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सुपरटेक लिमिटेड क्यूश याचिका को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया जिसमें उसने नोएडा में अपनी कंपनी की 40 मंजिला ट्विन टावर को गिराने के सिर्फ अदालत के आदेश में बदलाव की मांग की थी कंपनी ने याचिका में भवन मालिकों के मुताबिक केवल एक टावर के 224 फ्लैटों को भूतल पर कम्युनिटी क्षेत्र के हिस्से को आंशिक रूप से गिराने की अनुमति देने की मांग की थी लेकिन जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बी.वी नाग रत्ना की पीठ ने पूरे मामले की फाइल देखते हुए कहा सुपरटेक लिमिटेड द्वारा दाखिल आवेदन में कोई तथ्य नहीं है लिहाजा इसे खारिज किया जाता है। सरल शब्दों में कहें तो सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह की राहत देना इस न्यायालय के फैसले और विभिन्न फैसलों पर पुनर्विचार करने के सामान्य है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला बरकरार, गिराए जाएंगे नोएडा में बने सुपरटेक के 240 मंजिला टावर्स

राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में बने सुपरटेक लिमिटेड के दो 40 मंजिला टॉवर्स को गिराने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट बरकरार है आंशिक रूप से ध्वस्त करने की याचिका को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया है दो 40 मंजिला टावर पुरानी को लेकर सुपरटेक लिमिटेड ने याचिका देते हुए कहा था टावर 17 सेन के दूसरे रियासी टावरों के पास होने की वजह से उसे विस्फोटक के माध्यम से ध्वस्त नहीं कर सकते इसलिए उसे धीरे-धीरे तोड़ना होगा कंपनी ने तर्क दिया प्रस्तावित संशोधनों का अंतर्निहित आधार या है कि अगर इसकी मंजूरी मिलती है तो करोड़ों रुपए के संसाधन बेकार होने से बच जाएंगे।



31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक लिमिटेड के 40 मंजिला दोनों टावरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था

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