानी सिस्टम अधिकारियों से सवाल पूछ कर आम आदमी की आवाज उठाने वाले पत्रकारों पर यूं ही मुकदमे दर्ज किए जाते रहे हैं। इससे एक सवाल उठता है क्या अधिकारियों से सवाल पूछना अपराध है ?
या सिस्टम से सवाल करना गुनाह है ?


लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यानी मीडिया जनता के प्रति जवाबदेह हैं लोकतंत्र में असली मालिक जनता है ना कि नौकरशाही या नेता, समाज में हो रहे किसी भी भ्रष्टाचार अनियमितता नियम कायदों को ताक पर रखकर किए जा रहे हर कार्य वह चाहे जिस विभाग के हो को उजागर करके देश की असली मालिक जनता के सामने लाना ही पत्रकार का प्रमुख कार्य है यहां पर पत्रकारों ने गरीबों के राशन की गड़बड़ी को उजागर किया, जिसके चलते विभाग की पोल खुलती देख पत्रकारों पर ही उल्टे मामले दर्ज कर दिए गए। फिर यही सवाल उठता है की क्या पत्रकारिता करना अपराध है ?

क्या लोकतांत्रिक देश में भ्रष्ट लापरवाह अधिकारीयों लापरवाह नौकरशाहों नेताओं द्वारा की जा रही भीषण लापरवाही भ्रष्टाचार अनियमितताओं पर सवाल उठाना गुनाह है या उन को उजागर करना गुनाह है? इस समय पत्रकारिता करते हुए पत्रकारों के साथ जो सलूक किया जा रहा है वह इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहां सवाल उठाना भ्रष्टाचार लापरवाही उजागर करना एक अपराध जैसा हो गया है। ऐसी जन सरोकारी पत्रकारिता करने वालों को शत-शत नमन, ऐसे झूठे मामलों के द्वारा लोकतंत्र के चौथे खंभे पर प्रहार करने भ्रष्ट लापरवाह इंस्पेक्टर नेता नौकरशाह आते- जाते रहेंगे।

मीडिया और जनता यही रहेगी पोल खुलती रहेगी। देर सबेर ही सही भ्रष्टाचारी अपनी सही जगह पर पहुंचते रहेंगे।

क्रेडिट- संबंधित पत्रकार का ट्विटर अकाउंट

निजी विचारों के साथ विशाल गुप्ता की रिपोर्ट

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