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लखनऊ- अपनी जूनियर से चेंबर में दुष्कर्म के आरोपी अधिवक्ता पर हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा गिरफ्तारी पर रोक लगाने वाले आदेश पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है जिसके बाद अब लखनऊ से लेकर देश के कई सामाजिक संगठनों द्वारा दुष्कर्म के मामले में आरोपी वकील की गिरफ्तारी की मांग लगातार बढ़ती जा रही हैं। जिसके बाद लखनऊ पुलिस पर आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। कई समाजिक संगठनों ने आवाज उठा रहे हैं कि गिरफ्तारी से रोक हटने के 2 दिन बाद भी आरोपी को अब तक क्यों गिरफ्तार नहीं किया गया है। इस मामले पर जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता नूतन ठाकुर ने ट्वीट करते हुए

आरोपी अधिवक्ता की जल्द गिरफ्तारी की मांग करते हुए 24 वर्षीय पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए अभियान चलाया हुआ है।

नगर निगम के सरकारी अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह चौहान पर 24 वर्षीय जूनियर अधिवक्ता ने चेंबर में 24 जुलाई को दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए 24 जुलाई को ही गोमती नगर के विभूति खंड थाने में उनके खिलाफ एफ आई आर दर्ज करवाई जूनियर महिला अधिवक्ता ने आरोप लगाया था।

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कि आरोपी जो कि उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में सरकारी वकील ने अपने चेंबर में उनके साथ दुष्कर्म किया। वहीं दूसरी तरफ दुष्कर्म के आरोपी वकील ने सफाई देते हुए बताया कि वह निर्दोष हैं और उन पर लगे दुष्कर्म के आरोप झूठे हैं। वही आरोपी वकील ने f.i.r. को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए अपनी गिरफ्तारी पर रोका का आग्रह किया था। 1 सप्ताह पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने आरोपी वकील शैलेंद्र की याचिका पर दुष्कर्म के आरोप झेल रहे सरकारी वकील को गिरफ्तार न करने का पुलिस को निर्देश देते हुए आरोपी वकील की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी वही वकील को निर्देश दिया था कि वह सभी प्रकार के जांच में सहयोग करने के साथ जब भी बुलाया जाए उपलब्ध रहे। वहीं 6 अगस्त दिन बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के गिरफ्तारी रुक वाले आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है बताती आरोपी वकील ने तत्काल कार्रवाई को रद्द करने की जो याचिका दी थी उससे हाईकोर्ट की बेंच ने भी रद्द करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति एस आर मसूदी और न्यायमूर्ति राजू सिंह की खंडपीठ ने f.i.r. पर गौर करने के बाद प्रथम दृष्टा बताया हम इस बात से संतुष्ट है कि इस मामले में याचिकाकर्ता (यानी कि आरोपी को) गिरफ्तार नहीं किया जाए। पीड़ित द्वारा इस आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी।

जिसके बाद शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि एक अंतरिम उपाय के रूप में सक्षम न्यायालय को लंबित आवेदन पर आवश्यक आदेश पारित करने के लिए निर्देशित किया जाता है ताकि जांच एजेंसी से संबंधित सामग्री को अपने कब्जे में ले सके जो कि मामले पर असर डाल सकती हैं। प्रचुर सावधानी के रूप में हम प्रदान करते हैं कि इस आशय का उचित आदेश पारित किया जा सकता है ताकि मामले के साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ ना हो।

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