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भगवान विश्वकर्मा का कल्याणकारी मंत्र

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पौराणिक काल के सबसे पहले बड़े सिविल इंजीनियर माने जाने वाले भगवान विश्वकर्मा की जयंती यानी जन्मदिन हर साल कन्या सक्रांति के दिन 17 सितंबर को मनायी जाती है। और इस बार इस विश्वकर्मा जयंती के साथ पक्ष एकादशी भी पड़ने से अद्भुत संयोग बन रहा है 17 सितंबर यानी शुक्रवार को भगवान विश्वकर्मा की शुभ मुहूर्त में पूजा होनी है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था।

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त | vishwakarma puja 2021 shubh muhurt

शुक्रवार यानी 17 सितंबर 2021 की सुबह 6:07 से 18 सितंबर दिन शनिवार 3:36 तक भगवान विश्वकर्मा की पूजन करने की शुभ घड़ी है केवल राहु काल के समय पूंजा निषेध मानी गई है 17 सितंबर को राहु काल सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा। बाकी समय पूजा का शुभ योग रहेगा। 17 सितंबर की रात 1:29 पर सूर्य की कन्या संक्रांति का समय है।

विश्‍वकर्मा की आरती | आरती भगवान विश्वकर्मा की | विश्वकर्मा पूजा
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शास्त्रों के मुताबिक विश्वकर्मा भगवान ब्रह्मा जी के पुत्र है विश्वकर्मा पूजा को विश्वकर्मा जी के जन्मदिन के उपलक्ष में मनाया जाता है।

भगवान विश्वकर्मा जी का एक सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला मंत्र है कहते हैं इस मंत्र के जाप के बिना विश्वकर्मा जी की आरती पूजा अर्चना पूरी नहीं मानी जाती है।

विश्वकर्मा जी का मंत्र

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विश्वकर्मा पूजा का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को विश्व के सबसे पहले इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान विश्वकर्मा ने ही पुष्पक विमान, इंद्रपुरी, द्वारिकापुरी, हस्तिनापुर स्वर्ग लोक, लंका और जगन्नाथ पुरी का निर्माण किया था। जो आज भी अद्भुत इंजीनियरिंग की जीती जागती मिसाल है धार्मिक मान्यताएं कहती हैं ब्रह्मा जी के साथ मिलकर विश्वकर्मा जी ने सृष्टि का निर्माण करते हुए भगवान शिव और विष्णु के सुदर्शन चक्र का भी निर्माण किया गया था। लोगों विश्वकर्मा को सृष्टि के पहले निर्माता रचनाकार मानते हैं इसीलिए तकनीकी से जुड़े सभी लोग भगवान विश्वकर्मा को अपना आदर्श मानते हुए इस दिन सभी कारखाने उद्योग मोटर गाड़ियों के साथ अपने यंत्रों की पूंजा करते हुए भगवान से सहयोग करने की प्रार्थना करते हैं कहते हैं भगवान विश्वकर्मा पूजा अर्चना से खुश होकर अपने सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हुए उनके व्यापार उद्योगों में तरक्की करते हैं।

आरती विष्णु भगवान की | आरती ओम जय जगदीश हरे | Vishnu bhagwan ki Aarti

कलयुग में क्यों जरूरी मानी गई है विश्वकर्मा जी की पूजा

कहते हैं कलयुग भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा हर रचनाकार व्यक्ति के लिए जरूरी और लाभदायक है कलयुग का संबंध इंजीनियरिंग के विकास कानपुर जो से माना जाता है यह युग विज्ञान का युग है आज के युग में कलपुर्जे का उपयोग हर व्यक्ति करता है चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक हो या मैकेनिकल या फिर निर्माण उद्योग संबंधी बिना कानपुर जो कि कोई भी उद्योग संभव नहीं है इस कलयुग में भगवान विश्वकर्मा यानी विश्व के प्रथम रचनाकार की कुंजा शुभ फलदाई और कुशलता प्रदान करने वाली मानी जाती है इसलिए विश्वकर्मा पूजा का महत्व कलयुग में और अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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