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उत्तर प्रदेश में अभी राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा जमीन खरीद का मामला शांत ही नहीं हुआ था कि कोविड-19 से निपटने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा करीब 58 करोड रुपए की कोविड-19 उपकरणों की खरीद में घोटाला खुलकर सामने आता हुआ नजर आ रहा है। इस मामले पर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने बीजेपी पर घोटाले का गंभीर आरोप लगाते हुए सियासी हमला बोला है। वही आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस संबंध में सबूतों के साथ हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

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कोविड-19 कारण खरीद का क्या है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश में अचानक कोविड-19 की दूसरी लहर से निपटने के लिए बेहाल स्वास्थ्य सुविधाओं को पटरी पर लाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से 58 करोड रुपए के उपकरण की सप्लाई के ऑर्डर दिए गए पूरा घोटाला इसी सप्लाई से जुड़ा हुआ है। एक खरीदने अनियमितताओं को लेकर आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाते हुए कागजात पेश किए हैं कि प्रशासन द्वारा बिना टेंडर निकाले ब्लैक लिस्टेड कंपनियों से सीधे डील करते हुए करोड़ों का घोटाला किया गया है। सीधे शब्दों में कहे तो जो वेंटीलेटर मार्केट में 10 लाख में उपलब्ध है उसे इन ब्लैक लिस्टेड कंपनियों से 22 लाख में खरीदा गया जबकि जो 14 लाख की rt-pcr मशीन मार्केट में उपलब्ध है उसे ₹ 49 के हिसाब से खरीदा गया वहीं बच्चों के लिए पी-आईसीयू के उपकरणों में भी भारी वित्तीय अनियमितताएं सामने आ रही हैं। प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने इसका आदेश जारी किया था पूरे मामले में वित्तीय अनियमितताएं खुलकर सामने आने के बाद भी अभी तक जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं। सीधे-सीधे प्रथम दृष्टि नजर आ रहा है कि उपकरणों की खरीदारी में नियमों में ढील देते हुए 2 से 4 गुनी कीमत पर उपकरणों को खरीदा गया है।

उपकरण खरीद का आदेश पत्र
खरीद प्राइस और मार्केट में उपलब्ध प्राइस का का अंतर

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पूरे मामले पर चिकित्सा शिक्षा विभाग का पक्ष आने पर उनकी बात भी नीचे निष्पक्ष तरीके से रखी जाएगी फिलहाल पूरे मामले में जो भी अनियमितताएं हैं उनकी जांच कराकर प्रशासन को इस घोटाले में शामिल सभी आरोपियों पर तत्काल कार्रवाई करने की जरूरत है।

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने बीजेपी पर बोला हमला कहा-

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ट्विट क्रेडिट- आप सांसद संजय सिंह

आखिर क्यों ब्लैक लिस्टेड कंपनी से माल खरीदा गया ?

क्यों नहीं निकाला गया टेंडर ?

मार्केट से कई गुना अधिक कीमत पर क्यों खरीदे गए चिकित्सा उपकरण ?

अनियमितताओं के तथ्य सामने आने के बाद, अब तक जांच आखिर क्यों नहीं ?

ओपन टेंडर आखिर क्यों नहीं ?

लखनऊ से विशाल गुप्ता की रिपोर्ट

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