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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारी में जुटी बीजेपी बूथ स्तर से लेकर विधान सभा सीट के स्तर पर जोड़-तोड़ के साथ तैयारी में जुटी है। इसी बीच यूपी चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को प्रयागराज पहुंचे इस दौरान उन्होंने विधानसभा चुनाव 2022 में विधान सभा चुनाव 2017 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा करते हुए अपनी राजनीतिक गठबंधन की पार्टियों समेत कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में जुट गई है

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सोमवार को काशी प्रांत के पांच जिलों के मंडल अध्यक्ष और मंडल प्रभारियों की बैठक में पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान ने दोबारा यूपी विजय करते हुए 2017 की तुलना में ज्यादा सीटों से वापस सरकार बनाने की बात की है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहां प्रदेश के लोगों की आस्था सीएम योगी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा में है इसी आधार पर बीजेपी प्लस पॉइंट में है वह पहले से ज्यादा सीट जीतकर 2022 में दोबारा सरकार बनाएगी।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 से पहले निषाद पार्टी और बीजेपी में दरार की संभावना

सोमवार को निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने कहा कि जब तक बीजेपी अपनी आरक्षण की स्थिति को साफ नहीं कर देती तब तक निषाद समुदाय उनकी पार्टी को वोट नहीं देगा यह बीजेपी की जिम्मेदारी है कि समुदाय से किए गए वादे को पूरा करें। उन्होंने यह बात विधान परिषद के सदस्य के रूप में शपथ के 10 दिन बाद करते हुए बीजेपी को चेतावनी भरे लहजे में कहां है यानी बीजेपी द्वारा एससी कोटे से निषादों को आरक्षण न दिए जाने पर आगामी चुनाव में एनडीए की सहयोगी दल निषाद पार्टी के साथ संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। बता दे उन्होंने घोषणा करते हुए आरक्षण के मुद्दे पर हो रही देरी का विरोध कर निषाद पार्टी ने मंगलवार को प्रदेश के सभी जिलों में प्रदर्शन व निषादों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने और राज्य सरकार की नौकरियों में आरक्षण कोटा तय करने की मांग की बात कही है।

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पहले ही बीजेपी से नाराज होकर उनकी एक सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी उनको छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम चुकी है ऐसे में निषाद पार्टी का जाना बीजेपी के लिए दोहरा झटका हो सकता है बरहाल बीजेपी को पिछड़े वोटों की बड़ी आबादी पर निषाद पार्टी की वजह से मजबूत पकड़ दिख रही है। ऐसे में निषाद पार्टी अगर बीजेपी को छोड़ती है तो बड़ी संख्या में निषादों के वोटों से बीजेपी को हाथ धोना पड़ सकता है।

राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो समय ही तय करेगा। फिर हाल सभी पार्टियां अपने-अपने समीकरण बनाने में जुटी है। नेताओं का हवा का रुख देखकर आना-जाना और चुनावी समीकरण साधना जारी है। बेशक उत्तर प्रदेश असेंबली इलेक्शन 2022 की तारीख अभी घोषणा हुई हो, लेकिन प्रदेश में चुनावी माहौल सर चढ़कर बोल रहा है।

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